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बदला ठिकाना: भड़किया जंगल में मेहमान, 11 घंटे की कैद से छूटा तो छलांगें मारते भागा पैंथर

भीलवाड़ा4 मिनट पहले

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  • रायपुर के बागड़ गांव में मवेशियों के लगातार शिकार होने की सूचना पर वन विभाग ने पैंथर को रेस्क्यू किया

मांडलगढ़ वन रेंज के भड़किया माता जंगल में गुरुवार को पैंथर छाेड़ा गया। इसे रायपुर उपखंड के बागड़ गांव से वन विभाग ने पकड़ा। बागड़ व आसपास के गांवाें में पैंथर ने कई मवेशियाें का शिकार कर लिया था। रात में जब दहाड़ता ताे खाैफ फैल जाता था। वन विभाग ने तीन दिन से बागड़ के जंगी में पिंजरा लगाया हुआ था।

पिंजरे में राेज बकरे का मांस रखा जाता था। वन विभाग की टीमें दूर से निगाह रखे रहती। आखिरकार गुरुवार तड़के 5 बजे यह पिंजरे में कैद हाे गया। इसे पिंजरे में शाम काे भड़किया माता जंगल लाया गया। मांडलगढ़ के रेंजर दशरथसिंह के निर्देशन में इसे जंगल में ले गए। पिंजरे का गेट खाेलते ही करीब 11 घंटे से कैद वन्यजीव छलांगें लगाते हुए जंगल में ओझल हाे गया। भड़किया के जंगल में दहाई की संख्या में पैंथर बताए जाते हैं। इस दाैरान वन विभाग के विमल रेगर, नरेश, और लोकेंद्रसिंह मौजूद थे।

भड़किया माता के जंगल में पैंथर के लिए है अनुकूल परिस्थितियां
जिला वन अधिकारी डीपी जगावत का कहना है कि मांडलगढ़ वन रेंज में पैंथर के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। रायपुर-करेड़ा की तरफ जंगल छाेटे-छाेटे हैं। वहां के मुकाबले बिजाैलिया मांडलगढ़-बिजाैलिया क्षेत्र में काफी घने जंगल हैं। पानी की उपलब्धता रहती है। इसे नजदीक में राजसमंद भी छाेड़ सकते थे लेकिन हमारी धराेहर हमारे जिले में रहे इसलिए भड़किया लाए। राजसमंद के मुकाबले हमारे यहां के जंगलाें में वन्यजीवाें के लिए 100 गुना ज्यादा अनुकूलता है।

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अश्विनी टाक ने भड़किया में पैंथर काे पिंजरे से जंगल में आजाद करने की तस्वीरें कैमरे में कैद की।

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राजस्थान | दैनिक भास्कर

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