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अब कदमों में होंगी खुशियां: गरियाबंद की गीता के पैरों के पंजे नहीं, गिलास लगाकर चलती है; CM बघेल करवाएंगे इलाज, नया घर भी मिलेगा

रायपुर35 मिनट पहले

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इसी तरह गिलास में पैर डालकर गीता चलती है घर का काम भी करती है।

गरियाबंद जिले छुरा की रहने वाली 11 साल की गीता के पैरों के पंजे नहीं है। अपनी मासूमियत से इस मुश्किल को हराने के लिए बच्चे ने पानी पीने के काम में आने वाले स्टील के गिलास पैर में फँसा लिए। अब इसी के सहारे चलती है। दैनिक भास्कर ने जब इस बच्ची की खबर दिखाई तो अब सरकार भी गीता की मदद को आगे आई है। अब राज्य की सरकार गीता के परिवार को घर देने, बच्ची को इलेक्ट्रिक साइकिल देने और पैरों का इलाज करवाने का जिम्मा लेने जा रही है।

बच्ची के मन में खुद के पैरों का दर्द दूर करने के लिए ये आइडिया आया।

बच्ची के मन में खुद के पैरों का दर्द दूर करने के लिए ये आइडिया आया।

सांसद विवेक तन्खा ने की पहल
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट को साझा करते हुए राज्य सरकार से इस बच्ची को मदद देने को कहा। सांसद विवेक के तंखा और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता और प्रदेश कांग्रेस विधि के अध्यक्ष संदीप दुबे ने भी दैनिक भास्कर की रिपोर्ट को साझा किया। अब इनके आग्रह पर मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने कार्रवाई करते हुए गरियाबंद कलेक्टर को निर्देश दिए हैं। अब गीता को तुरंत इलेक्ट्रॉनिक साईकल एवं प्रधानमंत्री आवास से उसके माता- पिता को आवास उपलब्ध करवाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने ये भी निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ विभाग रायपुर की टीम तुरंत गीता की आवश्यक मेडिकल जांच के लिए उसके गांव जाएगी। ये जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री के दफ्तर भेजी जाएगी। ताकि गीता के पैरों का इलाज हो सके और वो खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सके। गीता के इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

पैरों से बहता था खून तो बच्ची ने किया जुगाड़
11 साल की गीता के बचपन से ही दोनों पैरों के पंजे नहीं हैं। बिना पंजों के चलने की वजह से उसे कंकड़ गड़ जाया करते थे। पैरों से कई बार खून निकल आता था। माता-पिता की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं कि वो बेटी का इलाज करवा सकें। आखिरकार बेटी ने खुद ही एक जुगाड़ ढूंढा और अपने पैरों में गिलास लगाकर चलने लगी।

बच्ची के पैरों का अब इलाज करवाया जाएगा।

बच्ची के पैरों का अब इलाज करवाया जाएगा।

गीता के पिता देवीराम गोंड और उसकी मां दोनों सुबह से ही मजदूरी करने चले जाते हैं। गीता रोज चुपचाप गिलास में पैर डालकर चलने की प्रैक्टिस करती थी। एक दिन जब शाम को माता-पिता घर आए, तो वह दौड़कर अपने पिता के गले लग गई। उसके पिता की भी आंखें भर आई। बेटी की ये कोशिश उन्हें खुशी भी दे रही थी। बच्ची का परिवार चाहता है कि गीता का इलाज ठीक तरह से हो जाए ताकि वो भी अपने कदम कामयाबी के रास्ते पर बढ़ा सके।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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