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शनि जयंती आज: तिल या सरसों का तेल चढ़ाने से खुश होते हैं शनि देव, आज शमी और पीपल पूजा की भी परंपरा

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2 घंटे पहले

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  • इस दिन काले कपड़े और काले तिल दान करने से दूर होते हैं कष्ट, हनुमान जी की पूजा से भी दूर होता है शनि दोष

आज ज्येष्ठ महीने की अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाएगी। इसे शनि अमावस्या भी कहा जाता है। पुराणों के मुताबिक इसी दिन शनिदेव का जन्म हुआ था। शनि देव, भगवान सूर्य और छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। शनि शुरू से ही विपरीत स्वभाव के थे। ये क्रूर ग्रह माने जाते हैं। इनकी नजर में जो क्रूरता है, वो इनकी पत्नी के श्राप की वजह से है। ब्रह्म पुराण में इस बारे में कथा बताई गई है।

सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं शनि
शनि जन्म के संदर्भ में एक पौराणिक कथा बहुत मान्य है जिसके अनुसार शनि, सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। सूर्य देव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ। कुछ समय बाद उन्हें तीन संतानों के रूप में मनु, यम और यमुना की प्राप्ति हुई। इस प्रकार कुछ समय तो संज्ञा ने सूर्य के साथ रिश्ता निभाने की कोशिश की, लेकिन संज्ञा सूर्य के तेज को अधिक समय तक सहन नहीं कर पाईं। इसी वजह से संज्ञा अपनी छाया को पति सूर्य की सेवा में छोड़कर वहां से चली चली गईं। कुछ समय बाद छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ।

शनि जयंती पर ऐसे करें पूजा
शनि जयंती पर शनिदेव के निमित्त विधि-विधान से पूजा पाठ तथा व्रत किया जाता है। शनि जयंती के दिन किए गए दान और पूजा पाठ से कष्ट दूर होते हैं। इसलिए इस दिन सुबह जल्दी नहाकर नवग्रहों को नमस्कार करें। फिर शनिदेव की लोहे की मूर्ति स्थापित करें और सरसों या तिल के तेल से उसका अभिषेक करें। इसके बाद शनि मंत्र बोलते हुए शनिदेव की पूजा करें। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा भी करनी चाहिए।
शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल, उड़द, काली मिर्च, मूंगफली का तेल, लौंग, तेजपत्ता तथा काला नमक पूजा में उपयोग कर सकते हैं। ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र बोलते हुए शनिदेव से संबंधित वस्तुओं का दान करें। शनि के लिए दान में दी जाने वाली वस्तुओं में काले कपड़े, जामुन, काली उडद, काले जूते, तिल, लोहा, तेल, आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान में दे सकते हैं। इस प्रकार पूजन के बाद दिन भर कुछ न खाएं और मंत्र का जप करते रहें।

शनि जयंती का महत्त्व
पुराणों के मुताबिक शनिदेव जन्म से ही काले रंग, लंबे शरीर, बड़ी आंखे और बड़े बालों वाले थे। शनि जयंती पर खास शनि मंदिरों में पूजा होती है और शनि से जुड़ी चीजों का दान किया जाता है। जिससे कुंडली में शनि की अशुभ स्थिति का असर कम हो जाता है। इस दिन शनिदेव की पूजा करने से या उनसे जुड़ी चीजें दान करने से शनि के दोष दूर हो जाते हैं। इस दिन शनि देव की जो भक्तिपूर्वक व्रत उपासना करते हैं वह पाप की ओर जाने से बच जाते हैं। जिससे शनि की दशा आने पर उन्हें कष्ट नहीं भोगना पड़ता। शनि देव की पूजा से जाने-अनजाने में किए पाप कर्मों के दोष से भी मुक्ति मिल जाती है।

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