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अच्छी पहल: निशुल्क इलाज के लिए दूसरे राज्यों के कोरोना मरीज भी पहुंच रहे जैनम… एक माह में 115 स्वस्थ होकर घर लौटे

रायपुरएक घंटा पहले

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अस्पताल के बाहर गार्डन में योेग भी करवा रहे है जिससे मरीज को स्वस्थ होने में मदद मिले।

  • पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं और घर जैसा माहौल इसलिए यहां रिकवरी रेट भी अच्छा
  • आईसीयू, वेंटीलेटर जैसी सुविधाओं वाला इकलौता सामाजिक अस्पताल

नवा रायपुर में जैनम कोविड अस्पताल खुले एक माह पूरे हो चुके हैं। आईसीयू और वेंटीलेटर बेड जैसी सुविधाओं वाले इस सामाजिक अस्पताल की खास बात यह भी कि यहां कैश काउंटर कहीं नहीं है। मरीजों के इलाज का पूरा खर्च जैन समाज ही उठा रहा है। छत्तीसगढ़ के अलावा आसपास के राज्यों से भी मरीज यहां इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

5 मई से अब तक करीब 150 मरीजों को जैनम कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 115 स्वस्थ होकर घर भी लौट चुके हैं, वहीं 29 का इलाज अब भी जारी है। महेंद्र धाड़ीवाल ने बताया, प्रदेश के सुदूर इलाकों के अलावा ओडिशा और झारखंड से भी कोरोना मरीज इलाज के लिए जैनम अस्पताल पहुंचे। इनमें बहुत से ऐसे भी थे जिनकी सीटी स्कोरिंग 18 से 20 तक पहुंच गई थी। ऑक्सीजन लेवल भी 70-75 से नीचे था। डॉक्टरों की देखरेख में अब ज्यादातर मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। उन्होंने कहा, हम अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए मरीजो को घर जैसा माहौल देने की कोशिश करते हैं। इन्हीं प्रयासों के चलते यहां रिकवरी रेट भी बहुत अच्छा है।

100 से ज्यादा स्टाफ के भी रहने का इंतजाम, ताकि इमरजेंसी में न बिगड़ें हालात
पंकज चोपड़ा और अतुल जैन ने बताया कि जैनम मानस भवन के एक विंग में कोविड अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। ग्राउंड फ्लोर पर मरीजों के लिए आईसीयू, वेंटीलेटर बेड, ऑक्सीजन बेड लगाए गए हैं। तीसरे फ्लोर पर मेडिकल स्टाफ के रहने की व्यवस्था की है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि 100 से अधिक मेडिकल स्टाफ मरीजों की देखरेख के लिए 24 घंटे अस्पताल में ही मौजूद रहता है। किसी तरह की इमरजेंसी आए तो मरीज को फौरी मदद मिल जाती है। लगातार हम परिजनों के संपर्क में भी रहते हैं और उन्हें हेल्थ अपडेट देते रहते हैं। इसके अलावा मरीजों को लाने-ले जाने के लिए 4 एंबुलेंस की व्यवस्था की है। सैंपल लेने के लिए एक लैब भी बनाया है।

विदेशों में बस चुके लोग भी अपनों की मदद करने आगे आए
जैनम कोविड अस्पताल का संचालन करने में लाखों रुपए का खर्च आ रहा है। जैन समाज द्वारा किए जा रहे इस पुनीत कार्य में और भी कई समाजों ने हाथ बटाया है। सालों पहले दूसरे देशों में जा बसे शहर के लोग भी मदद के लिए आगे आए हैं। किसी ने मेडिकल स्टाफ के लिए पीपीई किट उपलब्ध कराई तो कोई मरीजों के लिए दवाएं उपलब्ध करवा रहा है। अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर जैसे कई देशों में रह रहे कई एनआरआई सहयोग के लिए आगे आए हैं और उन्होंने आगे भी इसी तरह मदद करते रहने का भरोसा दिलाया है।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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