Breaking News

यादों में चिंटू जी: एक बार दोस्त कह दिया तो दिल से रिश्ता निभाते थे ऋषि कपूर, जयपुर के जैन मंदिर में भी थी गहरी आस्था

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

मुंबई10 मिनट पहलेलेखक: राजेश गाबा

  • कॉपी लिंक

डिस्ट्रिब्यूटर राज बंसल के साथ ऋषि कपूर।

  • ऋषि कपूर के नजदीकी दोस्तों से दैनिक भास्कर की खास बातचीत

ऋषि कपूर के बारे में कहा जाता है कि वो यारों के यार थे। एक बार दोस्ती कर ली, तो वो पूरे दिल से निभाते थे। उनके निधन का एक साल होने पर ऋषि जी के कुछ पारिवारिक दोस्तों ने दैनिक भास्कर के साथ उनकी यादें साझा कीं।

जयपुर के जैन मंदिर में आस्था थी
ऋषि जी के खास दोस्त फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर और ट्रेड एक्सपर्ट राज बंसल कहते हैं कि हमारी दोस्ती 35 साल पहले फिल्म ‘चांदनी’ के सेट पर हुई थी। फिल्म की शूटिंग दिल्ली में चल रही थी। फिल्म के निर्देशक यश चोपड़ा से मेरे पारिवारिक रिश्ते थे। उन्होंने मुझे सेट पर बुलाया और ऋषि जी से मुलाकात कराई। चिंटू जी और मेरी बातचीत हुई। उस वक्त उनका शॉट नहीं था, दो घंटे बात करते-करते तो ऐसा हो गया मानो हम बहुत पुराने दोस्त हैं। फिर, हम तीन दिन दिल्ली में साथ में ही रहे। जब मैं जयपुर लौटने लगा तो उन्होंने कहा कि रुको कल मैं भी चलूंगा। वहां मेरी फिल्म ‘अजूबा’ की शूटिंग होनी है। हम एक ही गाड़ी से जयपुर आए। एक माह पहले ही मेरे बेटे का जन्म हुआ था। चिंटू जी ने वादा किया कि बेटे फंक्शन पूरी फैमिली के साथ आऊंगा। इतने बड़े एक्टर ने अपने दोस्त से किया वादा निभाया। वो नीतू जी और बच्चों के साथ आए। चार साल पहले मेरे बेटे की शादी में भी वो आए थे। तीन दिन रुके। पूरा टाइम हमको दिया। हम उसे आमेर का किला घुमाकर लाए। मैं उनको जैन मंदिर ले गया था। उन्होंने वहां मन्नत मांगी। वो पूरी हो गई तो ऐसा कभी नहीं हुआ कि वो जयपुर आए हों और जैन मंदिर न गए हों। अपनी बीमारी के दौरान उनकी सबसे ज्यादा आस्था जयपुर के पदमपुरा जैन मंदिर में थी। जब वे बीमार पड़े और इलाज के लिए न्यूयॉर्क गए तो जाने से पहले उन्होंने जयपुर के इसी मंदिर में अपने लिए पूजा-प्रार्थना कराई थी।
स्वेटर का उन्हें बहुत शौक था। उनके स्वेटर फिल्म में बहुत पॉपुलर थे। एक बार उनके स्वेटर की मैंने तारीफ की कि कहां से लाते हो बड़े शानदार हैं। बोले तुझे पसंद आए। एक बार लंदन से मेरे घर आए और स्वेटर लेकर आए। बोले मैंने अपने लिए तो सोचा सेम टू सेम तेरे लिए भी ले लूं।
एक और वाकया याद है कि जब मेरी नई-नई दोस्ती हुई तो उन्होंने मुंबई घर पर डिनर के लिये बुलाया। टाइम बताया नहीं। नॉर्मली मुंबई में रात को 10 बजे से पहले डिनर होता नहीं है। मैं 10 बजे इनके घर पहुंचा। अंदर देखा तो ये भाई साहब डिनर कर रहे हैं। मेरी तरफ देखकर बोले, ये कोई आने का टाइम है। तेरा इंतजार करते-करते मैंने डिनर शुरू कर दिया। मैंने बोला भाई फोन कर लेते। बोले, फोन नहीं करूंगा, तुम्हें टाइम पर आना चाहिए। बाद में पता चला कि ये 9 से 9:30 बजे खाना खा लेते हैं।
ऋषि कपूर दिल से अपनों को बहुत प्यार करते थे। लोग उनको एरोगेंट समझते थे। सच सुनना और बोलना उन्हें पसंद था। मेरा बेटा जब मुंबई पढ़ता था तो फोन करते थे कि बेटा गणपति बैठाए हैं, घर आना है पूजा पर। खाना यहीं खाना।

