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इलाज शुरू: ओपीडी शुरू हुई तो टाइफाइड, डायरिया और मलेरिया के रोज आ रहे 150 मरीज

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सूरतएक घंटा पहले

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  • मौजूदा समय में सिविल और स्मीमेर अस्पताल में 80 से अधिक मरीज भर्ती है
  • सिविल-स्मीमेर में रोजाना 100 मरीजों का ब्लड टेस्ट कराया जा रहा है

कोरोना के मामले कम होते ही अन्य बीमारियां सामने आने लगी है। यूं कहें कि बीमारियां थी लेकिन डॉक्टर जांच ही नहीं करवा रहे थे। अब जब जांच करवा (लिख) रहे हैं, तब मलेरिया, टाइफाइड और डायरिया के मामले सामने आने लगे हैं। सिविल और स्मीमेर अस्पताल में इस समय ओपीडी में 1000 से 1200 मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

इसमें से करीब 150 से अधिक मरीजों को इन बीमारियों का लक्षण मिलने के बाद उनको एडमिट किया जा रहा है। इस समय सिविल और स्मीमेर अस्पताल में 80 से अधिक मरीज टाइफाइड, मलेरिया और डायरिया के भर्ती हैं। सिविल अस्पताल में करीब 12 दिनों से एक मीटिंग में ओपीडी चल रहा है। अस्पताल में रोजाना 400 से 500 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे है। जिसमें से करीब 50 से 60 मरीज टायफायड, डायरिया और मलेरिया के संदिग्ध भर्ती हो रहे है।

सिविल में जिस दिन सामान्य ओपीडी का पहला दिन था उस दिन मात्र 35 मरीज एडमिट किए गए थे। अब रोजाना 60 से 80 मरीज एडमिट होने लगे हैं। वहीं स्मीमेर अस्पताल में भी रोजाना 70 से 80 सस्पेक्टेड मरीज मिल रहे है। जिनमें सामान्य बुखार, मलेरिया, डायरिया और टाइफाइड लक्षण मिलने की पुष्टि हुई है। दोनों ही अस्पतालों में रोजाना 100 से अधिक मरीजों का ब्लड टेस्ट करवाया जा रहा है।

मार्च में कोरोना के मामले बढ़ने पर अस्पताल में पूरी तरह से ओपीडी बंद कर दी गई थी। सिविल अस्पताल को डेडिकेटेड कोरोना अस्पताल बना दिया गया था। स्टेम सेल, ओल्ड बिल्डिंग और किडनी अस्पताल में कोरोना के मरीज भर्ती होने लगे।

ओपीडी बेस पर भी हो रहा इलाज

डॉक्टरों का कहना है कि अब जो मरीज आ रहे है उनकी शिकायत है कि उन्हें बुखार आता है, ठंडी लगती है, पेट दर्द होता है। सीजनल बीमारी के हिसाब से ब्लड टेस्ट की जांच करवा रहे हैं। जो मरीज स्टेबल हैं उन्हें ओपीडी बेस पर ही दवाई देकर घर भेज रहे है। जिनकी स्थिति स्टेबल नहीं है ऐसे मरीजों को ही एडमिट किया जा रहा है। हालांकि सभी मरीज मेडिसिन विभाग में ही एडमिट किए जा रहे हैं।

ट्रीटमेंट: पोस्ट कोविड मरीज भी इलाज के लिए ओपीडी में आ रहे हैं

अस्पताल में पोस्ट कोविड मरीज भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। सीने में दर्द, सांस की समस्या, जोड़ो में दर्द, हल्का बुखार, सर दर्द जैसी समस्या के साथ आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अभी यह कहना ठीक नहीं है कि पोस्ट कोविड वाले मरीज भी सीजनल बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। लेकिन दो हफ्ते पहले हुई बारिश के बाद मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आगामी दिनों में मानसून आएगा इसके बाद मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और डायरिया के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा। इसमें पोस्ट कोविड वाले मरीज भी चपेट में आ जाएंगे।

कोरोना जब पीक पर था तब जांच नहीं हो रहा थी

कोरोना के समय सामान्य बीमारी के मरीजों का इलाज बंद था, इसलिए इसके मरीज भी नहीं मिल रहे थे। जैसे ही कोरोना के मामले कम हुए सामान्य बीमारी के मरीज आने लगे। कोरोना जब पीक पर था तब डॉक्टर समान्य बीमारी की जांच के लिए लिख ही नहीं रहे थे। डॉक्टर और पूरा मेडिकल स्टाफ कोरोना के इलाज में लगा था। इसलिए इन बीमारियों का इलाज अस्पतालों में ठप था।

मनपा एक सप्ताह में पूरे शहर का सर्वे करा रही

मनपा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेपी वागडिया ने बताया कि कोरोना के साथ-साथ हमारी टीम डेंगू और मलेरिया की भी जांच कर रही है। इसके लिए 2800 लोगों की टीम लगाई गई हैं, जो एक हफ्ते में पूरे शहर को कवर कर लेती है। फिलहाल अभी तो डेंगू मलेरिया के केस नहीं आ रहे हैं।

अभी 60 से 80 मरीज भर्ती किए जा रहे है। यह वह मरीज है जो स्टेबल नहीं है उन्हें एडमिट करना जरूरी है। इनमें डायरिया, टाइफाइड के मामले अभी ज्यादा देखे जा रहे है। फिलहाल आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या और बढ़ेगी अभी हम एक ही टाइम ओपीडी चला रहे हैं। – डॉ. धारित्री परमार, एडिशनल सुपरिटेंडेंट, सिविल अस्पताल

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