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जब पवैया के घर पहुंचे सिंधिया: 23 साल की राजनीतिक दुश्मनी के बाद दोस्तों की तरह मिले, सिंधिया बोले नया रिश्ता कायम करने का प्रयास, पवैया ने कहा राजनीतिक मायने न निकालें

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  • After 23 Years Of Political Enmity, Met Like Friends, Scindia Said Trying To Establish A New Relationship, Pawaiya Said, Do Not Make Political Sense

ग्वालियर3 मिनट पहले

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पूर्व मंत्री जयभान सिंह के घर पहुंचे सिंधिया, गए तो शोक संवेदना प्रकट करने थे, लेकिन राजनीतिक मायके भी कई अधिक

  • -पूर्व मंत्री व सिंधिया विरोधी जयभान सिंह के पिता का 20 अप्रैल को हुआ था निधन

कहते हैं राजनीति में वो सब हो सकता है जो कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा। एक समय था जब हिंदूवादी छवि के भाजपा नेता व पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक दूसरे का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते थे। सिंधिया परिवार को महलों में रहने वाला कहकर चांदी की चम्मच से खाने वाला बताकर पवैया चुनाव मैदान में उतरे थे। काफी हद तक सिंधिया को हार के करीब भी ले आए थे। पर अब 23 साल की दुश्मनी के बाद दोस्ती की नई शुरूआत होती दिख रही है।

शुक्रवार शाम सिंधिया जयभान सिंह के घर पहुंचे। 25 मिनट यहां ठहरे फिर बाहर निकलकर बोले नया संबंध, नया रिश्ता कायम करने का प्रयास किया है, जबकि पवैया ने कहा है कि पिता के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने आए थे। राजनीतिक मायके नहीं निकालें, एक कार्यकर्ता के दुख बांटने से ज्यादा कुछ नहीं है।

पहली बार घर आने पर सिंधिया को पवैया ने भेंट की भगवत गीता, उन्होंने भी माथे से लगाया

पहली बार घर आने पर सिंधिया को पवैया ने भेंट की भगवत गीता, उन्होंने भी माथे से लगाया

25 मिनट तक दोनों ने की बात

  • जयभान सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की शुक्रवार शाम मुलाकात 25 मिनट की रही। इन 25 मिनट में 23 साल पुरानी चुनावी रंजिश को दूर करने का प्रयास किया गया। सिंधिया ने जयभान सिंह के रूम में प्रवेश करने के साथ ही पूछा कैसे हो आप। पवैया ने भी जवाब में कहा ठीक हूं आप बताइए। इसके बाद दोनों ने 25 मिनट तक चर्चा की। पता लगा है कि पहले 10 मिनट पूर्व मंत्री के पिता के निधन से संबंधित चर्चा होती रही, लेकिन उसके बाद वर्तमान में प्रदेश की राजनीति पर भी दोनों ने खुलकर बात की।

कट्‌टर सियासी विरोधी पवैया के घर पहुंचे सिंधिया

ग्वालियर चंबल के इतिहास में दो कट्टर सियासी विरोधियों के बीच शुक्रवार को अहम मुलाकात हुई। एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के घर सिंधिया शाम करीब 7 बजे मुलाकात करने पहुंचे थे। दरअसल, सिंधिया जय भान सिंह पवैया के पिता के निधन पर शौक संवेदनाएं देने गए थे। पवैया के पिता बलवंत सिंह पवैया का 20 अप्रैल को निधन हुआ था। लेकिन इस क्षेत्र की राजनीति के नजरिए से यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। इसको लेकर सिंधिया के कट्टर समर्थक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि सिंधिया और पवैया के बीच राजनीतिक मतभिन्नता रही, लेकिन व्यक्तिगत मतभिन्नता नहीं थी। अब दोनों एक ही पार्टी में हैं। ऐसे में राजनीतिक मतभिन्नता भी खत्म हो गई है।

23 साल से चल रहा है टकराव

जयभान सिंह पवैया और सिंधिया परिवार के बीच सियासी टकराव पिछले 23 साल से चलता आ रहा है। वर्ष 1998 में जय भान सिंह पवैया ने कांग्रेस नेता स्व. माधवराव सिंधिया के खिलाफ ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में सिंधिया और पवैया के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। माधवराव सिंधिया 28 हज़ार वोट से इस चुनाव को जीते थे। माधवराव सिंधिया ने इस बेहद मामूली जीत के बाद नाराज़ होकर आगे ग्वालियर से चुनाव नहीं लड़ा। उसके बाद माधवराव ने संसद में जाने के लिए गुना को चुना था। पवैया ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में गुना लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बीजेपी से चुनाव लड़ा था। यहां भी कांटे का मुकाबला हुआ। 4 लाख से जीतने वाले सिंधिया की जीत 1 लाख 20 हज़ार पर सिमट गई थी।

मुलाकात के बाद कौन क्या बोले

सिंधिया ने कहा

  • अतीत अतीत होता है। अब नया समय है, इसलिए नया रिश्ता, नया संबंध कायम करने का प्रयास किया है। एक नई शुरूआत है। आगे हम दोनों मिलकर काम करेंगे ऐसी मैं आशा करता हूं

पवैया ने कहा

  • यह भारतीय परम्परा है एक दूसरे का दुख बांटने जाते हैं। मेरे पिता का निधन हुआ है, परिवार कोरोना संक्रमण की चपेट में है। ऐसे में सिंधिया का मेरे घर आना एक कार्यकर्ता का दूसरे कार्यकर्ता का दुख बांटना से ज्यादा कुछ नहीं है। इसके राजनीतिक मायके नहीं लगाना चाहिए।

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मध्य प्रदेश | दैनिक भास्कर

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