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कोरोना की चपेट में बैंक कर्मचारी: अब तक 1 लाख कोरोना के शिकार; 1000 ने गंवाई जान, एसोसिएशन की मांग- पहले हमें मिले वैक्सीन

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मुंबई2 मिनट पहलेलेखक: अजीत सिंह

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सरकार जब डिजिटल बैंकिंग में इतनी तेजी से काम कर रही है तो ऐसे में शाखाओं को 100% चालू रखने की जरूरत नहीं है। वैसे कुछ राज्यों में नियमों के मुताबिक, शाखाओं में 15 या फिर 50% ही कर्मचारियों की उपस्थिति से काम हो रहा है

  • गुजरात में 15 हजार बैंक कर्मचारी पॉजिटिव हैं और इसमें से 30 की मौत हो चुकी है
  • मध्य प्रदेश में 3,672 कर्मचारी कोरोना से पॉजिटिव हैं। इसमें से 46 की मौत हो चुकी है

कोरोना की दूसरी लहर बैंकिंग कर्मचारियों के लिए घातक बनती जा रही है। देश भर में अब तक 1 लाख बैंकिंग कर्मचारी कोरोना से प्रभावित हैं। जबकि 1 हजार कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। इससे कई राज्यों में बैंक की शाखाओं को बंद करना पड़ा है तो कुछ में कम कर्मचारियों से काम चल रहा है। बैंकिंग एसोसिएशन ने सरकार से तत्काल इस पर कदम उठाने को कहा है।

देश में 15 लाख बैंकिंग कर्मचारी

ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉयीज एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव C.H. वेंकटचलम ने भास्कर से कहा कि देशभर में करीबन 15 लाख बैंकिंग कर्मचारी हैं। पिछले कोरोना से लेकर अब तक कुल 1 लाख कर्मचारी इसकी चपेट में आए हैं। उनके मुताबिक, कोरोना की दूसरी लहर में गुजरात में 15 हजार बैंक कर्मचारी पॉजिटिव हैं और इसमें से 30 की मौत हो चुकी है। यहां पर 9,000 शाखाओं में कुल 50 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।

मध्य प्रदेशमें 46 की मौत

इसी तरह मध्य प्रदेश में 3,672 कर्मचारी कोरोना से पॉजिटिव हैं। 46 की मौत हो चुकी है। गुजरात और मध्य प्रदेश में इस वजह से कई बैंकों की शाखाओं को बंद करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बैंकों की सबसे ज्यादा शाखाएं हैं। उनके मुताबिक यहां पर सबसे ज्यादा बैंक कर्मचारी कोरोना से पॉजिटिव हैं। हालांकि इसका सही आंकड़ा उनके पास नहीं है।

बैंक कर्मचारी को कोरोना वॉरियर्स माना जाए

वेंकटचलम ने कहा कि बैंकिंग कर्मचारियों को कोरोना वॉरियर्स मानकर उन्हें सभी सुविधाएं देनी चाहिेए। एसोसिएशन ने इस संबंध में सरकार को पत्र भी भेजा है, पर सरकार की ओर से कोई अमल नहीं हुआ है। वे कहते हैं कि एक तो यह करना चाहिए कि जो बैंक कर्मचारी कोरोना से प्रभावित हैं, उन्हें मुआवजा मिले। इसके लिए सरकार की स्कीम भी है। दूसरा बैंक शाखाओं में केवल जरूरी सेवाओं को ही चालू रखा जाए, बाकी सेवाएं बंद की जाएं। साथ ही कम से कम शाखाओं को चालू रखा जाए।

बैंकिंग सेक्टर में कोरोना से मरने वालों की संख्या 0.006% है

उन्होंने कहा कि देश में कोरोना से मौतों की संख्या 0.001% है जबकि बैंकिंग सेक्टर में यह 0.006% है। सरकार जब डिजिटल बैंकिंग में इतनी तेजी से काम कर रही है तो ऐसे में शाखाओं को 100% चालू रखने की जरूरत नहीं है। वैसे कुछ राज्यों में नियमों के मुताबिक, शाखाओं में 15 या फिर 50% ही कर्मचारियों की उपस्थिति से काम हो रहा है। फिर भी बैंकिंग शाखाओं को पूरी तरह से खोलना सही नहीं दिख रहा है।

बैंकिंग सेक्टर के लिए खराब रहा है कोरोना का अनुभव

देश में निजी क्षेत्र में दूसरे सबसे बड़े बैंक ICICI बैंक के कार्यकारी निदेशक अनूप बागची कहते हैं कि पिछले साल का कोरोना का अनुभव बैंकिंग सेक्टर में खराब रहा है। इसलिए प्रायोरिटी के तौर पर बैंकिंग कर्मचारियों को वैक्सीन पहले देना चाहिए क्योंकि वे भी जरूरी सेवाओं के दायरे में आते हैं। यदि बैंकिंग सेवाएं फेल होती हैं तो यह अर्थव्यवस्था की गतिविधियों पर बुरा प्रभाव डालेंगी।

वैक्सीन की जरूरत पहले जरूरी सेवाओं के लिए

बागची कहते हैं कि हम जरूरी सेवाओं के दायरे में हैं, लेकिन हमें वैक्सीन नहीं मिल रही, ट्रेन में जाने को मंजूरी नहीं है, बसों में जाने को मंजूरी नहीं है, तो फिर किस चीज के लिए हम जरूरी सेवाओं के दायरे में हैं? वे कहते हैं कि बैंक शाखाओं में रोजाना सैकड़ों ग्राहक आते हैं। इसलिए सबसे ज्यादा खतरा बैंक कर्मचारियों को है।

उत्तर प्रदेश में 18,800 शाखाएं हैं

देश में कुल 1 लाख 58 हजार 300 शाखाएं बैंकों की हैं। इसमें से आंध्रप्रदेश में 7,615 शाखाएं, बिहार में 7783, गुजरात में 9,000, कर्नाटक में 11,000, केरल में 7 हजार, तमिलमाडु में 12,500, उत्तर प्रदेश में 18,800, मध्य प्रदेश में 7,500, महाराष्ट्र 14,100, पंजाब में 7 हजार, राजस्थान में 8 हजार और पश्चिम बंगाल में 10 हजार शाखाएं है। देश में कोरोना मरीजों की संख्या 3.80 लाख से ज्यादा है।

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