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ईको फ्रेंडली होगा तैयार शवदाह गृह: पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा; पहाड़गंज श्मशान घाट पर ट्रायल सफल, रखरखाव और मरम्मत के लिए जारी होगी निविदा

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अजमेर30 मिनट पहले

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बिजली शवदाह गृह तैयार।

अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पहाड़गंज श्मशान घाट पर बिजली शवदाह गृह बनकर तैयार हो गया है। इसे पूरी तरह से ईको फैंडली बनाया गया है। इसके उपयोग में आने के बाद पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और आस-पास का वातावरण भी शुद्ध रहेगा। इसका ट्रायल किया गया, जो पूरी तरह से सफल रहा है। उल्लेखनीय है कि ऋषि घाटी स्थित श्मशान घाट पर गैस शवदाह गृह तैयार किया जा चुका है और उपयोग में लाया जा रहा है।

पहाड़गंज स्थित श्मशान घाट पर 6 गुणा 12 मीटर क्षेत्रफल में इलेक्ट्रिक फर्नीश विद्युत शवदाह गृह बनाया गया है। यहां पर 2.4 मीटर चौड़ाई एवं 3.5 मीटर लंबाई का प्लेटफार्म तैयार किया गया है। अंतिम संस्कार में तापमान नियंत्रण के लिए रेग्यूलेट कंट्रोल का पैनल लगाया गया है। 650 डिग्री सेल्सियस पर एक घंटे के भीतर शव का अंतिम संस्कार हो सकेगा। शवदाहगृह के संचालन के लिए थ्री फेस बिजली कनेक्शन के लिया गया है।

एक शव के अंतिम संस्कार में करीब 1.30 से 2 घंटे का समय लगेगा। शवदाह गृह में विद्युत भट्टी लगाने के साथ ही सफाई के लिए पानी की व्यवस्था भी की गई है। यहां पर बोरिंग किया गया है। प्रत्येक संस्कार के बाद शव स्थल की पानी से धुलाई करने की व्यवस्था रहेगी। इसके ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए निविदा जारी की जाएगी। एक सुरक्षा गार्ड होगा और दो व्यक्ति इसका संचालन करेंगे।

बिजली शव दाह गृह तैयार।

बिजली शव दाह गृह तैयार।

चिमनी से धुआं ऊपर जाएगा
बिजली शवदाह गृह में एक चिमनी बनाई गई है। जिससे शव के जलने पर धुआं आसपास नीचे की तरफ नहीं फैलेगा, बल्कि चिमनी के माध्यम से ऊपर चला जाएगा। श्मशान स्थल को हरा-भरा रखा जाएगा। श्मशान स्थल पर गार्डन विकसित किया जाएगा, यहां पर लगभग 60 से 65 पेड़ लगाए जाएंगे।

यह फायदा होगा
शव की चिता बनाने में लकड़ी का उपयोग होता है, इसमें कम से कम दो से तीन हजार रुपये खर्च आता है लेकिन बिजली शवदाह गृह बन जाने के बाद शव के अंतिम संस्कार में काफी कम खर्च आएगा। इससे पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगेगा। पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए बिजली शवदाह गृह कारगर साबित होगा। दाह संस्कार के लिए पेड़ों की कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए नवीन पहल होगी।

सामान्य तौर पर एक दाह संस्कार में तीन वृक्षों की लकडियां जल जाती है। बिजली शवदाह गृह से अंतिम संस्कार कराकर अनगिनत पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है। पेड़ पर्यावरण संरक्षण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इन्हें संरक्षित करने के लिए बिजली शवदाह का विकल्प अपनाना होगा। पारंपरिक पद्धति से दाह संस्कार में करीब तीन क्विंटल लकड़ी लगती है और वातावरण में कॉर्बन डाईऑक्साइड फैलता है।

बिजली शवदाह गृह में अंतिम संस्कार के दौरान हवा प्रदूषित होने का खतरा काफी कम होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक विद्युत शवदाह गृह स्क्रबर टेक्नोलॉजी से लैस होता है, जो अंतिम संस्कार के दौरान निकलने वाली खतरनाक गैस और बॉडी के बर्न पार्टिकल को सोख लेता है। विद्युत शवदाह तुलनात्मक रूप से कम खर्चीला होता है।

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राजस्थान | दैनिक भास्कर

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