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शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा मौतें: 13 माह में 1.89 लाख मौतें, कोरोना से 13300 घर में हुई मौतों का विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं

रायपुरएक घंटा पहलेलेखक: पीलूराम साहू

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  • कोरोना की दूसरी लहर के पीक में शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा मौतें, 2019 में ही केवल कैंसर से मरने वालों की संख्या 1.75 लाख थी, जबकि दिल की बीमारियों से भी कई मौतें…

प्रदेश में कोरोना काल के पिछले 13 महीनों में हर दिन 33 के औसत से प्रदेश में कोरोना मौत का आंकड़ा 13300 के पार पहुंच गया है। प्रदेश में इस अवधि में दूसरी बीमारियों और अन्य वजहों से 1.89 लाख से अधिक मौतें हुई। इस लिहाज से देखें तो कोरोना से मौत 0.70 प्रतिशत ही हुई है। जबकि कैंसर, दिल जैसी गंभीर बीमारियों और सड़क हादसों में हर साल इससे ज्यादा मौतें हो रही है। 2019 में केवल कैंसर से मरने वालों की संख्या 1.75 लाख है।

सड़क दुर्घटना में 2005 लोगों की जान गई। कोरोना से 13 माह में 13300 मरीजों ने दम तोड़ा। जहां कैंसर से 70 फीसदी मरीजों की मौत हुई, वहीं सड़क दुर्घटना में 45 फीसदी घायलों ने दम तोड़ा। 2020-21 में कोरोना के कारण नॉन कोराना वाले मरीज कम अस्पताल गए। इससे ऑन रिकार्ड मौत कम दिख रही है। जिनकी मौतें दूसरी बीमारी से घर में हुई, उनका आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर की ही तुलना में कोरोना से होने वाली मौतें काफी कम हैं। यही नहीं, इस साल कोरोना काल में डेंगू, मलेरिया, पीलिया, स्वाइन फ्लू या लू से मौत के आंकड़े अब तक शून्य हैं। पिछले 5 साल में प्रदेश में 7.30 लाख से अधिक मौतें हुई है। यानी प्रदेश में हर साल औसतन करीब डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु हो रही है।

राज्य में कोरोना के दूसरी लहर के दौर में मौत की घटनाओं का एक नया ट्रेंड देखने को मिला है। दूसरी लहर में शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण अंचलों में मौत के मामले अधिक आए हैं। इस साल मार्च, अप्रैल और मई के तीन महीनों में गांवों में शहर की तुलना में अधिक मौतें दर्ज हुई है। राज्य के बर्थ एंड डेथ सर्टिफिकेट के अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक इस साल इन तीनों महीनों में 38918 से अधिक मौत हुई है। जिसमें से 20682 से अधिक मौत केवल ग्रामीण इलाकों में हुई है। इतना ही नहीं 2017 से 2020 के बीच मौत के मामलों में तुलनात्मक रुप से प्रदेश में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2017 में जहां पूरे प्रदेश में 1.75 लाख से अधिक मौत हुई है। 2020 में ये बढ़कर 1.89 लाख तक हो गई हैं।

कम आबादी वाले राज्य में कैंसर से इतनी ज्यादा मौतें चिंताजनक
हालांकि छोटे राज्य के लिए इतनी मौत चिंताजनक है। अंबेडकर अस्पताल में रीजनल कैंसर सेंटर स्थापित है। वहां 2018-19 में 2.5 लाख मरीजों का इलाज किया गया। हर साल औसतन इलाज कराने वाले 70 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। डॉक्टरों के अनुसार इसकी मुख्य वजह मरीजों का तीसरे व चौथे स्टेज में आना है। तब तक मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। दूसरी ओर सड़क दुर्घटना में 2019 में 5003 की मौत हुई है। कोरोना के कारण मार्च 2020 से अब तक नॉन कोरोना मरीज कम गए। इसका कारण लॉकडाउन व लोगों में डर था। उदाहरण के लिए 2019 में कैंसर के 2.5 लाख मरीजों का इलाज किया। 2020 में 75 हजार मरीज घट गए और 1.75 लाख मरीजों का इलाज किया। 2021 में मई तक केवल 60 हजार मरीज आए। इसी तरह दूसरी बीमारी के मरीज भी कम आए, जिस कारण मौत की संख्या कम दिख रही है।

  • 13 महीनों में कोराेना से हर दिन औसतन 33 की मौत
  • छत्तीसगढ़ में मौतों के वही आंकड़े दर्ज जो अस्पतालों में हुई
  • पिछले 5 साल में प्रदेश में 7.30 लाख से अधिक मौतें

लॉकडाउन में सड़क दुर्घटना कम, क्योंकि वाहन कम चले, चार महीने में 2 हजार की मौत
लॉकडाउन में कम वाहन चलने के कारण सड़क दुर्घटना में मरने वालां की संख्या कम रही। 2019 में 5003 लोग मरे तो 2020 में 4606 लोगों की जान चली गई। 2020 में अप्रैल तक 2064 लोगों की जान गई। क्योंकि तब लॉकडाउन नहीं था। कुछ जिलों में 9 अप्रैल से लॉकडाउन लगा। हालांकि नेशनल हाइवे होने के कारण वाहनों का आना-जाना लगा रहा। इस कारण 4 महीने में 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

इस साल कैंसर के इलाके लिए कम मरीज पहुंचे अस्पताल

इलाज के लिए आए 70% कैंसर मरीजों की मौत का कारण उनका अंतिम स्टेज में आना है। हालांकि चौथी स्टेज में भी कुछ मरीज बचे हैं। इस साल इलाज के लिए कम लोग आए।
-डॉ. विवेक चौधरी, डायरेक्टर रीजनल, कैंसर सेंटर

आमतौर पर दिल की बीमारियों से 20 से 30% तक मौतें हर साल होती हैं। इसके पीछे ज्यादातर जीवन शैली में आ रहे बदलाव के अलावा ज्यादा तनाव भी एक कारण है।
-डॉ. स्मित श्रीवास्तव, एचओडी-एसीआई, रायपुर

लाॅकडाउन में वाहन कम चले, इसलिए सड़क दुर्घटना में कम लोगों की मौत हुई। औसतन हर साल 4500 से 5000 लोग सड़क दुर्घटना में सिर की चोट से जान गंवाते हैं।
-डॉ. राजीव साहू, एचओडी न्यूरो सर्जरी डीकेएस

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