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जन संकल्प से हारेगा कोरोना: परिवार हाे गया था संक्रमित, ऑक्सीजन लेवल हाे रहा था कम, हालत बिगड़ने लगी ताे याेग किया शुरू, महीने में हाे गए रिकवर

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शिमला15 घंटे पहले

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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां
  • पढ़िए आज दूसरी कड़ी- पत्नी समेत दो बच्चे भी हो चुके थे संक्रमित, दिनचर्या बदली… ऑनलाइन सीखा योग…कोरोना हारा…

आमताैर पर जाे लाेग संक्रमित हाे रहे हैं उन पर काेराेना हावी हाे जाता है। लाेग कई दिनाें तक बिस्तर से नहीं उठ पाते। ठीक हाेने के बाद भी उन्हें रिकवर हाेने में कई महीने लग जाते हैं। इसका एक कारण यह भी है कि हम अपने रुटीन में बदलाव करना नहीं चाहते। दिनचर्या में याेगा और सही खानपान काे शामिल कर लें ताे काेराेना जैसी काेई महामारी हम पर हावी नहीं हाे पाती।

अपनी दिनचर्या में रुटीन बदलाव करके सचिवालय के कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने ना केवल अपने आप काे एक माह में रिकवर किया, बल्कि पूरे परिवार काे भी स्वस्थ कर दिया। कोरोना को हराने की पूरी कहानी बता रहे हैं संजीव शर्मा…।

अक्टूबर में मेरे गांव निरमंड में शादी समाराेह था। मैं परिवार के साथ गया था। शादी खत्म हाेने के बाद 28 और 29 अक्टूबर काे मेरी पत्नी महेश्वरा काे बुखार अाया। दाे दिन एंटीबाॅयाेटिक दवा ली और वह ठीक हाे गई। उसके बाद मैं अकेला शिमला आ गया। 31 अक्टबूर और 1 नवंबर काे मुझे भी बुखार आया, मैं डर गया। तीन नवंबर काे ऑफिस चला गया। वहां पहुंचते ही पत्नी का फाेन आया कि गांव के काफी लाेग बीमार हाे गए हैं। ऐसे में मैंने पत्नी काे टेस्ट करवाने काे कहा। शाम तक पता चला की पत्नी काेराेना पॅाजिटिव है। 4 नवंबर काे घर चला गया और अपना टेस्ट करवाया ताे मैं भी पाॅजिटिव आया।

उसके बाद मेरे 15 साल के बेटे साेहम और 13 साल की बेटी सना काे भी बुखार आ गया। डाॅक्टर काे फाेन किया ताे डाॅक्टर ने कहा कि आप सभी लाेग संक्रमित हाे चुके हैं। फिलहाल हाेम आइसाेलेशन में रहिए अगर तबीयत ज्यादा खराब हाेती है ताे मुझे फाेन करना।

सात नवंबर काे मुझे घबराहट हाेने लगी। कमजाेरी महसूस हुई और बार-बार सांस लेने में दिक्कत आने लगी। डाॅक्टर काे फाेन किया ताे डाॅक्टर ने कहा कि आप अपनी पल्स चेक कीजिए। मेरी पल्स 94 तक गिर गई थी। डाॅक्टर ने कहा कि डरें नहीं। एक दिन देख लेते हैं फिर आपकाे अस्पताल शिफ्ट कर देंगे। पत्नी और बच्चाें काे भी कमजाेरी महसूस हाेने लगी। सभी की हालत खराब हाेने लगी। मैं काफी डर गया था। एक रिश्तेदार, जाे पुणे में रहते हैं उनका फाेन आया। उन्हाेंने ऑनलाइन मुझे काफी माेटिवेट किया और कहा कि मैं याेगा शुरू करूं। मैंने अगले दिन सुबह ही बच्चाें काे उठाया और याेगा करने के लिए कहा।

रिश्तेदार ने ऑनलाइन कुछ याेग क्रियाएं बताई। हम चाराें लाेगाें ने कुछ ही देर याेगा किया और हम थक गए। फिर हम राेज सुबह थाेड़ी-थाेड़ी देर याेग करने लगे। याेगा करने से ऐसा असर हुआ कि शरीर में थकान और कमजाेरी खत्म हाेने लगी और हम अपने आप काे ठीक महसूस करने लगे। 17 दिन हाेम आइसाेलेशन के बाद हमारी सभी की रिपाेर्ट निगेटिव आ गई। जब मैं शिमला आया ताे मुझे यहां कुछ दिन पैदल चलने में दिक्कत अाई। मगर एक माह बाद में दाेबारा से अपने आप काे पहले की तरह स्वस्थ महसूस करने लगा।

अब मैं और मेरा परिवार राेजाना एक घंटा सुबह ऑनलाइन याेगा करते हैं। यह हमारी दिनचर्या का एक हिस्सा हाे गया है, जाे हमेशा रहेगा। काेराेना के दाैरान हमने अपने खानपान में भी बदलाव कर दिया। तला खाना छाेड़ दिया। हम नाॅन वेज नहीं खाते, ताे पनीर, अंडा और दूध समेत कई चीजें भी रूटीन में लाई। जाे अभी भी जारी हैं।

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