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परमबीर सिंह को झटका: सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही जांच को ट्रांसफर करने वाली याचिका खारिज किया, अदालत ने कहा- मुंबई पुलिस पर कुछ तो भरोसा दिखाइए

मुंबई18 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में परमबीर ने अपने खिलाफ जारी सभी जांच को महाराष्ट्र के बाहर किसी निष्पक्ष एजेंसी को हस्तांतरित करने की मांग की थी।

देश की सर्वोच्च अदालत ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की उस याचिका पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही सभी जांचों को महाराष्ट्र के बाहर एक स्वतंत्र एजेंसी को ट्रांसफर करने की मांग की थी। शुक्रवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस पुलिस डिपार्टमेंट में आप इतने समय से हैं, उस पर कुछ तो भरोसा दिखाइए। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा,’जिनके घर शीशे के होते हैं, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।’ परमबीर सिंह के खिलाफ महाराष्ट्र में तीन मामले दर्ज हैं, जिसमें से एक SC/ST का भी केस है।

अदालत ने फटकारते हुए परमबीर से कहा
परमबीर सिंह की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आप 30 साल से पुलिस डिपार्टमेंट में हैं। आप यह कैसे कह सकते हैं कि आप राज्य के बाहर अपनी जांच चाहते हैं। आपको अपनी ही फोर्स पर संदेह नहीं कर सकते। आप महाराष्ट्र कैडर का हिस्सा हैं और अब आपको अपने राज्य के कामकाज पर भरोसा नहीं है? यह चौंकाने वाला आरोप है। हम आपकी अर्जी पर कोई आदेश नहीं दे रहे हैं।’

अपनी याचिका में परमबीर सिंह ने कहा था कि पूर्व गृहमंत्री पर 100 करोड़ की वसूली का आरोप लगाने के बाद राज्य सरकार और उनके पदाधिकारियों ने अनेक मामले उन पर लाद दिए हैं। इन मामलों की जांच महाराष्ट्र के बाहर हस्तांतरित कर किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए। इस पर न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की हॉलिडे बेंच सुनवाई कर रही थी।

वकील का दावा-परमबीर को मिल रही हैं धमकियां
परमवीर के वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि परमवीर को याचिका वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर वह इसे वापस नहीं लेते हैं तो उन्हें आपराधिक मामलों में फंसा दिया जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार ने 15 जून तक गिरफ्तारी पर लगाई थी रोक
एक अन्य मामले में महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह परमबीर सिंह के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में 15 जून तक उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी। न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एनजे जमादार ने पुलिस निरीक्षक भीमराव घाडगे की शिकायत पर परमबीर सिंह के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज करने का अनुरोध करने वाली परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई 14 जून तक के लिए स्थगित कर दी है।

सिंह के खिलाफ अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी पुलिस निरीक्षक घाडगे द्वारा दायर एक शिकायत पर आधारित है। घाडगे वर्तमान में महाराष्ट्र के अकोला में तैनात है। घाडगे ने सिंह और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए हैं।

घाडगे ने FIR में आरोप लगाया है कि जब परमबीर सिंह ठाणे में तैनात थे, उस समय उन्होंने एक मामले से कुछ लोगों के नाम हटाने को लेकर उन पर दबाव डाला और जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो आईपीएस अधिकारी ने उन्हें झूठे मामलों में फंसा दिया। प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) कानून के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई है।

परमबीर का अनिल देशमुख पर यह था आरोप
परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री पर अनिल देशमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कुछ पुलिस अफसरों को मुंबई से हर महीने 100 करोड़ की वसूली करने का लक्ष्य दिया था। महाराष्ट्र सरकार ने कुछ समय पहले परमबीर सिंह को मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाकर होमगार्ड डिपार्टमेंट में डीजी बनाया है।

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महाराष्ट्र | दैनिक भास्कर

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