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वेदर अपडेट: शिमला समेत पूरे प्रदेश में कहीं कम ताे कहीं ज्यादा बारिश, माैसम विभाग ने माना ये है प्री मानसून, 20 जून के बाद बरसेगा मानसून

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  • There Is Little Or More Rain In The Entire State Including Shimla, The Weather Department Has Admitted That It Is Pre monsoon, Monsoon Will Rain After June 20

शिमलाएक घंटा पहले

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  • इस बार मानसून में अच्छी बारिश हाेती है ताे किसानाें काे फायदा हाेगा, सूखे से भी राहत मिलेगी

प्रदेश और शिमला में इन दिनाें कहीं ज्यादा बारिश हाे रही है ताे कहीं कम बारिश हाे रही है। ऐसे में अब माैसम विभाग ने माना है कि है कि ये प्री-मानसून की बाैछारें हैं। 20 जून के बाद मानसून पूरी तरह से सक्रिय हाे सकता है, जिससे प्रदेश के लाेगाें काे गर्मी से राहत मिली है। इस साल प्रदेश में किसानों बागबानाें पर माैसम कहर बन कर टूटा है।

अप्रैल में बगीचाें में फ्लाॅवरिंग के दाैरान बेमाैसमी बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब सहित दूसरे अन्य फलाें काे भारी नुकसान झेलना पड़ा। मई में सेब सहित अन्य फल तूफान आने के कारण बर्बाद हुए हैं। हालांकि, अब मानसून के आने के बाद किसानाें की फसल अच्छी रहने की उम्मीद है। अगर इस बार मानसून में अच्छी बारिश हाेती है ताे किसानाें काे फायदा हाेगा।

सूखे से भी राहत मिलेगी और पानी की कमी भी पूरी हाेगी। बीते 24 घंटें में शिमला में प्री मानसून की बाेछाराें के चलते 10.6 मिलीमीटर बारिश रिकाॅर्ड की गई है। पालमपुर में सबसे ज्यादा 78 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पर्यटन स्थल कुफरी में भी दाे मिलीमीटर बारिश हुई है। प्रदेश में सिर्फ 30 फीसदी सिंचित क्षेत्र है, जबकि 70 फीसदी क्षेत्र असिंचित है, इसलिए अधिकतर कृषि और बागवानी कार्य बारिश पर ही निर्भर हैं।

ऐसे पहुंचता है मानसून

मानसून पूरी तरह से हवाओं के बहाव पर निर्भर करता है। आम हवाएं जब अपनी दिशा बदल लेती हैं, तब मानसून आता है। जब ये ठंडे से गर्म क्षेत्रों की तरफ बहती हैं तो उनमें नमी की मात्र बढ़ जाती है, जिसके कारण वर्षा होती है। हिंद महासागर और अरब सागर से ये हवाएं भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आती हैं।

ये हवाएं ठंडे से गर्म क्षेत्रों की तरफ बढ़ते हुए अपने साथ पानी वाले बादल भी लाती हैं जो भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भी बारिश करवाते हैं। भारत में जून से सितंबर तक मानसूनी हवाएं चलती रहती हैं। शिमला की बात करें ताे यहां पर मानसून की बारिश में सबसे ज्यादा नुकसान हाेता है।

घने जंगल हाेने के कारण पेड़ गिरने की घटनाएं यहां सबसे ज्यादा हाेती है। अभी तक हुई बारिश से कराेड़ाें रुपए का नुकसान हुआ है। जबकि अभी बरसात शुरू भी नहीं हुई है। क्लाइमेट चेंज के चलते इस बार ताे अप्रैल महीने में ही बर्फबारी हाे गई थी।

12 जून काे ऑरेंज अलर्ट

​​​​​माैसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनाें में प्री मानसून की ये बाैछारें जारी रहेगी। 12 जून काे ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में मैदानी क्षेत्राें में पड़ रही गर्मी से लाेगाें काे राहत मिलेगी। कुछ जगहाें पर इस बारिश और तेज हवाएं चलने से नुकसान भी झेलना पड़ रहा हे। ऊपरी क्षेत्राें में तेज हवाएं चलने से सेब की फसल काे भी नुकसान हुआ है।

इन दिनाें जाे बारिश हाे रही है ये प्री-मानसून की बाैछारें हैं। 20 जून के बाद कभी भी मानसून दस्तक दे सकता है। हालांकि, अभी तक मानसून आने की डेट हमने तय नहीं की है। प्री-मानसून आने के बाद बारिश का ये सिलसिला जारी रहेगा।
मनमाेहन सिंह, निदेशक, माैसम विभाग शिमला

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