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बच्चों को सेफ रखेगा AIIMS के डॉक्टर का ये फॉर्मूला: इम्युनिटी बढ़ाने के लिए दें आंवला, हल्दी वाला दूध और शहद; कोरोना होने पर M-मल्टी विटामिन, A-एंटी एलर्जिक, A-एंटीबायोटिक, P-पारासिटामोल की खुराक

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  • Bihar News; Dr. Anil Of AIIMS Patna Prepared 4 Formula For Prevention Of Your Child From Corona

पटना13 मिनट पहले

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

  • VHIT (वैक्सीन हिट कॉन्सेप्ट) और MAAP पर बच्चों को बचाने के 4 मूल मंत्र
  • डॉ. अनिल ने कोरोना से बचाव बच्चों की इम्युनिटी स्ट्रांग बनाने के लिए भी दिए हैं टिप्स

कोरोना के थर्ड वेब में वायरस का साया मासूमों पर है। पैरेंट्स चिंतिंत हैं कि कैसे बच्चों को कोरोना की मार से बचाया जाए। इस वक्त अपने बच्चों को कैसा पोषण दें कि थर्ड वेब की चपेट में उनके मासूम ना आएं। पटना AIIMS के ट्रॉमा इमरजेंसी व टेली मेडिसिन के हेड डॉक्टर अनिल ने कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के बचाव का फार्मूला तैयार किया है। वैक्सीन हिट कॉन्सेप्ट (VHIT) और MAAP के फॉर्मूले पर वह बच्चों को सुरक्षित करने के उपाय बता रहे हैं। दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने अपना फॉर्मूला सांझा किया है। आप भी जानें कैसे करें कोरोना से बचाव की तैयारी। बच्चों को MMR मेजल्स ऑफ रुबेला देने के साथ उनकी इम्युनिटी स्ट्रॉंग करने के लिए आंवला, हल्दी वाला दूध और शहद को बच्चों की डाइट में शामिल करें। अगर दुर्भाग्य से कोरोना हो जाता है तो M-मल्टी विटामिन, A-एंटी एलर्जिक, A-एंटीबायोटिक, P-पारासिटामोल की खुराक दें।

AIIMS के डॉक्टर का 4 मूल मंत्र

डॉक्टर अनिल ने कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के बचाव को लेकर जो 4 मूल मंत्र और फार्मूला दैनिक भास्कर के साथ साझा किया है उसे VHIT का नाम दिया है। इसमें ट्रिपल कॉन्सेप्ट ऑफ वैक्सीनेशन, हॉस्पिटल सेटअप, इम्यूनिटी और ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल को शामिल किया है। ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में MAAP को शामिल करने को कहा है। MAAP शार्ट फार्म है जिसका फुल फॉर्म 4 भागों में बांटा है। डॉक्टर ने M से मल्टी विटामिन, A से एंटी एलर्जिक, A से एंटीबायोटिक और P से पैरासिटामाल बताया है। इसे ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया है।

जान लीजिए VHIT का फार्मूला

डॉ अनिल का कहना है कि थर्ड वेब से बच्चों में संक्रमण होने की जो संभावना है उससे बचने के लिए हमे तैयारी वैक्सीन हिट के कॉन्सेप्ट पर करनी होगी। वैक्सीन की ट्रिपल कांसेप्ट में 18 से 45 साल के मां बाप या जितने भी पैरेंट्स हैं उन्हें बढ़चढ़ कर टीकाकरण में हिस्सा लेना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों वैक्सीन के ट्रायल को जल्दी से जल्दी पूरा किया जाना चाहिए जिससे अधिक से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया जा सके। बच्चों को MMR मेजल्स ऑफ रुबेला की वैक्सीन दी जाए। डॉक्टर अनिल का कहना है कि बच्चों के डॉक्टरों का मानना है कि अगर 15 से 18 माह के टाइम में MMR की वैक्सीन बच्चों को दे दी जाए तो ऐसे बच्चे कोरोना से प्रोटेक्टिव हो जाएंगे। हालांकि डॉक्टर अनिल का यह भी कहना है कि MMR वैक्सीन से प्रोटेक्टिविटी की कोई प्रमाण नहीं देखा गया है।

