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आपदा में अवसर: जेनरल को स्पेशल ट्रेन बनाकर, एक ट्रिप में यात्रियों से 4 लाख कमा रहा है रेलवे

रांची3 घंटे पहले

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हटिया रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से बुधवार की रात 11:55 बजे हटिया से पुणे के लिए स्पेशल ट्रेन रवाना हुई। इस ट्रेन में 900 से ज्यादा यात्री सवार हो कर पुणे गए। इसके अलावा चार बोगी जनरल कोच लगाए गए थे। रेलवे के अनुसार, 1100 से ज्यादा यात्री हटिया से महाराष्ट्र के लिए रवाना हुए हैं। लोहरदगा से करीब काफी संख्या में मजदूर मुंबई गए हैं।

  • रेलवे अधिकारियों का तर्क- कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए ऐसा किया गया है
  • रांची रेल डिवीजन में 11 ट्रेनें स्पेशल के रूप में चल रही हैं, जिसमें यात्रियों से अधिक किराया लिया जा रहा

रेलवे ने आपदा को अवसर बना लिया है। कोरोना के कारण वह सालभर से अधिक समय से सामान्य ट्रेनों का किराया स्पेशल ट्रेन का किराया 1.3 टाइम्स (गुना) बढ़ाकर ले रहा है। लेकिन, सुविधाएं नहीं रहा। यहां तक बेडशीट और कंबल भी यात्रियों को नहीं मिल रहे हैं। वहीं, ट्रेन में खाने-पीने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इसके पीछे तर्क यह है कि आपदा संक्रमण को रोकने के लिए ऐसा किया गया है। आपदा काल में केवल एक ट्रेन हटिया-यशवंतपुर आरक्षित श्रेणियों के सामान्य किराए से लगभग चार लाख रुपए ज्यादा कमा रहा है।

जबकि, दोनों ट्रिप को जोड़ दें, तो आठ लाख रुपए की कमाई हो रही है। इस ट्रेन को स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया जा रह है। अभी ऐसे ही रांची रेल डिवीजन में 11 ट्रेनें स्पेशल के रूप में चल रही हैं। इनमें यात्रियों से स्पेशल ट्रेन का किराया लिया जा रहा है। स्लीपर क्लास थर्ड एसी और सेकेंड एसी क्लास के कुल यात्रियों की संख्या 980 है।

हटिया से यशवंतपुर तक सामान्य किराया 1297960 रुपए होता है, लेकिन स्पेशल किराया जोड़ने पर 1685980 लाख रुपए रेलवे कमाता है। सामान्य और स्पेशल के बीच अंतर 388020 लाख रुपए अतिरिक्त कमाई हो रहा है। जबकि इसमें सामान्य क्लास के चार बोगियों का किराया नहीं जोड़ा गया है। यानि एक ट्रिप हटिया से यशवंतपुर जाने और आने पर रेलवे करीब आठ लाख से जयादा कमाई कर रहा है, जबकि अभी कोरोना काल का समय है।

रेल मंत्रालय के एडीजी पीआर से भास्कर का सीधा सवाल

पैसेंजर ट्रेन से रेलवे मुनाफा नहीं कमाता है

सवाल – डीजे नारायण से जब फाेन पर पूछा गया कि एक बर्थ का सामान्य किराया से अधिक 765 रुपए ले रहा है। ये क्या उचित है। आपदा में स्पेशल किराया क्यों लिया जा रहा है और स्पेशल ट्रेन की जगह सामान्य ट्रेनें क्यों नहीं चलाई जा रही है।
जवाब – जो रेट बता रहे है। इसका आइडिया नहीं है। जब तक सिचुएशन सामान्य नहीं हाेगा। तब तक स्पेशल ट्रेन के रूप में चलेगी। बहुत सारे फैक्टर है। कोई भी संस्था घाटे में नहीं चल सकती है। रेलवे टिकट पर 45 से 50 फीसदी सबसिडी दे रही है। दुनिया का सबसे सस्ता ट्रांसपोर्ट रेलवे है। पैसेंजर ट्रेन से रेलवे मुनाफा नहीं कमाता है। झारखंड पैसेंजर एसोसिएशन के सचिव ने प्रेम कटारूका ने कहा कि रेल मंत्रालय और रेलवे बाेर्ड दोनों से पूछा किसके आदेश पर सामान्य ट्रेन को स्पेशल ट्रेन बनाया गया और किराया अधिक वसूल रहा है। इसका जवाब दें रेल मंत्रालय। अधिक किराया वसूलना गलत है। वैसे ही लोगों की कमर टूट गई है। आपदा की मार से जेब खाली है। उन पर अधिक भार ना बढ़ाते हुए दाेहन ना करें।

ये 11 ट्रेनें चल रहीं स्पेशल के रूप में

  1. हटिया माैर्य
  2. हटिया यशवंतपुर
  3. वनांचल
  4. हटिया इस्लामपुर
  5. हटिया-पुर्णियाकाेर्ट
  6. रांची-वाराणसी
  7. रक्साैल-हैदराबाद
  8. रांची-हावड़ा क्रियायोग
  9. हटिया-मुंबइ
  10. रांची-जनशताबदी
  11. रांची-देवघर इंटरसिटी

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