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ऑक्सीजन के अभाव में मर रहीं मछलियां: जिस तालाब का जीर्णोद्धार CM ने कराया था, वहां की 300 से अधिक मछलियां मरीं, यहां 25 Kg तक की हैं मछलियां, कोई इन्हें पकड़ता या खाता नहीं

बक्सर7 घंटे पहले

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तालाब से बाहर सड़क पर मछलियों को रखकर प्रदर्शन करते लोग।

बक्सर जिले में कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के बाद अब मछलियों को भी ऑक्सीजन की कमी होने लगी है। इसका ताजा उदाहरण उनवांस में देखने को मिला, जहां सरकारी तलाब में पोषित दो दिनों में छोटी-बड़ी 300 से अधिक मछलियां रहस्यमय ढंग से मर गईं। सोमवार को जब मछलियों के मरने का सिलसिला नहीं रुका तो स्थानीय ग्रामीणों ने मृत मछलियों को सड़क पर रख इटाढ़ी धनसोई मुख्य पथ को दो घंटों तक जाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि आखिर इस तलाब में दो दिनों से मछलियां क्यों मर रही हैं। इन मछलियों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई भी पहल नहीं की जा रहा। घटना की सूचना मिलते ही बीडीओ अमर कुमार, सीओ रजनीकांत और इटाढ़ी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित ग्रामीणों को समझाया, इसके बाद जांच कराने के आश्वासन पर ग्रामीण सड़क पर से हटे।

कहीं पानी के कारण आम जनता न हो प्रभावित
ग्रामीण मनोज पाण्डेय, रमन पाण्डेय समेत सड़क पर बैठे ग्रामीणों ने बताया कि उनवांस स्थित तालाब के किनारे भगवान शिव का मंदिर है, जहां तलाब में स्नान करके लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं। ऐसे में यदि पानी में कोई संक्रमण हो तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि जान माल की कोई क्षति न हो सके। फिलहाल जो मछलियां मरी हैं, उनमें 5 किलो तक की मछलियां शामिल हैं।

CM ने किया था तलाब का जीर्णोद्धार
ग्रामीणों ने बताया कि उनवांस स्थित तालाब में मछलियों को कोई मारता नहीं है और न ही कोई बेचता है, जिसके कारण इस तालाब में बड़े आकार की मछलियां हैं। अनुमान के मुताबिक इसमें 20 से 25 किलो वजन तक की मछलियां हैं, जिसके कारण यह तलाब प्रसिद्ध है। बता दें कि 27 दिसंबर 2019 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल जीवन हरियाली यात्रा को लेकर पांचवें चरण में उनवांस पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने तालाब का जीर्णोद्धार किया था।

उनवांस तालाब, जिसका जीर्णोद्धार CM नीतीश ने कराया था।

उनवांस तालाब, जिसका जीर्णोद्धार CM नीतीश ने कराया था।

बोले एक्सपर्ट- ऑक्सीजन की कमी के कारण मर रही मछलियां
जिला मत्स्य विभाग में कार्यरत मछली एक्सपर्ट शुभम पाटीदार ने बताया कि हमलोगों ने तलाब के पानी का सैंपल ले लिया है। फिलहाल पाउडर का छिड़काव भी कराया गया है। हालांकि उस तालाब में जलकुंभी, पुरईन का पत्ता, कमल के पौधे इतने हैं कि मछलियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है, जबकि इस तालाब में इतनी बड़ी मछलियां हैं तो ऑक्सीजन लेवल कम होना स्वाभाविक है, क्योंकि उनके अंडे-बच्चे व मेढक भी उसी में हैं। वह भी इस मौसम में ऑक्सीजन लेवल का कम होना स्वाभाविक है, क्योंकि मछलियों के जीवित रहने के लिए जल में घुलित ऑक्सीजन की जरूरत होती है। वह तब होगा, जब तालाब का पानी हिलोरे ले। ऐसा तब होगा, जब तालाब साफ रहे तभी वायुमंडल से ऑक्सीजन जल में घुल सकेगा। यदि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलेगा तो मछलियों धीरे-धीरे मर जाएंगी।

इस प्रकार से करें तालाब में ऑक्सीजन की सप्लाई
पाटीदार ने बताया कि तालाब में मछलियों को ऑक्सीजन के लिए तलाब के पानी को डंडे से हिलाना चाहिए। या तो मोटर या पंप सेट से उसी तलाब से पानी निकाल कर उसी तलाब में डालना चाहिए। इससे तलाब के निचले सतह का पानी ऊपर व ऊपरी सतह का ऑक्सीजन युक्त पानी नीचे आता है, जिससे मछलियों को ऑक्सीजन अच्छी तरह से मिलेगा। उन्होंने बताया कि उनवांस में यह प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। तालाब की सफाई भी अगले दो दिनों में ग्रामीणों के द्वारा कर दी जाएगी।

मरी हुईं मछलियों को ग्रामीणों ने दफनाया
प्रभारी थानाध्यक्ष लालबाबू सिंह ने बताया कि सड़क पर बैठे ग्रामीणों से कहा गया कि कोई जहर डाला हो तो अज्ञात पर या तो किसी व्यक्ति के विरुद्ध जिसने यह कृत्य किया हो, आवेदन दीजिए। फिर स्थानीय मुखिया ने पुलिस को बताया कि ऐसा कोई मामला नहीं है। पानी की जांच कराई जाए, रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाए। इसके बाद मरी हुई छोटी-बड़ी सभी मछलियों को पोखरे किनारे पानी टंकी के पास ग्रामीणों द्वारा दफना दिया गया।

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बिहार | दैनिक भास्कर

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