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एप्प बताएगी हिमाचल में कहा हुआ भूस्खलन: एनआईटी हमीरपुर तैयार कर रहा एप्प, भू-स्खलन के बाद राहत और बचाव कार्य करने वाली एजेंसी को जाएगी तुरंत सूचना, शामित होंगे एडवांस फीचर

हमीरपुर15 मिनट पहले

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एनआईटी हमीरपुर तैयार करेगा एप्प।

सोशल मीडिया में सूचनाओं के तीव्र प्रवाह के दौर में सही सूचनाएं प्राप्त करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। खासकर आपदाओं के समय में अफवाहें अधिक फैलती हैं। ऐसे में लोगों तक सही सूचना पहुंचना सरकार और प्रशासन के लिए मुश्किल साबित होता है। इसी समस्या के समाधान के लिए प्रदेश में अब भू-स्खलनइ और अन्य आपदाओं का रियल टाइम डाटा एकत्र करने के लिए एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञ एप्प तैयार करेंगे। स्मार्ट फोन की उपलब्धतता को देखते हुए एनआईटी हमीरपुर ने यह निर्णय लिया है। हालांकि हिमाचल प्रदेश सरकार की एंजेसी कॉउसिंल फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एनवायरमेंट की तरफ से यह प्रोजेक्ट एनआइटी हमीरपुर को सौंपा गया है। इस शोध कार्य पर लाखों रूपये खर्च किए जाएंगे।

इस एप्प के माध्यम से डाटा एकत्र कर वार्निंग सिस्टम आगामी दिनों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के आधार पर किया जा सकेगा। एप्प में ऐसे फीचर भी शामिल किए जाएंगे जिससे कि आगामी दिनों में सेटलाइट डाटा के आधार पर एरिया की मैपिंग होगी। भू-स्खलन होने पर सेटलाइट इमेज के आधार पर इसके कारणों का शोध भी संभव हो सकेगा। यह एप्प भू-स्खलन होने पर तुरंत राहत और बचाव कार्य करने वाली एंजेसियों को सूचना देगी। इस एप्प को इस हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है कि पर्यटक और आम लोगों को यह जानकारी मिल सके कि भू-स्खलन के कारण किस एरिया में कौन सी सड़क बाधित है और उनके पास कौन सा वैकल्पिक मार्ग मौजूद है। सिटीजन अथवा मॉडर्न साइंस के आधार पर इस शोध कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस एप्प को महज भू-स्खलन के अपडेट तक सीमित न रखकर अन्य आपदाओं के डाटा को शामिल करने की संभावनाओं को खुला रखा जाएगा।

बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए होगी लभादायक।

बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए होगी लभादायक।

बरसात में हिमाचल में बाधित रहती हैं सड़के, पर्यटक होते हैं परेशान
बरसात में अकसर हिमाचल में भू-स्खलन के कारण सड़क बाधित रहती है। इस दौरान अपुष्ट सूचनाएं लगातार सोशल मीडिया पर फैलती हैं लेकिन कोई आधिाकारिक अथवा सही सूचना न मिलने के कारण खासकर प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को खासी दिक्कत पेश आती है। इसके अलावा वह लोग भी परेशान होते हैं जो अनजान क्षेत्रों में यात्रा कर रहे होते है। राहत एवं बचाव कार्य करने वाली एंजेसियों को तो यह एप्प अलर्ट देगी साथ ही आम लोगों को सही जानकारी पहुंचाने का एक जरिया भी बनेगी।

जाम की मिलेगी जानकारी, वैकल्पिक मार्गों का भी होगा ब्यौरा
इस एप्प के जरिये भू-स्खलन के बाद लगने वाले जाम और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचेगी। कई दफा जाम में एंबुलेंस फंस जाती है और इससे मरीजों की जान पर भी बन आती है। ऐसे में यह एप्प न सिर्फ जाम लगने का अलर्ट देगी बल्कि वैकल्पिक मार्गों भी उपलब्ण्ध करवाने में मददगार साबित होगी। इसके अलावा जाम को बहाल करने के जो एंजेसियां कार्य करती है उनकों भी एप्प से तुरंत रियल टाइम अपडेट मिलेगा।

प्रो. डॉ.चंद्र प्रकाश।

प्रो. डॉ.चंद्र प्रकाश।

भू-स्खलन की घटनाओं की स्टडी भी होगी संभव
हिमाचल में बरसात ही अन्य मौसमों में होने वाले भू-स्खलनों की जानकारी उपलब्ध हो पाएगी। इससे भू-स्खलनों के कारणों की स्टडी करने में विशेषज्ञो को मदद मिलेगी। इस एप्प में रियल टाइम डाटा के आधार पर लोकेशन की स्टडी होगी। डाटा एकत्र होने के बाद यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में किस समय घटनाएं सामने आ आ रही है। इससे एक तरफ जहां अलर्ट मिलेगा तो दूसरी ओर एक डाटा तैयार होगा जोकि बाद में विभिन्न शोध में मददगार भी साबित होगा।

एनआईटी हमीरपुर के सिविल विभाग के प्रो डा चंद्र प्रकाश का कहना है कि हिमाचल प्रदेश कॉउसिंल फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एनवायरमेंट की तरफ से यह प्रोजेक्ट मिला है। इसमें वह अपनी टीम के साथ मिलकर कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि इस एप्प को बनाने के पीछे सोच यह है कि लोगों को रियल टाइम अपडेट मिले और लोग अफवाहों के जंजाल में फंसने के बजाय सही सूचनाओं से अवगत हो सकें। अलर्ट सिस्टम के साथ ही इस एप्प में लोगों की तरफ से भी अपडेट दिए जाने फीचर शामिल किया जाएगा। संबंधित एंजेसिया इन अपडेट पर चेक रखेंगी और इस रियल टाइम अपडेट से राहत और बचाव कार्य भी गति मिलेगी।

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