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वर्ल्ड साइकिल डे पर खास: पटना में साइकिल ट्रैक का प्लान कई बार फेल हुआ, हाईकोर्ट ने भी कहा था- लोग साइकिल चलाएं, तभी घटेगा पॉल्यूशन

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पटना7 घंटे पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

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पटना के सुनील कुमार चलाते हैं 45​​​​​​​ हजार की पोर्टेबल बैटरी वाली साइकिल।

बिहार में राजधानी पटना का एयर पॉल्यूशन कई बार देश की राजधानी दिल्ली से ज्यादा खतरनाक होकर 400 से भी ऊपर चला जाता है। लेकिन अब तक पर्यावरण पर खूब काम करने वाली सरकार साइकलिंग के लिए पटना में ट्रैक नहीं बना पाई है। पटना में सरकार ने ओवरब्रिज का जाल बिछा दिया। CNG वाली गाड़ियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। डीजल वाली 15 साल पुरानी तीन पहिया ऑटो पर रोक लग रही है। इलेक्ट्रिक बसें भी पटना में चल रही हैं, लेकिन साइकलिंग को बढ़ावा देने का लांग टाइम प्लान सरकार नहीं बना पाई।

हाईकोर्ट में 2018 में कहा था- जब तक लोग गाड़ियां छोड़ साइकिल नहीं चलाएंगे, प्रदूषण नियंत्रित नहीं होगा

3 दिसंबर 2018 को पटना के वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एपी शाही ने टिप्पणी की थी. उन्होंने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा था- ‘जब तक लोग गाड़ियों को छोड़ साइकिल चलाना नहीं शुरू करेंगे, प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो सकता।’

याचिकाकर्ता के वकील सर्वदेव यह जानकारी देते हुए कहते हैं कि कोर्ट ने तब यह भी कहा था कि कोर्ट के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, जिसे घुमाकर प्रदूषण नियंत्रित किया जा सके. चीन-जापान में लोग साइकिल पर आ गए हैं, यहां भी आना चाहिए। सर्वदेव सिंह कहते हैं कि सरकार ने कोर्ट की भावना का सम्मान किया होता तो साइकिल का ट्रैक पटना में बन गया होता।

अटल पथ पर साइकिल ट्रैक बनाने की चर्चा थी, पर जमीन पर नहीं दिखा कुछ

ऐसा नहीं है कि सरकार ने इसके लिए कोशिश नहीं की। पटना में चिड़ियाखाना के गेट नंबर दो की तरफ साइकिल ट्रैक राजभवन तक बनाया गया था, लेकिन अब वह नहीं दिखता। इसी तरह एक कोशिश बिहार म्यूजियम के पास की गई थी, लेकिन वह भी आगे सफल नहीं हुई।

पटना में जब रेल पटरियों को उखाड़कर अटल पथ, आर ब्लॉक से दीघा तक बनाया गया, तब लोगों में उम्मीद जगी कि साइकिल का ट्रैक बनाया जाएगा। तब यह बात सामने आई थी कि लाल रंग के ट्रैक पर साइकिल सवार और लाल-पीले रंग के ट्रैक पर पैदल यात्री चलेंगे। सड़क के दोनों तरफ साइकिल ट्रैक बनने की बात थी। इससे हड़ताली मोड़ से लेकर कुर्जी नाला तक दाहिने साइड में तीन किमी क्षेत्र में साइकिल सवार और पैदल यात्री ट्रैक बनना था।

अटल पथ पर साइकलिंग की व्यवस्था होती तो इससे सबसे ज्यादा फायदा स्कूली छात्र-छात्राओं को होता। सेंट माइकल, लोयला, नोट्रेडम जैसे कई बड़े स्कूल अटल पथ के पास ही हैं। सच यह है कि अटल पथ पर साइकिलिंग के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।

एम्स्टर्डम का मॉडल अपना सकता है पटना

एम्स्टर्डम को साइकिल कैपिटल ऑफ वर्ल्ड कहा जाता है। यह दुनिया भर में साइकिलिंग को प्रमोट करने वाला खूबसरत मॉडल है। इस शहर में जितने लोग हैं, उतनी ही साइकिलें हैं। यह शहर एक समय एयर पॉल्यूशन से परेशान था और इसने साइकलिंग को बढ़ावा देकर पॉल्यूशन का समाधान खोज लिया।

पटना के लिए यह मॉडल नजीर बन सकता है। पटना में बेली रोड किनारे के दर्जनों पेड़ काटे गए, अटल पथ किनारे के कई पेड़ काटे गए, लेकिन साइकिल चलाने की जगह सरकार नहीं दे पा रही।

सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राओं को साइकिल देती है सरकार

बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को साइकिल खरीदने के लिए राशि देकर साइकलिंग को बढ़ावा जरूर दिया। उससे खास तौर से लड़कियों की शिक्षा में बेहतरीन उछाल आया, लेकिन साइकिलिंग को पटना जैसे शहर में बढ़ावा देने का काम सरकार ने अब तक नहीं किया है।

पटना के सुनील कुमार चलाते हैं 45 हजार की पोर्टेबल बैटरी वाली साइकिल

पटना में कुछ लोगों के पास बैटरी से चलने वाली साइकिल भी है। एयरपोर्ट महुआबाग के पास रहने वाले सुनील कुमार बिजनेसमैन हैं। उन्होंने बैटरी वाली साइकिल छह माह पहले 45 हजार में खरीदी। एक बार बैटरी चार्ज करते हैं तो 50 किमी चलती है। साइकिल की चाल 30-35 किमी प्रति घंटा है। साइकिल पोर्टेबल है इसलिए कार के पीछे भी रख लेते हैं। साइकिल में लॉक है इसलिए चोरी का डर नहीं है। कहते हैं कि पटना में साइकिल का ट्रैक नहीं है, इसलिए दिक्कत है। भुवनेश्वर जाते हैं तो वहां ट्रैक पर चलाने का मजा खूब है।

21 वर्षों से हर दिन 15-18 किमी साइकिल चला रहे श्रवण

हाईकोर्ट के जजों और सरकार के अफसरों के क्वार्टर में फूलों की देखभाल करने वाले श्रवण कुमार चौधरी से भास्कर ने बात की। उन्होंने बताया कि वे 1990 से पटना की सड़कों पर साइकिल चला रहे हैं। हर दिन 18 किमी साइकिल चलाते हैं। मोटसाइकल है, लेकिन साइकल ही चलाते हैं।

वे कहते हैं कि रेड लाइड पर सिग्नल का पालन करते हैं। पटना में साइकिल का ट्रैक होना चाहिए। हां, यह जरूर कहते हैं कि साइकिल चलाने वाले को बहुत सम्मान से लोग नहीं देखते। यह नजरिया बदलना चाहिए, दुनिया बदल रही है।

मंत्री ने कहा- रिव्यू करेंगे

भास्कर ने राज्य के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन से बात की। उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी से जुड़ी बैठक में यह बात आई थी कि गांधी मैदान के चारों तरफ साइकिल ट्रैक बनाया जाए। आगे उस पर क्या हुआ, जानकारी नहीं है। अटल पथ पर साइकिल ट्रैक की योजना अगर थी तो उसे हम रिव्यू करते हैं। पटना में शहरी सड़कें इतनी चौड़ी नहीं हैं कि साइकल ट्रैक बनाया जा सके।

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बिहार | दैनिक भास्कर

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