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आरबीआई मौद्रिक नीति समिति का फैसला: ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, चालू वित्त वर्ष में ग्रोथ का अनुमान घटाकर 9.5% किया​​​​​​​

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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने ब्याज दरों को बरकरार रखने का फैसला किया है। तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में यह फैसला किया गया है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। शक्तिकांत दास ने कहा कि ग्रोथ को बरकरार रखने के लिए बैंक एकोमोडेटिव स्टांस को बरकरार रखेगा।

ये हैं मौजूदा दरें

  • रेपो रेट 4.00%
  • रिवर्स रेपो रेट 3.35%
  • मार्जिनल स्टैंडिंंग फैसिलिटी रेट 4.25%
  • बैंक रेट 4.25%

चालू वित्त वर्ष में ग्रोथ का अनुमान घटाकर 9.5% किया

गवर्नर ने कहा कि महंगाई में हाल ही में आई कमी से थोड़ी गुंजाइश बनी है। उन्होंने कहा कि विकास की गति हासिल करने के लिए पॉलिसी स्तर पर सभी पक्षों का समर्थन आवश्यक है। गवर्नर ने कहा कि सामान्य मॉनसून से इकोनॉमी रिकवरी को मदद मिलेगी। शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान के घटाकर 9.5% कर दिया है। इससे पहले आरबीआई ने 10.5% की ग्रोथ रहने का अनुमान जताया था। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 में खुदरा महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया है।

अप्रैल में दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था

MPC पैनल ने अप्रैल 2021 में हुई अपनी पिछली बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। इस बार में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह लगातार छठा ऐसा मौका है जब आरबीआई की अहम दरें वर्तमान स्तरों पर ही बरकरार रखी गई हैं। 2020 में आरबीआई ने 115 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी।

कटौती का ग्राहकों को पूरा लाभ नहीं देते बैंक

रिजर्व बैंक ने कई बार दरों को घटाया है, पर बैंक इसका पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं देते हैं। पिछले कोरोना से लेकर अब तक रिजर्व बैंक ने करीबन 1.50 पर्सेंट से ज्यादा की दरों में कटौती की है। हालांकि, इस समय लोन पर ब्याज की दरें वह ऐतिहासिक रूप से सबसे कम हैं। यही हाल आपकी बैंक में जमा रकम पर भी है। उस पर भी सबसे कम ब्याज मिल रहा है।

MPC में 6 सदस्य होते हैं

MPC में 6 सदस्य होते हैं। 3 सरकार के प्रतिनिधि होते हैं। 3 सदस्य RBI का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें गवर्नर शक्तिकांत दास भी शामिल हैं।

क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है। बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। अब रेपो रेट कम होने का अर्थ है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। जबकि रिवर्स रेपो रेट, रेपो रेट से ठीक विपरीत होता है। रिवर्स रेट वह दर है, जिस पर बैंकों की ओर से जमा राशि पर आरबीआई से ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट के जरिए बाजारों में लिक्विडिटी यानी नकदी को ​नियंत्रित किया जाता है। यानी रेपो रेट स्थिर होने का मतलब है कि बैंकों से मिलने वाले लोन की दरें भी स्थिर हो जाएगी।

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