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यह कैसी तीसरी लहर की तैयारी?: ब्लैक फंगस का इलाज करा रहे मरीजों को गर्मी से बचाव का इंतजाम खुद करना पड़ रहा

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सूरत21 मिनट पहले

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  • जब सिविल में इलाज कराने के लिए घर से पंखा-इलेक्ट्रिक बोर्ड लाना पड़ रहा

कोरोना के बाद से ही ब्लैक फंगस, मिकाेर माइकाेसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आए दिन किसी न किसी की जान जा रही है। कोई आंख गंवा रहा है ताे किसी के जबड़े दांत और नाक ही हड्डी निकल दी जा रही है। इलाज के बावजूद असहनीय दर्द झेल रहे मरीजों के लिए सरकार ध्यान ही नहीं दे रही है। सरकार भले ही तीसरी लहर की तैयारी कर रही हो लेकिन ब्लैक फंगस के मरीजों की हालत बदतर है।

इलाज से परेशान मरीजों का साऊथ गुजरात के सबसे बड़े सरकरी अस्पताल में गर्मी से बुरा हाल है। कोरोना काल में करोड़ों खर्च कर चुके इस अस्पताल में अब ब्लैक फंगस का इलाज ले रहे मरीजों के परिजन अपने घर से पंखा और इलेक्ट्रिक बोर्ड ला रहे हैं। 500 करोड़ से अधिक खर्च कर सिविल अस्पताल में किडनी और स्टेम सेल की दो इमारतें बनाई गई हैं। इसे कोरोना के लिए शुरू किया गया था।

अब किडनी अस्पताल को बंद कर दिया गया है। स्टेम सेल में कोरोना मरीजों का अभी इलाज चल रहा है। सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए तीन से चार ऑक्सीजन प्लांट बना दिया। परिजनों के रहने के लिए अस्पतालों के बाहर तीन सेट में सैकड़ों सीलिंग फैन लगा दिए। लेकिन ब्लैक फंगस का इलाज करा रहे मरीजों को जर्जर और बेहाल पुरानी इमारत में इलाज हो रहा है। मरीज वार्ड में गर्मी से बेहाल हैं। अस्पताल के कई पंखे बंद हैं।

5 वार्डों के मरीज खुद लाए 150 पंखें, अस्पताल के पंखों से हवा नहीं आती

सिविल अस्पताल के पुरानी इमारत में पांच वार्ड में ब्लैक फंगस के 126 मरीजों का इलाज चल रहा है। मरीजों का कहना है कि सीलिंग फैन बहुत स्लो चलते हैं। एक फैन के नीचे दो से तीन बेड हैं। कई पंखे चलते ही नहीं। इसलिए ठीक से हवा नहीं लगती। महीनों वार्ड में रहना पड़ता है। ऑपरेशन होता है। बार-बार दवा और इंजेक्शन दिया जाता है। ऐसे में गर्मी से बुरा हाल है। इसलिए घर से बोर्ड और पंखे का इंतजाम किया है।

सभी पांचों वार्डों में परिजनों द्वारा करीब 150 पंखे लाए गए हैं। जबकि अस्पताल के द्वारा एक वार्ड में कम से कम 30 से 40 पंखे लगे हैं। हर वार्ड में दो दर्जन पंखे स्लो चलते है। हर वार्ड में आधा दर्जन पंखे खराब हैं। लंबे और तकलीफ देने वाले इलाज और अस्पताल की घटिया इंतजाम के कारण अस्पताल से ब्लैक फंगस के मरीज घर जा रहे हैं।

लापरवाही: ब्लैक फंगस काे महामारी घोषित कर कर्तव्य पूरा मान लिया, अस्पताल का भी ध्यान नहीं

जैसे ही ब्लैक फंगस आया तो सरकार ने इसके लिए मात्र एक ही काम किया और वह कि ब्लैक फंगस को केवल महामारी घोषित कर दिया इसके अलावा न तो सरकार इस पर ध्यान दे रही है और न ही अस्पताल। मरीजों का जैसे-तैसे इलाज हो रहा है। तीसरी लहर के लिए मनपा और डॉक्टरों की सर्जनों की कई बैठकें हो चुकी हैं।

तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की बात को लेकर अभी से 100 एनआईसीयू बेड, 150 पीआईसीयू बेड पर 200 ऑक्सीजन बेड तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। 2500 नर्सों को ट्रेनिंग दी जा रही है। निजी अस्पताल को तीसरी लहर के लिए तैयार कराया जा रहा है। 300 से अधिक पीडियाट्रिक डॉक्टरों की टीम बनी हुई है।

हम तो सर्वे करते हैं

ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले को देखते हुए मनपा की अलग ही कहानी है। स्वास्थ्य अधिकारी कहते हैं कि हम हर दिन घर-घर जाकर सर्वे करते हैं। ब्लैक फंगस के लक्षण के बारे में बताते हैं और कहते हैं कि ऐसे लक्षण मिलें तो सिविल या स्मीमेर अस्पताल में इलाज के लिए जाना है।

ब्लैक फंगस: सिविल में 123 रोगी भर्ती

सिविल में शुक्रवार को ब्लैक फंगस के तीन नए मरीज आए। अभी 123 मरीज भर्ती हैं। दो मरीजों का ऑपरेशन हुआ। अब तक अस्पताल में 286 सर्जरी हो चुकी है। शुक्रवार को पांच मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। हांलाकि इन्हें तीन महीने तक फालोअप के लिए आना होगा।

ये पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। वहीं मनपा संचालित स्मीमेर अस्पताल में एक नया मरीज भर्ती हुआ। वहां अभी 47 मरीजों का इलाज चल रहा है। बीते दिनों अस्पतालों में 40 से ज्यादा मरीजों की जान जा चुकी है। डेढ़ दर्जन मरीजों की आखें जा चुकी हैं।

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गुजरात | दैनिक भास्कर

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