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दि न्यूयार्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत: जिनके खाने में फैट ज्यादा उनके लिए शाम को एक्सरसाइज करना बेहतर; मेटाबॉलिज्म तेज होता है, शुगर नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है

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25 मिनट पहलेलेखक: ग्रेचेन रेनॉल्ड्स

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शोधकर्ताओं का दावा-डायबिटीज टाइप 2 वालों के लिए शाम को वर्कआउट फायदेमंद।

अक्सर कहा जाता है कि सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज करना सेहत के लिए फायदेमंद होता है, पर शाम के वक्त वर्कआउट करने के भी बहुत सारे फायदे हैं। शाम को एक्सरसाइज करने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, साथ ही रातोंरात शुगर लेवल को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। जिन लोगों को डायबिटीज टाइप-2 का खतरा है, उनके लिए तो यह बहुत ज्यादा फायदेमंद है।

ऑस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी की ताजा स्टडी में यह दावा किया गया है। डॉयबिटीओलॉजिआ में प्रकाशित स्टडी में ऐसे पुरुषों को शामिल किया गया था, जिन्हें टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम था, वजन ज्यादा और वे सक्रिय भी नहीं थे। इन्हें 11 दिनों तक 65% वसा की मात्रा वाला खाना दिया गया। एक समूह को सुबह 6.30 बजे, दूसरे को शाम को 6.30 बजे और तीसरे को एक्सरसाइज नहीं करने के लिए कहा गया।

सुबह-शाम वर्कआउट करने वालों की कार्डियोरेस्परेटरी फिटनेस में काफी सुधार दिखा, वहीं शाम को वर्कआउट करने वालों का शुगर लेवल रातभर में कम हो गया। जिन लोगों ने एक्सरसाइज नहीं की, उनका कॉलेस्ट्राल (एलडीएल) काफी बढ़ा हुआ था। सुबह वर्कआउट करने वालों में भी इसका स्तर बढ़ा दिखा। पर शाम को पसीना बहाने वालों में खराब डाइट का कम असर दिखा, कॉलेस्ट्रॉल स्तर भी कम रहा। एक्सरसाइज साइंटिस्ट डॉ. ट्राइन मोहाल्ट के मुताबिक नतीजों से स्पष्ट है कि शाम के वर्कआउट ने खराब डाइट से होने वाले बदलावों को उलट दिया या कम कर दिया।

मोहाल्ट कहती हैं ‘स्टडी यह नहीं बताती कि सुबह के वक्त वर्कआउट अच्छा नहीं है, बल्कि शाम के वर्कआउट से मेटॉबॉलिज्म व ब्लड शुगर लेवल सुधारने में अद्भुत फायदे हो सकते हैं। खासकर जब डाइट ज्यादा फैट वाली हो। टाइप-2 डायबिटीज की स्थिति में पैंक्रियाज पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाते हैं। या इंसुलिन को लेकर शरीर प्रतिरोधी हो जाता है। ज्यादातर लोग टाइप-2 डायबिटीज से ही ग्रस्त होते हैं।

शाम के वक्त वर्कआउट करने वाले लोगों में कॉलेस्ट्रॉल स्तर भी कम था

शोधकर्ता डॉ. मोहाल्ट के मुताबिक सुबह या शाम वर्कआउट से फिटनेस में सुधार हुआ। पर रात का ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार शाम को एक्सरसाइज करने वाले समूह में ही दिखा। यह बात खास है क्योंकि टाइप-2 डायबिटीजग्रस्त लोगों में रात को सोते समय ही ग्लूकोज की मात्रा तेजी से बढ़ती है। शाम को वर्कआउट करने वालों मेें रात को ग्लूकोज के साथ कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम था। इस स्टडी में वर्कआउट भी समान नहीं रखे गए।

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