हॉस्पिटल का सेटअप बच्चों के हिसाब से तैयार करना

डॉक्टर अनिल का कहना है कि कोरोना के सामान्य मरीजों से बच्चों का इलाज थोड़ा अलग होगा। इसके कई कारण हैं जिसे हर किसी को समझना जरूरी है। सामान्य मरीजों को हॉस्पिटल में अगर 6 बेड हैं तो 6 पर उन्हें लिटा देते हैं, क्योंकि इसमें मरीज के पेशेंट को नहीं रहने दिया जाता और उनकी कोई जरूरत भी नहीं होती है। कोरोना संक्रामक बीमारी है इस कारण से मरीजों के साथ अटेंडेंट के रहने का प्रावधान ही नहीं है। लेकिन बच्चों के लिए बेड की संख्या कम करनी होगी क्योंकि उसके साथ एक अटेंडेंट को रहना आवश्यक होगा। ऐसे में दो बेड के बीच में दूरी रखनी होगी। कारण है कि बच्चे खुद से अपना मास्क नहीं लगा सकते हैं और उन्हें अन्य स्पोर्ट की भी जरूरत होगी। ऐसे में दो बेड के बीच में जगह छोड़नी पड़ेगी जिससे बच्चों के पैरेंटस रहकर उनकी देखभाल कर सकें। ऐसा करने पर हर हॉसपिटल में बेडों की संख्या कम हो जाएगी इसे देखते हुए कम्युनिटी लेबल पर ज्यादा से ज्यादा बेड बढ़ाने की तैयारी होनी चाहिए। कम्युनिटी लेबल पर अधिक से अधिक तैयारी होनी चाहिए। कम्युनिटी लेबल पर लोकल हॉस्पिटल बनाना होगा ताकि संक्रमित बच्चे का बेहतर ढग से केयर किया जा सके।

इम्यूनिटी के लिए बच्चों के आहार पर हो ध्यान

डॉ अनिल क कहना है कि इम्यूनिटी के लिए बच्चों के आहार पर विशेष ध्यान देना होगा। यह अभी से ध्यान रखना होगा कि हम अपने बच्चे को भोजन का वह सारा सामान दें जिससे उसके अंदर इम्युनिटी डेवलप हो सके। इसमें आंवला, हल्दी वाला दूध और शहर विशेष रूप से शामिल है। ऐसी चीज खिलाने से इम्युनिटी बढ़ती है जिससे बच्चा कोरोना के संक्रमण से काफी हद तक बच जाता है।

अगर हो गया कोरोना तो क्या करें

डॉ अनिल का कहना है कि अगर दुर्भाय से बच्चों कोरोना हो भी जाता है तो घबड़ाना नहीं है, क्योंकि बच्चों का रिकवरी रेट बहुत अच्छा होता है। बच्चों का इलाज पूरी तरह से माप तौल कर किया जाता है। उन्हें अधिक दवाएं भी नहीं दी जाती हैं। अधिक दवाओं की जरूरत पड़ती ही नहीं है।

याद रखें MAAP का फार्मूला

डॉ अनिल का कहना है अगर दुर्भाय से बच्चों कोरोना हो भी जाता है तो हमे उनके ट्रीटमेंट के लिए MAAP फार्मूला याद रखना है। MAAP के कॉन्सेप्ट पर काम करना है। MAAP में M से मल्टी विटामिन, A से एंटी एलर्जिक, A से एंटीबायोटिक और P से पैरासिटामाल। यह काफी बेसिक ट्रीटमेंट है। अगर कोरोना से पहले भी किसी बच्चे को खांसी बुखार होता है तो हम यही सारी दवाएं देते हैं। बस हमें ख्याल यह रखना है कि यह दवाएं हर जगह असानी से उपलब्ध हो जाएं। डॉ अनिल ने कहा बस इस पर ही ध्यान देना है जिसमें पहला ट्रिपल कंसेप्ट ऑफ वैक्सीनेशन दूसरा हॉस्पिटल सेटअप को रिफार्म करना, तीसरा बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ाने का हर संभव प्रयास और चौथा ट्रीटमेंट प्रोटोकाल जो MAAP के कांसेप्ट पर हो।

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बिहार | दैनिक भास्कर

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