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अनहोनी की आशंका: लंबे समय से नहीं हुई शासकीय कार्यालयों व आवासों की मरम्मत

बरेली15 मिनट पहले

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  • कई बार मांग के बाद भी नहीं हुई सुनवाई,

नगर में वर्षों से शासकीय कार्यालय एवं आवासों की मरम्मत और देखरेख नहीं होने के चलते शासकीय कार्यालय और आवास पूरी तरह से कंडम हो चुके हैं। बावजूद इसके कर्मचारी मजबूरी में यहां निवास करने को मजबूर हैं। इनकी मरम्मत नहीं होने के चलते कुछ आवासों की स्थिति तो यह हो चुकी है की कब यहां कोई घटना हो जाए यह कुछ कहा नहीं जा सकता । बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग के द्वारा इन क्षतिग्रस्त भवनों में मरम्मत को लेकर किसी प्रकार से कोई कार्य नहीं करवाया जाता ।
नगर में तकरीबन 70 से अधिक शासकीय क्वार्टर है जिनमें वर्तमान में शासकीय कर्मचारी अपने परिवार सहित यहां निवास कर रहे हैं। साथ ही वह शासकीय कार्यालय जो वर्तमान में क्षतिग्रस्त हैं जहां पर कार्यालय संचालित है, लेकिन दोनों ही जगह मरम्मत के अभाव में यहां की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। बारिश में ज्यादा परेशानी होगी।
वही नगर में कुछ ऐसे भी शासकीय आवास है जिन्हें पूर्व में पीडब्ल्यूडी विभाग के द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया है। बावजूद इसके आज भी इन आवासों में शासकीय कर्मचारी रह रहे हैं। वहीं कंडम कार्यालयों में भी शासकीय कामकाज हो रहा है। बारिश के दौरान यहां पर जगह जगह से इन आवासों और कार्यालयों की छत से पानी टपकने लगता है।
यह कार्यालय है जो क्षतिग्रस्त हैं
एसडीएम कार्यालय, पुरानी कन्या शाला, पशु चिकित्सालय, महिला बाल विकास, थाना भवन, हॉस्पिटल के पीछे के क्वार्टरz बारना कॉलोनी के क्वार्टर, तहसील कर्मचारियों के क्वार्टर ,पशु चिकित्सालय के क्वार्टर , पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों के क्वार्टर, पुलिस कॉलोनी के क्वार्टर आदि है यहां पर कर्मचारी परिवार सहित रह रहे हैं।

बारिश के दौरान यहां की स्थिति यह हो जाती है कि जगह-जगह से छत से पानी टपकता है तो कभी-कभी दीवारों पर करंट उतरने लगता है। ऐसी स्थिति में मजबूरी के चलते यहां निवास करने वाले अपनी जान जोखिम में डालकर निवास करने को मजबूर रहते हैं।

क्षतिग्रस्त कार्यालय व भवनों से बारिश में होगी दिक्कत
नगर के शासकीय कार्यालय व आवास वर्षों से क्षतिग्रस्त पड़े हैं। हर साल बारिश में भवनों में रहने का डर बना रहता है। लंबे समय से इनकी मरम्मत नहीं होने के कारण बारिश के समय कभी भी गिरने का डर यहां रहने वाले लोगों को होता है। नगर के कई कार्यालयों के भी यही हाल है।

वहीं जिम्मेदार लोग भी इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। लगता है उन्हें दुर्घटना का इंतजार है। कई बार लोगों ने इस समस्या की ओर ध्यान भी दिलाया पर संबंधित विभाग द्वारा अनदेखी के चलते कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। लोगों ने इन क्षतिग्रस्त भवनों को बारिश के पूर्व शीघ्र ही सुधारने की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

स्क्वायर मीटर के हिसाब से हाेती है मरम्मत
वार्षिक मरम्मत को लेकर प्रतिवर्ष वरिष्ठ कार्यालय को पत्र के माध्यम से सूचित किया जाता है । इनकी रिपेयर को लेकर नंबरिंग के हिसाब से व्यवस्था नहीं है। स्क्वायर मीटर के हिसाब से रिपेयर किया जाना है। विगत वर्ष भी विभाग द्वारा कुछ क्वार्टर और एसडीएम कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों के ऊपर सीसी चादर डलवाकर रिपेयर करवाया था । वर्तमान में भी डॉक्टर यादव सहित अन्य क्वार्टरों की रिपेयरिंग की जा रही है।
-नितिन पटेल , एसडीओ पीडब्ल्यूडी

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उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर

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