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यूनिवर्सिटी की भी सुनी जाए: यूनिवर्सिटी ने मनपा के कॉलेज का 10 लाख डिपॉजिट माफ किया, पर मनपा से मदद नहीं

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सूरतएक घंटा पहले

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  • रोड बनाने के लिए तोड़ी गई यूनिवर्सिटी की दीवार का मुआवजा भी नहीं मिला

यूनिवर्सिटी और महानगर पालिका के बीच लंबे समय से यूनिवर्सिटी के सुरक्षा दीवार को लेकर विवाद है। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी ने महानगर पालिका के एमडी कोर्स के लिए डिपॉजिट नहीं लेने का निर्णय लिया है। वहीं सिंडिकेट सदस्य का कहना है कि जब यूनिवर्सिटी फीस माफ कर सकती है तो मनपा को भी यूनिवर्सिटी की मदद करनी चाहिए।

यूनिवर्सिटी की दीवार को तोड़कर रोड बनाने के बाद अभी तक मनपा ने कोई पैसा नहीं चुकाया है। साथ ही आरटीपीसीआर टेस्ट में भी यूनिवर्सिटी को मदद मिलनी चाहिए। इसे लेकर कुलपति और महानगरपालिका में चर्चा भी हुई है, लेकिन महानगर पालिका की ओर से इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया गया है।

महानगरपालिका ने यूनिवर्सिटी काे पत्र लिखा था, इसमें जिक्र किया गया था कि महानगर पालिका के शहर में कॉलेज लोगों के टैक्स के पैसे चल रहे हैं। यूनिवर्सिटी और महानगरपालिका दाेनाें सरकारी संस्थाएं है। यहां काम करने वाले सभी कर्मचारियों को सरकार वेतन देती है।

यूनिवर्सिटी को जो पैसा महानगरपालिका की कॉलेज से चुकाया जाता है वह लोगों के टैक्स से अाता है। एसएमसी की कॉलेज वर्ष 2000 से यूनिवर्सिटी के साथ एफिलेटेड है और यूनिवर्सिटी के सारे नियम को मानती है। इसलिए एमडी साइकैट्रिस्ट कोर्स काे शुरू करने के लिए डिपॉजिट के 10 लाख रुपए जमा करवाने से राहत दी जाए। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने डिपॉजिट फीस नहीं लेने का निर्णय लिया है।

महानगरपालिका ने यूनिवर्सिटी की जमीन में बने दीवार को रोड बनाते वक्त गिरा दिया था। इस मामले में यूनिवर्सिटी की ओर से महानगर पालिका को कई बार पत्र लिखा गया है। इसमें दीवार बनाने और राेड के लिए लिए गए जमीन का मुआवजा देने की मांग की गई है। लेकिन महानगरपालिका की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है।

आरटी पीसीआर टेस्ट में भी मदद नहीं

महानगर पालिका द्वारा कोराेना में आरटीपीसीआर टेस्ट करवाने के लिए निजी लेबोरेटरी से करार है। वहीं यूनिवर्सिटी में भी राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक आरटीपीसीआर टेस्ट की व्यवस्था शुरू कर की गई है। इसलिए यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने महानगरपालिका से मांग की थी कि जो खर्च महानगरपालिका प्राइवेट लैब को चुकाती है, उसी खर्च पर यूनिवर्सिटी भी टेस्ट करने के लिए तैयार है। इस मामले में भी महानगर पालिका की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।

महानगर पालिका से बात की जा रही है। यूनिवर्सिटी भी सरकारी संस्था है, इसमें छात्रों को पढ़ाया जाता है और उसका खर्च उठाया जाता है। इसलिए महानगरपालिका को भी मदद करनी चाहिए। इसकी मांग की जा रही है।
– किरण घोघारी, सिंडीकेट सदस्य

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