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सियासी समीकरण: बसपा को 23 सीटें दे सकता है शिअद, गठजोड़ आज संभव

जालंधर13 मिनट पहले

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मीटिंग से पहले बसपा महासचिव सतीश मिश्रा।

  • बसपा महासचिव मिश्रा चंडीगढ़ पहुंचे
  • जो सीटें भाजपा को देता था शिअद, वही बसपा को मिलने की उम्मीद

शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के बीच हुए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा शनिवार को हो सकती है। इसके लिए बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। शनिवार को मिश्रा और अकाली दल प्रमुख सुखबीर बादल गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं। राज्य में बड़ी संख्या में दलित मतदाताओं के होने की वजह से यह गठबंधन काफी अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा भी हो गया है।

अकाली दल चुनाव में बीएसपी को 20 से ज्यादा सीटें देने पर लगभग राजी हो गया है। हालांकि बसपा 37-40 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन उस पर सहमति नहीं बन पाई। बसपा के पंजाब प्रभारी रणधीर सिंह बेनीवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पार्टी 20 प्लस सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। इसके लिए पार्टी माझा और दोआबा में सर्वे कर रही है। आकलन किया जा रहा है कि किस सीट पर पार्टी को कितना समर्थन हासिल है और पार्टी अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए क्या कर सकती है। गठजोड़ का दोनों पार्टियों को फायदा होगा।

दोआबा में ज्यादा उम्मीदवार उतारेगी बसपा

शिअद सूत्रों के अनुसार बसपा को 23 सीटें मिल सकती हैं। शिअद अपनी गठजोड़ पार्टी भाजपा को 23 सीटें दिया करती थी। अब बसपा को 23 सीटें मिल सकती हैं। यह भी संभावना है कि जहां से बीजेपी के उम्मीदवार चुनाव लड़ते थे, वहीं से अब बसपा के प्रत्याशी चुनाव लड़कर भाजपा की कमी पूरी करेंगे। बसपा दोआबा में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

चीमा बोले- कोर कमेटी की मीटिंग में होगी गठजोड़ पर बात

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि हमख्याल पार्टियों के साथ बातचीत कई महीने से जारी है। शिअद कोर कमेटी की शनिवार को बैठक होगी जिसमें गठजोड़ पर बातचीत की जाएगी।

मायने- सरकार बनाने में 33% दलित वोट अहम

पंजाब में करीब 33% दलित वोट हैं। बीएसपी के सहारे शिअद दलित वोट हासिल कर एक बार फिर सत्ता में आने की तैयारी में है। अकाली दल ने दलित वोट बैंक लुभाने के लिए एलान कर रखा है कि 2022 में अकाली दल की सरकार बनने पर उप-मुख्यमंत्री दलित वर्ग से बनाया जाएगा। बहुजन समाज पार्टी 25 साल से पंजाब में विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ रही है लेकिन कभी भी बड़ी जीत हासिल नहीं कर पाई। चुनाव में बसपा के उम्मीदवार वोट काटकर दूसरी पार्टियों के प्रत्याशियों की हार-जीत का कारण बनते रहे हैं।

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चंडीगढ़ | दैनिक भास्कर

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