राज बंसल के परिवार के साथ ऋषि।

राज बंसल के परिवार के साथ ऋषि।

यार कुछ ठीक नहीं, मैं न्यूयॉर्क निकल रहा हूं
मुझे याद है कि जब इनको कैंसर हुआ तो किसी को पता नहीं था। जब उन्होंने डायग्नोसिस कराया तो पता चला। एक दिन रात को 8 बजे इनका फोन आया। बोले क्या हाल है तेरे। इनकी आवाज भारी लग रही थी। हालचाल पूछकर बोले यार कुछ ठीक नहीं है। 5 मिनट दे मैं बात करता हूं। मुझे कुछ डाउट लगा तो मैंने 5 मिनट से पहले ही कॉल कर लिया। बोले यार ठीक नहीं कुछ। मैं आज न्यूयॉर्क निकल रहा हूं। मेरी रिपोर्ट में कैंसर डिटेक्ट हुआ है। मैं वहां जाकर टेस्ट कराऊंगा। अभी किसी को बताना मत। मैं तुझे फोन करके बता रहा हूं तुम्हें कहीं और से पता चलेगा तो बुरा न लगे। ये प्यार था मेरा और उनका। इतना बड़ा एक्टर मैं छोटा सा डिस्ट्रिब्यूटर। लेकिन, उनका जो प्यार था, दोस्ती थी वो अपने सभी दोस्तों से। राहुल रवैल हों, रुमी जाफरी हों, जितेन्द्र जी, राकेश रोशन जी हों, प्रेम चोपड़ा जी, रजा मुराद जी और रवि मल्होत्रा जी और से भी। दोस्तों से सच में दोस्ती निभाते थे।

डायरेक्टर रूमी जाफरी

डायरेक्टर रूमी जाफरी

उन्होंने बोल दिया और फिल्मे मिलने लगी
फिल्म राइटर-डायरेक्टर और ऋषि कपूर के मित्र और कपूर परिवार के करीबी रुमी जाफरी ऋषि जी के नाम से ही भावुक हो गये और कहने लगे कि मेरे लिए वो सारी यादों से गुजरना बहुत कष्टदायक होगा। बहुत अनुरोध के बाद उन्होंने बताया कि चिंटू जी से मैं श्रीमान आशिक फिल्म के समय मिला। उसके बाद तो एक रिश्ता सा बन गया। न केवल उनसे बल्कि उनके पूरे परिवार से। उनकी मम्मी कृष्णा आंटी भी मुझे बेटे की तरह प्यार देने लगी। उनके घर में दावतों पर जाने लगा। वो चिंटू जी का प्यार ही था जब वे वाकिफ हुए कि मैं लिटरेचर फैमिली से हूं, भोपाल से ताल्लुक रखता हूं। उन्होंने मेरी राइटिंग देखी, फिल्में देखी तो वाह-वाह कह उठे। बोले मियां कहां छुपे बैठे थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि रुमी जाफरी में बहुत पोटेंशियल है। उसकी राइटिंग में मेरे गुरु ख्वाजा अहमद अब्बास साहब की झलक दिखती है। यह बहुत बड़ी बात थी मेरे लिए। इसके बाद तो कईं बड़े डायरेक्टर ने मुझ पर भरोसा जताया और मुझे बड़ी फिल्म मिलने लगी ।

डाइनिंग टेबल पर तय हुआ कि डायरेक्टर बनेंगे
एक बार मैं उनके घर के पास ऐश्वर्या और बॉबी के साथ ‘और प्यार हो गया’ फिल्म की शूटिंग कर रहा था। तभी मैं कृष्णा आंटी से मिलने चला गया। चिंटू जी भी थे। बोले आए हो तो खाना खाकर जाओ। शूटिंग चलती रहेगी। तब मैंने उनको खाने की टेबल पर ‘आ अब लौट चले’ फिल्म का स्टोरी प्लॉट बताया। उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने नीतू जी को बुलाया। उसके बाद शाम को घर पर बुलाकर सबको कहा कि रुमी भाई वो स्टोरी मां को और सबको बताओ। सबको वो पसंद आई। बोला जब बनेगी इसे मैं ही डायरेक्ट करुंगा इसे। इस तरह इस फिल्म से उन्होंने निर्देशक के रूप में नई शुरुआत की।

