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तमिलनाडु: अंतिम चरण के लिए प्रचार अभियान समाप्त, अन्नाद्रमुक की तीसरी बार सत्ता में होगी वापसी या लौटेगी द्रमुक

तमिलनाड में छह अप्रैल को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए रविवार शाम सात बजे चुनाव प्रचार थम गया। यह चुनाव तय करेगा कि क्या सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक की लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता में वापसी होगी या फिर एक दशक बाद द्रमुक सत्ता में लौटेगी। चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान 428 करोड़ रुपये के मूल्य सामान एवं नकद जब्त किए गए।

इस चुनाव में मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी, उपमुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम, द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन, एएमएमके संस्थापक टीटीवी दिनाकरण, अभिनेता एवं मक्कल नीधि मय्यम (एमएनएम) के संस्थापक कमल हासन, नाम तमीझार काच्ची के नेता सीमान और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एल मुरूगन समेत 3,998 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

प्रचार के आखिरी दिन पलानीस्वामी और स्टालिन ने पूरी ताकत झोंक दी। पलानीस्वामी अपनी पार्टी को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने जबकि स्टालिन द्रमुक की एक दशक बाद राज्य की सत्ता में वापसी के प्रयास में लगे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई केंद्रीय नेताओं ने क्रमश: सत्तारूढ़ एवं विपक्षी गठबंधनों के पक्ष में प्रचार किया।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि अब सोशल मीडिया एवं एसएमएस समेत किसी भी माध्यम से प्रचार गतिविधि नहीं होगी। राज्य में 6.28 लाख से अधिक मतदाता है। विधानसभा की 234 सीटों के लिए 3,998 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं।

अपनी आखिरी अपील में पलानीस्वामी ने ‘अम्मा शसन’ की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए वोट मांगा। उनकी पार्टी भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा है। द्रमुक नेता स्टालिन ने मतदाताओं से पार्टी नीत सेकुलर प्रोग्रेसिव एलायंस के लिए एक मौका मांगा। द्रमुक 2011 से विपक्ष में है।

एक दूसरे पर खूब किए हमले
तमिलनाडु की राजनीति में दोनों द्रमुक पार्टियों का खासा वर्चस्व रहा है। इस विधानसभा चुनाव में दोंनों पार्टियों ने एक दूसरे पर खूब आरोप लगाए। अन्नाद्रमुक ने द्रमुक पार्टी पर वंशवाद की राजनीति के तहत हमला बोला तो द्रमुक पार्टी ने भी अन्नाद्रमुक पर तीखे हमले किए।

स्टालिन ने कहा कि अन्नाद्रमुक भाजपा की गुलाम है। साथ ही कहा कि अन्नाद्रमुक सरकार ने तमिलनाडु को 50 साल पीछे ढ़केल दिया है। साथ ही उन्होंने अन्नाद्रमुक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। 

तमिलनाडु की राजनीति में 1967 से द्रमुक और अन्नाद्रमुक को बारी-बारी से सत्ता में देखा है। हालांकि पिछले दो विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक विजयी हुई। इस चुनाव की खास बात यह कि तमिलनाडु की राजनीति के दो दिग्गजों, एम करुणानिधि और जयललिता के बिना यह पहला विधानसभा चुनाव है।

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