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भास्कर एक्सक्लूसिव: कोरोना संकट में सरकार ने एक झटके में ले ली 36 आयुष डॉक्टरों की नौकरी, गया के 18 सेंटर बंद करने का निर्देश; 126 अन्य स्टाफ भी बेरोजगार

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गया6 घंटे पहलेलेखक: दीपेश

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गया के कोंच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चल रहे सेंटर को बंद करते कर्मी। यह करने की आज आखिरी तारीख थी।

देशव्यापी कोरोना संकट के बीच जब डॉक्टरों की कमी महसूस की जा रही है, केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने एक झटके में 36 डॉक्टरों की नौकरी ले ली है। यह डॉक्टर गया के 18 आयुष केंद्रों पर तैनात थे। इनके साथ 162 अन्य सहयोगियों की भी नौकरी चली गई है। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ने इसका आदेश जारी कर दिया है। बिहार में यह कमी इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि राज्य सरकार ने अब आयुष, यूनानी समेत डेंटल और रिटायर्ड डॉक्टरों की भी मदद लेने की बात कही है।

बिहार-राजस्थान-गुजरात में शुरू हुई थी सेवा

आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के CCRCS द्वारा संचालित NPCDCS आयुष परियोजना एक अप्रैल 2016 से बिहार के गया, राजस्थान के भीलवाड़ा और गुजरात के सुरेंद्र नगर में शुरू किया गया था। गया में यह केंद्र 18 जगहों पर चल रहा था। लेकिन अब इसका नामोनिशान खत्म हो गया। एक सेंटर पर दो डाक्टर और फार्मासिस्ट, योगा टीचर आदि काम करते थे। ये केंद्र पर आनेवाले मरीजों का इलाज भी करते थे। मरीज भी लाभान्वित हो रहे थे। लेकिन क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ने 30 अप्रैल से सभी की सेवा समाप्त कर दी है।

साथ ही संस्थान ने यह भी आदेश दिया है कि केंद्र पर बची औषधियों की सूची फार्मासिस्ट से तैयार कर केंद्र के चिकित्सा प्रभारी को सुपुर्द कर दें। इस आदेश के साथ ही सभी 18 केंद्रों के डाक्टरों ने दवाइयों व अन्य सामानों की सूची तैयार केंद्र के चिकित्सा प्रभारी को शुक्रवार की शाम सौंप दिया है।

सेंटर बंद करने वाला आदेश।

सेंटर बंद करने वाला आदेश।

परेशान आयुष डॉक्टर कह रहे- जरूरत थी तो सेवा ली, अब बेरोजगार कर दिया

इन आयुष केंद्रों पर तैनात 70 फीसदी डॉक्टर बिहार के बाहर के हैं। कोंच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आयुष डॉक्टर राहुल कुमार ने बताया कि हमलोगों ने बढ़चढ़ कर अपनी सेवा दी। मरीजों को भी खासा लाभ हुआ। यही नहीं, पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण काल में जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने सभी डॉक्टरों व फार्मासिस्ट से जमकर सेवा ली। बावजूद इसके अब सरकार ने हमें बेरोजगार कर दिया। उन्होंने बतायाा कि इस आयुष परियोजना केंद्र में कार्यरत ज्यादातर कर्मी यूपी, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान के हैं। अब सभी के सभी बेरोजगार हो गये। हमलोगों ने सेंटर बंद कर उसकी चाभी केंद्र के चिकित्सा प्रभारी को सौंप दी है। हम सभी 162 सहयोगियों को मार्च और अप्रैल की सैलरी भी नहीं मिली है।

गया के मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात आयुष चिकित्सक कानपुर निवासी डॉक्टर राहुल सेंगर ने बताया कि महामारी के बीच नौकरी का संकट भी हम डॉक्टरों के ऊपर आ गया। सरकार रोजगार देती है पर अब सरकार रोजगार छीन रही है। उन्होंने बताया कि पूरे परिवार का भरण-पोषण हमारे ऊपर है। ऐसे में जीवन कैसे चलेगा यह सोच कर बहुत पीड़ा हो रही है।

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