10वीं के रिजल्ट पर रणबीर ने कहा मुझे ऐश्वर्या पसंद है
मुझे याद है इस फिल्म की शूटिंग के पहले मेरी नई-नई शादी हुई थी। हम यूएसए में गए। मेरी पत्नी भी थी। चिंटू जी, कृष्णा आंटी, नीतू जी और रणबीर भी। कृष्णा आंटी वो पहली लेडी थीं जिनसे मेरी पत्नी मिली। देखा कि कैसे मेहमाननवाजी और छोटे-बड़े सभी को प्यार और सम्मान दिया जाता है। कृष्णा आंटी ने भी बेटी की तरह मेरी पत्नी को समझाया। चिंटू भाई मुझे छोटे भाई की तरह ट्रीट करते थे। उसी शूटिंग का मुझे एक किस्सा याद आ रहा है। रणबीर फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर भी था। एक दिन रणबीर का 10वीं का रिजल्ट आया। वो मेरे पास मिठाई लेकर आया। हम शूट कर रहे थे। ऐश्वर्या राय भी वहीं थी। तब रणबीर ने ऐश्वर्या की तरफ इशारा करते हुए मुझसे कहा था कि रुमी अंकल ऐश मुझे बहुत अच्छी लगती है। जब बड़ा होकर मैं हीरो बनूंगा तो यह मेरी हीरोईन बनेगी। तभी ऐश ने मुझसे पूछा कि रणबीर क्या मेरे बारे में कुछ बोल रहा है। तब मैंने उसको बताया कि तुम्हारे साथ फिल्म करने का बोल रहा है। ऐश ने उसे प्यार किया। तब मैंने दोनों की एक फोटो खींची। देखें कैसी लगेगी जोड़ी। यह इत्तेफाक था कि उन्होंने 21 साल बाद ऐ दिल है मुश्किल फिल्म में दोनों ने साथ काम किया।

न्यूयॉर्क में दौड़ कर चोरों का पीछा किया
एक और किस्सा याद आ रहा है कि हम “आ अब लौट चले” का कुछ सिक्वेंस न्यूयॉर्क में शूट कर रहे थे। चिंटू जी और एक कैमरामैन समीर आर्या कुछ खाने के लिए गए थे। वे रोड पर चल रहे थे। तभी दो चोर चिंटू जी का पर्स लेकर भागे। चिंटू जी खाने का सामान छोड़कर उनके पीछे दौड़ पड़े। काफी दूर तक पीछा किया। चोर ने पर्स फेंका और दीवार कूदकर भाग गया। बाद में वहां के पुलिसवालों ने चिंटू जी और मुझे बताया कि बहुत रिस्की था। ये लोग गोली भी चला देते हैं। लेकिन, चिंटू जी मुस्कुराते हुए बोले वो तो मैं जंप नहीं कर सका, नहीं तो पकड़ लेता उसे। हम सब खूब हंसे।

टेन्शन मत लो, मैं कैंसर को फाइट दे कर वापस आ रहा हूं
मुझे याद है, जब वो न्यूयॉर्क में ट्रीटमेंट ले रहे थे। तब मैं नीतू जी से उनकी खबर लेता रहता था। एक दिन उनका फोन आया, बोले – मेरे से बात करने में शर्म आती है क्या। अरे भाई जान मैं ठीक हूं। जल्द ठीक होकर आ रहा हूं, बहुत फिल्म करनी है अभी। बोल देना सबको जो तुझसे मेरा हालचाल पूछते होंगे कि चिंटू भाई बोल रहे हैं कैंसर से फाइट दे कर वापस इंडिया जल्द आ रहे हैं, टेंशन लेने की जरूरत नहीं।
उसके बाद जब वो वापस आए, तो मिलने गया। बोले हम दाढ़ी में एक फोटो करते हैं। बिंदास मस्त, चेहरे पर कोई शिकन-शिकायत नहीं। बोले – जल्द सब दोस्तों को बुलाते हैं, मेरी शादी की सालगिरह का जश्न मनाते हैं। वो बेहद जिंदादिल, खिलाने-पिलाने और मेहमाननवाजी वाले इंसान थे।

