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कोरोना रोगियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़: कोरोना संकट के बीच ब्लैक में बेचे जा रहे नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन; क्राइम ब्रांच ने उत्तराखंड में नकली इंजेक्शन बनाने वाली यूनिट को पकड़ा, 7 गिरफ्तार

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नई दिल्ली39 मिनट पहले

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इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड आदित्य गौतम है। वह बीकॉम कर चुका है। साल 2006 में वह एक कंपनी में बतौर अकाउंट एग्जीक्यूटिव काम करता था।

क्राइम ब्रांच ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाली एक यूनिट का पर्दाफाश किया है। कोटद्वार उतराखंड में रेड डाल पुलिस ने इस यूनिट को सील कर दिया है। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के धंधे से जुड़ सात लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। मामले में पुलिस ने 198 नकली रेमडेसिविर की शीशी, एक पैकिंग मशीन, तीन हजार खाली शाली, पैकिंग मैट्रेरियल, एक स्कोर्पियाे और स्कूटी जब्त की है।

आरोपियों की पहचान गांधी नगर दिल्ली निवासी मोहम्मद शोएब खान (28), फरीदाबाद हरियाणा निवासी मोहन कुमार झा (40), गाजियाबाद यूपी निवासी मनीष गोयल (35), महाराष्ट्र निवासी पुष्कर चंदरकांत (32), यमुना विहार निवासी साधना शर्मा (40), हरिद्वार उतराखंड निवासी वतन कुमाार सैनी (32) व आदित्य गौतम (33) के तौर पर हुई। इस पूरे गौरखधंधे का मास्टर माइंड आदित्य गौतम है

क्राइम ब्रांच डीसीपी माेनिका भारद्वाज ने बताया कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच जीवन रक्षक दवा रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग एकदम से बढ़ गई, जिस कारण चारों तरफ से इसकी कालाबाजारी की खबरें सामने आने लगीं। इंस्पेक्टर नीरज चौधरी की टीम ने 23 अप्रैल को एक सूचना पर मोहम्मद शोएब खान और मोहन कुमार झा को महरौली बदरपुर रोड संगम विहार से दबोचा, जो रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में शामिल थे। इनके पास से दस रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किए गए। इनसे हुई पूछताछ में खुलासा हुआ वे नकली इंजेक्शन को ऊंचे दामों पर ब्लैक कर रहे हैं। बताया बड़े शहरों में रेमडेसिविर इंजेक्शन पच्चीस से चालीस हजार रुपए तक में बेचे जा रहे हैं।

25 अप्रैल को पुलिस यमुना विहार से मनीष गोयल और पुष्कर चंद्रकांत को पकड़ लिया। इनसे 12 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले। दोनों से हुई पूछताछ के आधार पर अगले दिन साधना शर्मा नाम की एक महिला को दबोचा गया। इनसे 160 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की शीशी (कोविप्री) बरामद की गई। 27 अप्रैल को हरिद्वार से वतन कुमार सैनी को दबोचा गया। उसके पास से एक पैकिंग मशीन, तीन हजार खाली शीशी, अजीथ्रोमाइसिन का पैकिंग मैटेरियल आदि सामान उसके घर से बरामद किया।

इससे पूछताछ के बाद रुड़की से आदित्य गौतम को पकड़ा गया। वह फाॅर्मेसी की फील्ड में काम करता है। उसने करीब दो हजार एंटी बॉयोटिक इंजेक्शन की शीशी खरीदी। जिनके कोटद्वार स्थित फैक्टरी में लेबल चेंज कर कोविप्री बना उसे रेमडेसिविर का नाम दे दिया। पुलिस ने इसकी निशानदेही पर लेबल तैयार करने वाला कम्पयूटर और 16 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की शीशियां भी बरामद की। बकायदा इन लोगों ने अपना एक नेटवर्क तैयार कर रखा था। जिसके माध्यम से ये लोग जरुरत मंद लोगों को ब्लैक में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के धंधे में लगे हुए थे।

आरोपियों का प्रोफाइल

  • आरोपियों में 7वीं तक पढ़ चुका मोहम्मद शोएब दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी नौकरी करता था। पिछले साल लॉकडाउन हुआ तो वह मॉस्क और ग्लवस सप्लाई के धंधे में आ गया।
  • आरोपी मोहन कुमार 9वीं तक पढा है। वह मूलरुप से बिहार का रहने वाला है। वह साल 1996 में दिल्ली आया और गारमेंट एक्सपोर्ट कंपनी में काम करने लगा। पिछले साल वह भी मास्क और ग्लवस सप्लाई के धंधे में आ गया। चार महीने पहले वह शोएब खान के संपर्क में आया और फिर दोनों जीवन रक्षक दवा की कालाबाजारी करने लगे।
  • मनीष गोयल बीकॉम से ग्रैजुएट है। पहले वह नरेन्द्र मोहन हॉस्पिटल मोहन नगर में मार्केटिंग का काम करता था। पिछले साल फरवरी से उसने मेडिकल उपकरण किराए पर देने का काम शुरु कर दिया। काेरोना के समय उसने विज्ञापन के जरिए मेडिकल सुविधाएं जैसे घर पर नर्स, ऑक्सीजन कांसन्ट्रेटर आदि देना प्रारंभ कर दिया था। इस दरम्यान वह मोहन झा से मिला और उसके साथ काम करने लगा।
  • आरोपी पुष्कर चंद्रकांत ने साल 2019 में MBA प्रथम वर्ष की थी। लेकिन आगे उसने पढाई जारी नहीं की। इसके बाद उसने विभिन्न आश्रम में आयुर्वेदिक उत्पादों को सप्लाई करने का काम शुरु कर दिया। पिछले साल अप्रैल से वह मास्क और गलव्स सप्लाई करने लगा। इस साल रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग एकदम से बढी तो वह अरुण शर्मा, विनय पाठक और वतन सैनी के संग मिलकर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने लगा।
  • आरोपी साधना शर्मा 12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइनर का कोर्स कर चुकी है। ट्रेड फेयर में इवेंट मैनेजर का काम करती थी। हाल ही में वह कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई थी, जिसका इलाज गोयल हॉस्पिटल दिल्ली में हुआ। उसे अपने इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत थी, लेकिन इस दवाई के ज्यादा दाम होने की वजह से वह इसकी व्यवस्था नहीं कर सकी। इस बीच वह वतन सैनी के संपर्क में आकर उसके नेटवर्क का हिस्सा बन गयी।
  • वतन कुमार सैनी ने फॉर्मा में स्नातक करने के बाद एमबीए किया है। साल 2014 से 2016 तक उसने रुडकी की एक फार्मा कंपनी में फ्रैंचाइजी मैनेजर के तौर पर काम किया था। इस बीच उसने मेडिसीन ट्रेडिंग की एक कंपनी शरु की जो अब तक चल रही है। वह साल 2019 से आदित्य को जानता था।

इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड आदित्य गौतम है। वह बीकॉम कर चुका है। साल 2006 में वह एक कंपनी में बतौर अकाउंट एग्जीक्यूटिव काम करता था। बाद में उसने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उसने हेलेक्स हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड भगवानपुर जिला हरिद्वार में इस कंपनी को लीज पर लिया जोे मेडिसीन बनाने वाली कंपनी है। अप्रैल 2019 तक उसने यह कंपनी चलायी। इसके बाद उसने नेक्टर हबर्स एंड ड्रग कंपनी को लीज पर ले लिया जो अभी चल रही है। नेक्टर हबर्स एंड ड्रग कंपनी कोटद्वार उतराखंड में पुलिस ने इस कंपनी को सील कर दिया है।

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