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ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे में पुलिस की सेटिंग, VIDEO: बॉर्डर पार से आती है नागौर में ऑनलाइन सट्टे की लाइन; यहां बुकियों को मिलता है पुलिस का सहारा, अब WTC फाइनल में भी क्रिकेट बेटिंग की आशंका

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  • Online Betting Line Comes From Across The Border In Nagaur, Here Bookies Get Full Police Protection; Ajmer IG’s Investigation Also Confirmed; Now There Is A Possibility Of Cricket Betting In WTC Final Also

नागौर4 मिनट पहलेलेखक: मनीष व्यास

नागौर जिले सहित आसपास के इलाकों में पुलिस के गठजोड़ से ऑनलाइन सट्‌टे का खेल चल रहा है। शहर में अजमेर रेंज IG की स्पेशल पुलिस टीम ने 20 दिन पहले कार्रवाई करते हुए क्रिकेट सट्टेबाजों को पकड़ा और गिरफ्तार किया। इसके बाद सट्टेबाजों से मिलीभगत के आरोपों में शहर कोतवाल और एक अन्य पुलिसकर्मी निलंबित किया है। इन सबके बीच मचे राजनीतिक बवाल से महज 4-5 दिन में ही नागौर SP श्वेता धनखड़ का यहां से तबादला हो गया। इससे जिले में सटोरियों और खाकी की मिलीभगत और क्रिकेट बेटिंग (सट्‌टेबाजी) एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

इसके बाद अजमेर रेंज IG एस सेंगाथिर के निर्देशन में निलंबित हुए शहर कोतवाल और हेड कांस्टेबल प्रेमाराम के खिलाफ हुई विभागीय जांच में भी पुलिस द्वारा लापरवाही कर सटोरियों व बुकियों को बचाने और रुपए के लेनदेन करने की पुष्टि भी हो चुकी है। अब IG एस सेंगाथिर दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा के साथ जांच रिपोर्ट आगे भेज रहे है। इसके बाद नागौर में क्रिकेट बुकियों को मिल रहे पुलिस संरक्षण की भी पुष्टि हुई है।

हर गेंद पर सट्टा लगाते है, ऑनलाइन सट्टे की लिंक
पिछले कई सालों से नागौर जिले में ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन भी सट्‌टेबाजी खिलाई जा रही है। जिला मुख्यालय पर बैठे मुख्य बुकियों के नेटवर्क से जिले भर में बड़ी संख्या में यहां क्रिकेट का सट्‌टा खेला जाता है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि इन मुख्य बुकियों के तार सरहद पार पाकिस्तान और दुबई तक है। इन्हे सट्टे की लाइन विदेशों से मिलती है। ये मैच पर नहीं अलबत्ता हर गेंद पर सट्टा लगाते है और लगवाते है।

हालात ये है कि अब ये क्रिकेट बुकी भी दिनों दिन हाईटेक और शातिर हो चुके हैं। हाल ही में हुई IG की टीम की कार्रवाई में पकड़ा गया चेनार सरपंच व अन्य युवक चलती कार में बैठकर ऑनलाइन सट्टा खेल रहे थे। इसके अलावा जिले के लाडनूं, कुचामन, मकराना, मेड़ता और मकरना सहित जगहों पर भी हुई पुलिस कार्रवाइयों में पकड़े गए सटोरिये (पंटर) भी हाईटेक तरीके से ही बुकी वेबसाइटों पर लाइन लेकर ऑनलाइन सट्टा लगा रहे थे।

2 साल पहले सटोरियों पर हुई थी बड़ी कार्रवाई, पर दब गया मामला
पुलिस सूत्रों के अनुसार तक़रीबन 2 साल पहले नागौर शहर मुख्यालय पर ऑनलाइन सट्टा कारोबार के खिलाफ तत्कालीन पुलिस अधिकारी श्रवणदास संत ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। इस दौरान मुख्य बुकी सहित 4 सटोरियों को पुलिस ने एक घर में रंगे हाथ ऑनलाइन सट्टा खिलाते पकड़ा था। तब पुलिस अधिकारी संत ने बताया था कि पकड़ा गया मुख्य बुकी ही इस पूरे अवैध कारोबार को जिले भर में मैनेज कर रहा है। कोतवाली थाने में मामले की FIR भी हुई और जांच भी चली। इस बीच पुलिस अधिकारी संत का यहां से तबादला कर दिया गया। अब जांच पूरी कर कोर्ट में चालान भी पेश कर दिया गया है पर बड़ी मछलियां आज भी आजाद घूम रही है।

युवा हो रहे है शिकार तो कई घर हुए बर्बाद
जिले भर में युवाओं में बेरोजगारी व जल्दी अमीर बनके हाईक्लास स्टाइलिश जिंदगी जीने की चाह के चलते वो इन बुकियों के चंगुल में फंस रहे हैं। इसके चलते ऐसे युवा उधार लेकर या अपने घर की कीमती चीजों को बेचकर सट्टे के कारोबार में ये आसानी से इन बुकियों के पंटर बन रहे है। इंटरनेट पर कई वेबसाइट और मोबाइल एप हैं, जहां ऐसे युवा आसानी से यूजर आईडी और अकाउंट बनाकर सटोरिये बनते देखे जा रहे है। जिले के लगभग हर बड़े शहर में इन युवाओं के जरिये ऑनलाइन सट्टा चलाने वालों की लाइन पहुंचती है। इसके चलते कई घर बर्बाद हो रहे है तो युवाओं में चोरी जैसे अपराध की लत बढ़ रही है।