मुझे याद है मैं जब भी ईद पर भोपाल घर जाता था। तब वो लैंडलाइन पर फोन करके मेरे पापा-मम्मी और पूरे परिवार को ईद की मुबारकबाद देते थे। उनके जाने के बाद पहली ईद पर नीतू भाभी का फोन आया। रुमी भाई अम्मी का नंबर दो मैं ईद पर उन्हें विश करुंगी। ये ग्रेटनेस है पूरी कपूर फैमिली की। जितने ऊंचा मकाम, उतने डाउन टू अर्थ, मिलनसार। मैं बस उनके लिए अल्लामा इकबाल का शेर अर्ज करके अपनी बात खत्म करूंगा कि- हजारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।

फिल्म क्रिटिक और राइटर भावना सोमाया

फिल्म क्रिटिक और राइटर भावना सोमाया

नीतू के लिए मै ऋषि की जासूस बन गई थी
फिल्म क्रिटिक, राइटर भावना सोमाया ऋषि और नीतु के फैमिली फ्रैंड हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि मेरी दोस्ती पहले नीतू सिंह से थी। उस वक्त मैं नई-नई फिल्म जर्नलिस्ट थी। नीतू जब आउटडोर पर जाती तो मुझसे कहती कि कान खुले रखना। मेरे बॉयफ्रैंड चिंटू के बारे में उसकी को-स्टार या किसी से अफेयर की कोई बात हो, तो मुझे बताना। मुझे नहीं पता था कि उसने चिंटू जी को ये बोला था कि उसने उनके पीछे एक जासूस लगाया है। चिंटू जी मुझे जब भी देखते तो भाग खड़े होते। मैं हैरान थी। हम एक बार एक फंक्शन में मिले तो नीतू चिंटू जी को बोलकर गई कि मेरी सहेली का ख्याल रखना। हम दोनों खड़े रहे लेकिन बातचीत नहीं की। किसी फोटोग्राफर ने वो फोटो भी क्लिक की थी। नीतू से शादी के बाद ऋषि कपूर ने मुझसे नाराजगी भूला दी थी। बाद में मेरी उनसे दोस्ती हो गई। एक दिन उन्होंने नीतू से बोला आज मेरी एक फ्रेंड डिनर के लिये आ रही है। जब मैं पहुंची तो नीतू हैरान रह गई थी।

शादी के बाद मैंने उनसे संपर्क करना कम कर दिया था। उस दौरान ऋषि कपूर इस बात को लेकर चिंतित थे कि अचानक मैंने नीतू और उनके परिवार से मिलना कम क्यों कर दिया। एक बार वह शूटिंग के दौरान अचानक मुझसे टकरा गए तब ऋषि कपूर ने कहा था कि ‘मेरी बीवी की दोस्त हैं तो अब मेरी भी दोस्त बनती हैं…।’ 80 के दशक में नीतू और ऋषि पाली हिल, बांद्रा में रहने लगे और इस दौरान कई पार्टी में हमारी मुलाकात होती रही। उसके बाद तो मैं उनके घर की मेंबर गई। चिंटू के कैंसर होने के बाद नीतू उनसे जुड़ी रही। कैंसर होने के बाद चिंटू और रणबीर बेहद करीब आ गए। मुझे लगता है कि चिंटू जी बड़ी जल्दी चले गए। वे मुझसे कहते थे भावना, पापा राजकपूर की उम्र नहीं थी जाने की, वो चले गए।

अब देखिए चिंटू जी भी जल्दी चले गए और भाई राजीव भी। अब रणधीर तीन भाइयों में अकेले रह गए। लेकिन चिंटू ने दूसरी पारी में पहले डायरेक्शन किया और जब एक्टिंग की तो सारे क्रिटिक का मुंह बंद कर दिया। खासकर अग्निपथ से लेकर मुल्क तक जो फिल्मों में निभाए किरदार ने उनकी चॉकलेटी इमेज को भी ब्रेक कर दिया। चिंटू जी हमेशा हमारे दिलों में हैं। उनकी फिल्मों में उनका काम हमेशा प्रेरणा देगा आने वाली जेनरेशन को। लव यू चिंटू जी एंड वी आर मिस यू सो मच।

खबरें और भी हैं…

बॉलीवुड | दैनिक भास्कर

About R. News World

Check Also

कंगना का तंज: कंगना की पोस्ट इंस्टाग्राम ने भी हटाई, एक्ट्रेस बोलीं- लगता है कोविड फैन क्लब आहत हो गया, यहां हफ्ते भर भी टिकना मुश्किल

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप 32 …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *