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होम आइसोलेट मरीजों का बुरा हाल: न दवाई न ऑक्सीजन, अपने हाल पर छोड़ रखा है, फोन पर हाल तक नहीं पूछता विभाग

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गुड़गांव6 घंटे पहले

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गुड़गांव. घर में उपचार लेती कोरोना पीड़िता।

  • गुड़गांव में एक्टिव केस 40 हजार से अधिक, 38 हजार से अधिक पेशेंट किए गए हैं होम आइसोलेट

जिला में स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम आइसोलेट किए गए मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि गुड़गांव में 40 हजार एक्टिव केस में से 38 हजार से अधिक पेशेंट होम आइसोलेट किए गए हैं। ऑक्सीजन की व्यवस्था की बात तो दूर मरीजों को दवाईयों के बारे में व काउंसलिंग तक नहीं की जा रही है। ऐसे में अज्ञानता के कारण पेशेंट मुसीबत में पड़ रहे हैं। कई पेशेंट इंटरनेट पर कोरोना ईलाज के बारे में सर्च कर रहे हैं।

हालांकि आशा वर्कर्स को जिम्मेवारी दी गई है, लेकिन वे भी कहीं नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में होम आइसोलेट पेशेंट को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। जिससे कोरोना के चलते जो मरीज घरों में आइसोलेट हैं, उन्हें आक्सीजन की जरूरत पड़ने पर उन्हें दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही हैं।

वैसे तो जिला प्रशासन की ओर से होम आइसोलेट पेशेंट के लिए डाक्टरी सलाह के लिए जूम एप पर कंसलटेंसी कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दवाई गोली के बारे में आशा वर्कर्स द्वारा पूछा तक नहीं जा रहा है। जबकि पॉजिटिव रिपोर्ट मिलने पर पेशेंट को आशा वर्कर्स से दवाई दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन कहीं कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।

घरों में आइसोलेट मरीजों के लिए आक्सीजन स्तर नीचे जाने के कारण अस्पताल में जहां बेड सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं ऐसे मरीजों को उनके परिजनों की तरफ से घरों में ही आइसोलेट कर इलाज दिया जा रहा है, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ा संकट आक्सीजन की आपूर्ति का है।

वहीं डाक्टरों का कहना है कि मरीजों को दिन में चार से पांच बार भाप लेने चाहिए, जिससे स्वत: ही मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 95 फीसदी से अधिक रहेगा। जबकि कोरोना पॉजिटिव मरीजों को पहले हौसला बढ़ाने के लिए काउंसलिंग तक की जा रही थी। लेकिन कहीं भी काउंसलिंग नहीं की जा रही है और पूरी तरह पेशेंट को उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया है।

गुड़गांव में एक्टिव केस 40 हजार से अधिक, 38 हजार से अधिक पेशेंट किए गए हैं होम आइसोलेट

24 घंटे में 3037 नए पेशेंट मिले, 14 की हुुई मौत, 5035 मरीज ठीक हुए

जिला प्रशासन के इमरजेंसी नंबरों पर भी कोई जवाब नहीं देता| मारुति कुंज निवासी राजकुमार का कहना है कि उनके भाई घर में आइसोलेट हैं और आक्सीजन स्तर लगातार नीचे जा रहा है लेकिन कोई भी आक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए तैयार नहीं है। जिला प्रशासन के इमरजेंसी नंबरों पर भी कोई जवाब नहीं देता। यही नहीं पीएचसी भोंडसी की ओर से आशा वर्कर्स को उनके पास जाकर दवाई देने की जिम्मेवारी सौंपी गई है। लेकिन आशा वर्कर्स किसी भी पेशेंट तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

अब तक किसी ने सुध नहीं ली| गुड़गांव निवासी पूर्व प्रोफेसर सुभाष सपड़ा ने बताया कि वह 10 दिन से होम आइसोलेट हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से उनके मोबाइल पर कोई कॉल तक नहीं आया। यहां तक हाल-चाल भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं पूछा जा रहा है। जबकि रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने के बाद कहा गया था कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग सम्पर्क करेगा व आशा वर्कर्स समय-समय पर दवाइयां देंगी। मगर अब तक किसी ने सुध नहीं ली।

गुड़गांव में राहत भरी खबर सामने आ रही है। करीब डेढ़ महीने बाद जिला में नए पॉजिटिव केस मुकाबले ठीक होने वाले पेशेंट का आंकड़ा दो हजार अधिक रहा है। जिला में जहां 24 घंटे में 3037 नए पेशेंट की पहचान हुई, वहीं 5035 पेशेंट रिकवर हो गए, जिससे एक्टिव केस का आंकड़ा दो हजार कम हुआ है। अब जिला में 37244 एक्टिव पेशेंट रह गए हैं। हालांकि 14 पेशेंट की कोरोना से दुखद मौत हो गई। यह एक दिन में मरने वाले पेशेंट का सबसे अधिक आंकड़ा है। इससे पहले गत 30 अप्रैल को भी 14 पेशेंट की मौत हो गई थी।

गुड़गांव में गत 14 मार्च के बाद से लगातार नए पेशेंट रिकवर होने वाले पेशेंट का आंकड़ा बढ़ रहा था। लेकिन इस पर सोमवार राहत रही और एक दिन में सबसे अधिक 5035 पेशेंट रिकवर हो गए, जिससे रिकवरी रेट भी 69 फीसदी से बढ़कर 71 फीसदी हो गया। अब तक जिला में जहां कुल 133679 पॉजिटिव केस मिले हैं, वहीं 95824 पेशेंट रिकवर हो चुके हैं। जिनमें से 37244 पेशेंट एक्टिव हैं और 2666 पेशेंट अस्पतालों में एडमिट किए गए हैं।

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