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लूडो के खिलाफ याचिका: लूडो को कौशल नहीं किस्मत का खेल घोषित करने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई, याचिकाकर्ता ने कहा-जुआ खेल रहे हैं लोग

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मुंबई7 मिनट पहले

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अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है और मामले की सुनवाई 22 जून के लिए टाल दी है।

‘लूडो’ को कौशल नहीं किस्मत का खेल घोषित किए जाने की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह याचिका महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के पदाधिकारी केशव मुले ने अधिवक्ता निखिल मेंगड़े के माध्यम से दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि ऑनलाइन तरीके से लूडो सुप्रीम ऐप पर पैसे दांव पर लगा कर लोग लूडो खेल रहे हैं। जो गैम्बलिंग प्रतिबंधक कानून की धारा 3, 4, व 5 के तहत आता है। इसलिए ऐप से जुड़े प्रबंधन के लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मामले को लेकर पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने लूडो को कौशल का खेल मानते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि चार लोग पांच रुपए का दांव पर लगा कर लूडो खेलते हैं तो विजेता को 17 रुपए मिलते हैं, जबकि ऐप चलाने वाले को तीन रुपए मिलते हैं।

लूडो के नाम पर जुआ खेला जा रहा है: याचिकाकर्ता
गुरुवार को हॉलिडे कोर्ट के जस्टिस एस एस शिंदे व न्यायमूर्ति अभय आहूजा की खंडपीठ के सामने यह याचिका सुनवाई के लिए आई। इस दौरान खंडपीठ ने याचिका पर गौर करने के बाद कहा कि याचिका पर तत्काल सुनवाई की क्या जरूरत है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता निखिल मेंगड़े ने कहा कि लूडो के नाम पर जुआ सामाजिक बुराई का रुप लेता जा रहा है और युवा इसकी ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए इस पर अदालत का तत्काल हस्तक्षेप अपेक्षित हैं।

राज्य सरकार को नोटिस जारी कर अदालत ने जवाब तलब किया
याचिका के मुताबिक, लूडो का खेल उसके डाइस (पासा) के गिरने के बाद उस पर आने वाले अंकों पर निर्भर करता है। इस तरह से देखा जाए तो लूडो कौशल नहीं किस्मत का खेल है। इसलिए जब लोग इस खेल में कुछ दाव पर लगाते हैं तो यह जुआ का रुप ले लेता है। इसलिए इस परिस्थिति में इसे कौशल नहीं किस्मत का खेल माना जाए। खंडपीठ ने फिलहाल इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और याचिका पर 22 जून 2021 को सुनवाई रखी है।

निचली अदालत ने माना है कौशल का खेल
याचिकाकर्ता केशव मुले को ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने इस बारे में वीपी रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने इसका संज्ञान नहीं लिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी शिकायत की थी। किन्तु कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया। निचली अदालत ने लूडो को कौशल का खेल माना है। इसलिए मजिस्ट्रेट कोर्ट के 12 फरवरी 2021 के आदेश को रद्द किया जाए। और पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।

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महाराष्ट्र | दैनिक भास्कर

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