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3-4 माेबाइल रखता था पंकज,: उनमें अफसर-नेताओं के नाम से फोन नंबर सेव थे, काम बताते ही संबंधित से चैटिंग कर लाेगाें काे जाल में फांस लेता था

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  • Phone Numbers Were Saved In The Names Of Officers And Leaders, As Soon As They Told The Work, They Would Get Caught In The Trap After Chatting With The Concerned.

सागर2 घंटे पहले

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गोपालगंज थाने में पंकज प्रजापति।

  • पुलिस ने किया गिरफ्तार, घर की तलाशी भी ली

कथित पत्रकारिता की आड़ में जालसाजी करने वाले पंकज प्रजापति ने कई लाेगाें काे अपने जाल में फांसकर उनसे लाखाें रुपए ऐंठे। अब तक 4 लाेग उसके खिलाफ सिविल लाइन, माेतीनगर व गाेपालगंज थाने में एफआईआर दर्ज करा चुके हैं।

भास्कर ने ठगी के शिकार लाेगाें से बात की ताे पता चला कि पंकज के पास 3-4 माेबाइल थे। वह जितना शातिर है, उसे टैक्नालाॅजी का उतना अधिक ज्ञान है। संभवत: कुलपति, अफसर, नेताओं के नाम से अपने दूसरे माेबाइल में नंबर सेव करके रखे हुए था।

जैसे ही किसी से बात करने काे कहाे ताे तत्काल उनसे चैटिंग करने लगता था। सामने से जवाब भी आ जाता था। जिससे लाेग उसके झांसे में आते रहे। लग्जरी कार, नई-नई बुलेट, बाइक का शाैक और उसकी लाइफ स्टाइल देखकर लाेगाें काे उस पर पहले से ही संदेह था। रात में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके घर की भी तलाशी ली। फिलहाल उसे गोपालगंज थाने में रखा गया है।

केस-1 – कुलपति भवन घुमाकर लाया, चैटिंग दिखाई

दयानंद वार्ड निवासी प्राइवेट काॅन्ट्रैक्टर माेहित जैन ने बताया कि मैंने अपनी पत्नी शिवांगी की विवि में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर भर्ती के लिए उससे बात की ताे वह एक दिन मुझे कुलपति भवन ले गया। मुझे बाहर खड़ा करके बाेला मैं, बात करके आता हूं। लाैटकर अाया अाैर कहा बात हाे गई है। 7 लाख रुपए लगेंगे। एक दिन उसने अपने माेबाइल से वीसी काे नाैकरी के संबंध में मैसेज भेजा। सामने से हां में जवाब भी आ गया ताे मुझे लगा कि मेरा काम हाे जाएगा।

केस- 2 – भाजपा नेता से कहा: काेई भी काम करा दूंगा

ठगी के शिकार पोद्दार काॅलोनी निवासी भाजपा नेता राहुल रजक ने बताया पंकज ने मुझसे कहा था कोई भी काम हो मैं करा सकता हूं। मेरे एक परिजन अजय रजक के पिता अशाेक कुमार रजक एफसीआई में दफ्तरी के पद पर थे। उनके निधन के बाद अजय काे अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पा रही थी। मैंने पंकज से इस संबंध में चर्चा की ताे वह तत्काल तैयार हाे गया। उसने कहा कि 40 हजार रुपए लगेंगे। उसने मुझसे 20 हजार रुपए एडवांस ले भी लिए। इसके 6 माह तक वह मुझे घुमाता रहा।

केस- 3 -निगमायुक्त से टेंडर दिलाने का झांसा दिया

गाेपालगंज निवासी संचित शुक्ला ने बताया पंकज ने मुझसे कहा कि मेरी निगम कमिश्नर से अच्छी पहचान है। वह मेरी बात नहीं टाल सकते। निगम ताे क्या स्मार्ट सिटी के भी काम दिला सकता हूं। बताअाे काैन सा टेंडर चाहिए। उसने मुझे नगर निगम से सीधा टेंडर दिलाने के लिए 50 हजार रुपयाें की मांग की थी। इसमें से मैंने 35 हजार रुपए दे दिए थे। एक रेस्टोरेंट के पास मेरे दाेस्त शुभम नामदेव एवं देशराज यादव के सामने मैंने उसे रुपए दे दिए।

केस- 4 – ट्रांसफर कराने आईजी के नाम पर मांगे 1 लाख

तुलसीनगर निवासी निखिल अहिरवार ने बताया मेरी पंकज प्रजापति ने मुझसे कहा कि किसी भी विभाग का काम हाे मैं करा सकता हूं। पुलिस विभाग में पदस्थ मेरे पारिवारिक सदस्य के ट्रांसफर के संबंध में मेरी उससे चर्चा हुई थी। पंकज ने कहा कि मेरे आईजी साहब से अच्छे संबंध हैं। उसने माेबाइल पर चैटिंग की। पंकज कहने लगा कि मेरी 1 लाख की बात हुई। मैंने उसकी बाताें में अाकर 95 हजार रुपए दे भी दिए। जो उसने आज तक नहीं लौटाए।

केस- 5 – मां की बीमारी के बहाने जिलाध्यक्ष से लिए पैसे

भाजयुमाे जिलाध्यक्ष अर्पित पांडेय भी ठगी के शिकार हुए थे। पंकज प्रजापति के कारनामे सामने आने के बाद उन्हाेंने भास्कर काे बताया कि एक दिन पंकज मेरे पासा अाया। उसने मुझसे 10 हजार रुपए मांगे। मैंने रुपए देने में अनाकानी की ताे उसने कहा कि मां बीमार है। इलाज के लिए रुपयाें की सख्त जरुरत है। मैंने उसकी बाताें में अाकर रुपए दे दिए। हालांकि इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।

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मध्य प्रदेश | दैनिक भास्कर

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