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अमरीश पुरी की बर्थ एनिवर्सरी: मुंहमांगी फीस ने मिलने पर फिल्म छोड़ देते थे अमरीश पुरी, अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे ताकि वो फिल्मों में ज्यादा सुनाई दे

31 मिनट पहले

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गुजरे जमाने के फेमस विलेन अमरीश पुरी की आज (22 जून को) 89वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस मौके पर उनकी जिंदगी के कुछ किस्सों पर नजर डालते हैं। मसलन,अमरीश पुरी की आदत थी कि वो वीडियो-ऑडियो इंटरव्यू नहीं देते थे। कई मौकों पर उनकी फुटेज दिखती भी है तो वो शूटिंग के दौरान की है। अखबारों या मैगजीन को इंटरव्यू देते वक्त भी वो अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे। वो ऐसा इसलिए करते थे ताकि लोग उनकी आवाज को ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में ही सुनें। इंटरव्यू लेने वाले से वो साफ कह देते थे कि प्लीज, अपना रिकॉर्डर बंद कर लीजिए। जब मैगजीन से उन्हें इंटरव्यू के लिए फोन आता था, तो वो कहते थे कि अगर कवर स्टोरी में जगह मिलेगी तभी इंटरव्यू दूंगा।

मुंहमांगी फीस नहीं मिली तो अमरीश ने छोड़ दी थी फिल्म

निगेटिव रोल से शुरुआत करने वाले अमरीश पुरी ने 90 के दशक में पॉजिटिव के किरदार निभाने शुरू किए थे। उनका कद काफी बढ़ चुका था और कई बार ऐसा भी होता था कि मुंहमांगी फीस न मिलने पर वो फिल्म छोड़ दिया करते थे। 1998 के एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र है कि एन. एन. सिप्पी की एक फिल्म उन्होंने सिर्फ इसलिए छोड़ दी थी, क्योंकि उन्हें मांग के मुताबिक 80 लाख रुपए नहीं दिए जा रहे थे।

अमरीश ने साफ कहा था- पैसे नहीं तो फिल्म नहीं

अमरीश ने इंटरव्यू में कहा, “जो मेरा हक है, वो मुझे मिलना चाहिए। मैं एक्टिंग के साथ कोई समझौता नहीं करता। तो फिल्म के लिए कम पैसा स्वीकार क्यों करूं। लोग मेरी एक्टिंग देखने आते हैं। प्रोड्यूसर्स को पैसा मिलता है, क्योंकि मैं फिल्म में होता हूं। तो क्या प्रोड्यूसर्स से मेरा चार्ज करना गलत है? जहां तक सिप्पी की फिल्म की बात है तो वह मैंने बहुत पहले साइन की थी। वादा था कि साल के अंत में फिल्म शुरू होगी। लेकिन तीन साल बीत चुके हैं। मार्केट का भाव बढ़ गया है। अगर वो मुझे उतना पैसा नहीं दे सकते तो मैं उनकी फिल्म नहीं कर सकता।”

मशहूर फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने एक इंटरव्यू में बताया था, “एक बार हमारे एक दोस्त और उसकी फैमिली का एक्सीडेंट हो गया। पत्नी सरवाइव कर गई, लेकिन दोस्त और उसका बेटा क्रिटिकल थे। हॉस्पिटल में उनके लिए रेयर ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़ी, जो कि अमरीश का ग्रुप भी था। हमारे उस दोस्त से उनका कोई परिचय नहीं था। बावजूद इसके वो अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर्स से बोले, ‘मैं ब्लड देना चाहता हूं, जितनी जरूरत हो ले लीजिए।’ दुर्भाग्य से दोस्त और उसका बेटा बचे नहीं। लेकिन बिना किसी के कहे अमरीश का ब्लड देना मुझे आज भी याद है।”

श्याम बेनेगल के मुताबिक सत्यदेव दुबे के थिएटर ग्रुप में वो अमरीश से पहली बार मिले थे। तब अमरीश लाइफ इंश्योरेंस एजेंट भी थे और मोटरसाइकिल से इधर-उधर घूमा करते थे। बेनेगल ने बताया था कि अपनी पहली फिल्म अंकुर के लिए उन्होंने एक एक्टर को कास्ट किया, जिसके लुक्स अच्छे थे लेकिन वह प्रॉपर तरीके से डायलॉग नहीं बोल सकता था।

वो कहते हैं, “तब मैंने उस लड़के लिए अमरीश से डब कराया। लेकिन बाद में अहसास हुआ कि मैं ये क्यों कर रहा हूं। इसलिए जब मैंने अपनी अगली फिल्म निशांत बनाई तो अमरीश पुरी को रोल ऑफर कर दिया।” बेनेगल के मुताबिक, निशांत में अमरीश का काम लोगों को पसंद आया और वो पॉपुलर हो गए।

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