सांसद बेनीवाल भी पुलिस और खाकी की सेटिंग पर CM गहलोत व DGP को कर चुके शिकायत
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी जिले में बड़े पैमाने पर पनपे ऑनलाइन सट्टा कारोबार को लेकर 15 दिन पहले CM गहलोत को पत्र लिखकर व इस पुरे अवैध कारोबार में तत्कालीन SP श्वेता धनखड़ की संलिप्तता को लेकर ADG स्तर के अधिकारी से जांच करवाने की बात कही थी। हालांकि इस मामले में SP श्वेता धनखड़ की संलिप्तता की जांच तो नहीं हुई है, अलबत्ता उनका यहां से तबादला कर दिया गया है।

कार्रवाइयां भी हुई पर मिलीभगती के चलते सट्टा नेटवर्क तोड़ने में पुलिस हुई नाकाम
इन क्रिकेट बुकियों और सटोरियों पर पुलिस कार्रवाई भी हुई है, बावजूद इसके पुलिस आज तक इन सटोरियों के नेटवर्क को न तो तोड़ पाई और न ही इन पर कोई ठोस कार्रवाई कर पाई है। हर बार पुलिस पर इन सटोरियों से मिलीभगत और रुपए का लेनदेन कर मामले को ढीला करने के आरोप लगे है। इसके चलते मुख्य बुकी और सरगना बच निकलते है।

ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क तोड़ने के मौकों पर पुलिस हो रही नाकाम

  • 2 मई को सदर थाना पुलिस ने कार्रवाई कर एक ढाणी में कार्रवाई कर ऑनलाइन सट्टा लगा रहे 3 आरोपियों को पकड़ा था और इन्होंने पुलिस को चेनार सरपंच व अन्य का मुख्य बुकी के तोर पर नाम भी बताया था। बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, नतीजतन अजमेर रेंज आई जी को सीधी कार्रवाई करनी पड़ी।
  • ​​​​​​मेड़ता में पुलिस ने 30 अप्रैल को आईपीएल क्रिकेट सट्टा पकड़ा और मौके से 74200 रुपए की नकदी बरामद की गई। इसके अलावा मौके से 5 जनों को गिरफ्तार किया गया था।
  • 26 अप्रैल को मकराना पुलिस ने 3 जनों को गिरफ्तार किया और इनके कब्जे से 15 लाख 88 हजार 900 रुपए का हिसाब मिला था।
  • दो महीने पहले पुलिस की डीएसटी टीम ने दबिश देकर कुचामन में 6 जनों को गिरफ्तार किया और इनके कब्जे से 18 लाख का रुपए का हिसाब मिला था।
  • 8 महीने पहले एटीएस व तत्कालीन एसपी के निर्देशन में कुम्हारी दरवाजे के पास एक बाड़े में दबिश देकर लग्जरी कार से संचालित हो रहे आईपीएल क्रिकेट मैच का सट्टा पकड़ा गया था। जो नागौर में हुई सट्टे की बड़ी कार्रवाई थी। आरोपी आईपीएल क्रिकेट सट्टे की लाइन देने के साथ लोगों की राशि लगाने का कार्य भी करते थे।
  • 8 महीने पहले नावां में 4 सटोरियों को गिरफ्तार किया और इनके कब्जे से 60 लाख रुपए का हिसाब मिला था।
  • इसके अलावा जिले के सदर, रोेल, कुचामन एवं लाडनूं तथा कुचेरा व मूण्डवा में बड़े स्तर पर क्रिकेट सट्टे का कारोबार संचालित है।​​​​​​​​​​​​​​

ऐसे खिलाते है ऑनलाइन सट्‌टा

  • -क्रिकेट का सट्‌टा सिर्फ ऑनलाइन खिलाया ही नहीं जा रहा बल्कि सिखाया भी जा रहा है। बुकियों के जरिये सट्टा खिलाने वाले एजेंट को सलाह दी जाती है कि वो उनकी लिंक्ड सट्टेबाजी साइट पर सट्‌टेबाजी खाता बनाएं। एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है। उसे उसके अकाउंट की आईडी व पासवर्ड दी जाती है। अकाउंट की एक लिमिट होती है। सट्‌टा लगाने वाले व्यक्ति को लाइन कहा जाता है। यही पंटर के जरिए बुकी से संपर्क कराता है। मैच की पहली गेंद से लेकर आखिरी गेंद तक टीम के जीत के भाव चढ़ते-उतरते हैं।
  • क्रिकेट के सट्‌टे में जानकारी की गति बहुत मायने रखती है। मैच शुरू होते ही सट्‌टेबाज लगातार एक-दूसरे के टच में रहते हैं। कम्यूनिकेशन के लिए अधिकतर वॉट्सऐप का ही इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह सुरक्षित होता है। एक लाख को एक पैसा, 50 हजार को अठन्नी, 25 हजार को चवन्नी कहा जाता है।
  • – सट्‌टा सिर्फ वास्तविक नतीजों पर ही नहीं होता बल्कि इसमें कई फैक्टर होते हैं, जैसे एक ओवर में कितने रन आए, किस बॉलर ने कितने विकेट लिए, चौके और छक्के कितने लगे, खाली बॉल कितनी रहीं और रन आउट कितने हुए और ऐसे में हर गेंद पर सट्टा लगता रहता है।

हाल ही में जिले में आए नए SP अभिजीत सिंह ने भी पदभार संभालने के बाद दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में जिले में ऑनलाइन सट्टा, गैंगवार, आर्म्स क्राइम और मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क को तोड़ना उनकी प्राथमिकताओं में बताया है। उन्होंने सायबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए जिले के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने की भी बात कही है।

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राजस्थान | दैनिक भास्कर

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