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हौसला को सलाम: 20 मजदूर 24 घंटे में बारी-बारी एक घंटे सोकर 300 की जगह अब रोज 1000 सिलेंडर में भर रहे ऑक्सीजन

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अंबिकापुर27 मिनट पहले

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  • 24 घंटे काम से 20 में से 5 श्रमिकाें की तबीयत बिगड़ी, मांग के 3 दिन बाद तहसीलदार ने भेजे 10 श्रमिक, वे भी अप्रशिक्षित
  • प्लांट के श्रमिक बोले- ऑक्सीजन के अभाव में मौतों से नहीं आ रही नींद
  • सरगुजा संभाग के 3 जिले में कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन देने सूरजपुर के नयनपुर प्लांट में यूपी- बिहार के मजदूर भर रहे गैस

सरगुजा संभाग के 3 जिलों के लिए प्लांट में सिलेंडर में ऑक्सीजन भर रहे यूपी और बिहार के 20 श्रमिकों का जज्बा देख कोरोना की मात तय है। क्यों यह 20 मजदूर जहां पहले एक दिन में सिर्फ 300 सिलेंडर में ऑक्सीजन भर रहे थे। वहीं आक्सीजन से लोगों की मौतों की खबर सुनकर 24 घंटे में बारी-बारी से सिर्फ एक-एक घंटे सोकर रोज 1000 सिलेंडर में आक्सीजन भर रहे हैं।

प्लांट में काम कर रहे श्रमिकों का कहना है कि ऑक्सीजन के अभाव में लोगों की मौत होने की खबर सुनकर उन्हें नींद नहीं आ रही है। वहीं लगातार काम करने के बाद शरीर भी जवाब दे रहा है, इसके बाद भी काम करने का हौसला कायम है। इसके चलते 20 में से 5 श्रमिकों की तबीयत खराब हो गई है। यही नहीं प्लांट के मालिक अंजनी सिंघल भी मजदूरों के अभाव में खुद एक सप्ताह से रात में बिना सोए आक्सीजन उत्पादन में लगे हैं। उनका कहना है कि यहां प्रशिक्षित लेबर ही प्लांट में ऑक्सीजन उत्पादन कर सकते हैं। बता दें कि सरगुजा संभाग में एक मात्र ऑक्सीजन प्लांट सूरजपुर के नयनपुर में है। यहां पहले एक दिन में 300 सिलेंडर में आक्सीजन भरी जाती थी।

प्रशिक्षित मजदूरों से ही सुचारू ऑक्सीजन उत्पादन हो सकेगा

प्लांट के मालिक अंजनी ने अंबिकापुर कलेक्टर से लेबर मुहैया कराने कहा, लेकिन तीन दिन से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। बुधवार को मजदूरों ने एक घंटे के लिए भरे सिलेंडरों को वाहनों में लोड करना बंद कर दिया। इसकी जानकारी सिंघल ने सूरजपुर तहसीलदार को दी। उन्होंने दूसरे दिन मजदूर उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। इसके बाद ऑक्सीजन का ट्रांसपोर्ट शुरू हुआ। वहीं गुरुवार को 10 मजदूर भेजे गए हैं, इससे राहत मिली है, लेकिन सिंघल का कहना है कि उन्हें और प्रशिक्षित मजदूर चाहिए, तभी आक्सीजन उत्पादन सुचारू रूप से हो सकेगा।

खाली सिलेंडरों की भी कमी, सहयोग की अपील

प्लांट के मालिक सिंघल ने बताया कि उनके पास मात्र 2500 सिलेंडर हैंं जो कम पड़ रहे हैं। उन्हें और खाली सिलेंडर की जरूरत है, क्योंकि उन्हें भविष्य में ऑक्सीजन उत्पादन प्रतिदिन 15 सौ तक करना पड़ा तो कम से कम उनके पास 4000 सिलेंडर होने चाहिए। बताया कि एक तरफ सिलेंडर यहां भरे जाते हैं तो दूसरी तरफ आधे सिलेंडर अस्पताल में ट्रांसपोर्ट में होते है, इसके कारण सिलेंडर और बढ़ाने होंगे।

ऑक्सीजन उत्पादन में लगे कर्मी ही कर रहे सिलेंडर लोड अनलोड

बता दें कि जो 15 प्रशिक्षित मजदूर ऑक्सीजन उत्पादन में लगे हैं। अब उन्हें मजदूर के कंधों पर सिलेंडरों में ऑक्सीजन भरने के बाद वाहन में लोड कर भेजने की जिम्मेदारी आ गई है। वहीं अस्पताल में वे सीधे ऑक्सीजन सिलेंडर भेजते हैं तो वहां भी लोड अनलोड करने लेबर भेजने पड़ रहे हैं। जबकि कई बार अस्पतालों का कहा गया था कि वाहन में खाली सिलेंडर लोड कराकर रीफिलिंग सिलेंडर उतार लें, ताकि प्लांट से उन श्रमिकों का न भेजना पड़े जो आक्सीजन उत्पादन में लगे हैं।

दो प्लांट से 2000 सिलेंडर भरने की क्षमता, लेकिन लेबर व सिलेंडर नहीं

सिंघल ने आरोप लगाया है कि कुछ अस्पताल प्रबंधक उनके कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। लेबर की कमी होने के बाद भी अंबिकापुर में एक सेंटर शुरू किया है। जहां से अंबिकापुर के अस्पताल ऑक्सीजन ले जा सकते हैं। लेकिन वहां उनके कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना हो चुकी है। उन्होंने थाने में भी शिकायत की है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन का भविष्य में सहयोग पूरी तरह से नहीं मिला और लेबर नहीं मिले तो उत्पादन बढ़ाना मुश्किल हो जायेगा। जबकि नयनपुर में सिंघल के दो आक्सीजन प्लांट हैं। जहां से 24 घंटे में अधिकतम दो हजार सिलेंडर आक्सीजन उत्पादन किया जा सकता है।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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