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किसान आंदोलन का सहारा: क्या पेगासस से ध्यान हटाने के लिए दी गई किसानों को दिल्ली में घुसने की मंजूरी!

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 22 Jul 2021 05:57 PM IST

सार

सूत्र बताते हैं, दिल्ली पुलिस के लिए 26 जनवरी को हुई लालकिला की घटना एक बड़ा सबक थी। यही वजह रही कि दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारी, किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन करने की इजाजत देने के खिलाफ थे। 20 जुलाई तक इस मामले में मंजूरी नहीं दी गई…

जंतर मंतर पर भोजन करते किसान
– फोटो : Agency

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‘किसान आंदोलन’ लंबे समय से केंद्र सरकार के लिए परेशानी बना हुआ है। संसद सत्र शुरू होने की तिथि नजदीक आई तो किसानों ने कह दिया कि वे संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे। 19 जुलाई को संसद सत्र प्रारंभ हो गया, लेकिन तब तक किसानों को दिल्ली में घुसने की इजाजत नहीं मिली। हालांकि दिल्ली पुलिस के साथ किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की दो-तीन बैठकें हो चुकी थीं। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ‘पेगासस स्पाइवेयर’ की खबर ने तहलका मचा दिया। विपक्षी दल, जो महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाए हुए थे, उन्होंने अचानक अपनी रणनीति में बदलाव कर दिया। संसद में ‘पेगासस’ का शोर मच गया। लोकसभा और राज्य सभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। जानकार बताते हैं कि दिल्ली पुलिस ने 21 जुलाई की शाम को यह बताया है कि किसान जंतर-मंतर पर बैठ सकते हैं। ये टाइम रहेगा। ऐसे में ये सवाल तो उठेगा ही कि ‘पेगासस’ से ध्यान हटाने के लिए ‘किसानों’ को दिल्ली के जंतर मंतर पर ‘किसान संसद’ आयोजित करने की मंजूरी दी गई है।

किसान आंदोलन के नेताओं ने पिछले माह ही बता दिया था कि संसद सत्र के दौरान वे दिल्ली में कदम रखेंगे। हालांकि मीडिया में तो कई माह से यह खबर चल रही थी कि संसद के मानसून सत्र में किसानों ने संसद के बाहर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। सरकार की तरफ से तब कुछ नहीं कहा गया। किसान संगठनों ने कहा, वे 22 जुलाई से लेकर संसद सत्र की समाप्ति तक संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे। दिल्ली पुलिस, किसानों को इस प्रदर्शन के लिए मंजूरी देने के हक में नहीं थी।

सूत्र बताते हैं, दिल्ली पुलिस के लिए 26 जनवरी को हुई लालकिला की घटना एक बड़ा सबक थी। यही वजह रही कि दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारी, किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन करने की इजाजत देने के खिलाफ थे। 20 जुलाई तक इस मामले में मंजूरी नहीं दी गई। दूसरी तरफ पेगासस स्पाइवेयर को लेकर विपक्षी दलों ने पहले दिन से ही संसद में कामकाज ठप कर दिया। मीडिया में पेगासस छा गया। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी। भाजपा ने पेगासस के मसले पर अपनी बात कहने के लिए अपने मुख्यमंत्रियों को मैदान में उतार दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी ‘पेगासस’ के मामले में केंद्र सरकार का बचाव करने के लिए सामने आ गए।

आप सांसद संजय सिंह ने तो राज्यसभा में पेगासस पर चर्चा के लिए नोटिस दे दिया। दूसरी पार्टियों के सांसदों ने भी इस मसले पर खूब हो हल्ला किया। इस मसले पर राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार तक स्थगित कर दी गई। जानकारों के अनुसार, सरकार ने देखा कि पेगासस मामला बढ़ता जा रहा है तो 21 जुलाई की शाम को दिल्ली पुलिस ने एकाएक किसानों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दे दी। बसों में बैठ कर किसान जंतर-मंतर पर पहुंच गए। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जो पेगासस पर केंद्र सरकार को लगातार घेर रहे थे, वे भी किसान आंदोलन को समर्थन देने लगे। संसद में भी किसानों का मुद्दा गूंजने लगा। मीडिया में भी गुरुवार सुबह से ही किसान आंदोलन की खबरें चल रही थीं। राष्ट्रीय राजधानी में संसद सत्र के दौरान किसी भी तरह के प्रदर्शन की मनाही होती है। खासतौर पर लुटियन जोन में प्रदर्शनकारियों को फटकने तक नहीं दिया जाता। इन सबके बावजूद दिल्ली पुलिस को संसद सत्र के दौरान किसानों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत देनी पड़ी।

विस्तार

‘किसान आंदोलन’ लंबे समय से केंद्र सरकार के लिए परेशानी बना हुआ है। संसद सत्र शुरू होने की तिथि नजदीक आई तो किसानों ने कह दिया कि वे संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे। 19 जुलाई को संसद सत्र प्रारंभ हो गया, लेकिन तब तक किसानों को दिल्ली में घुसने की इजाजत नहीं मिली। हालांकि दिल्ली पुलिस के साथ किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की दो-तीन बैठकें हो चुकी थीं। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ‘पेगासस स्पाइवेयर’ की खबर ने तहलका मचा दिया। विपक्षी दल, जो महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाए हुए थे, उन्होंने अचानक अपनी रणनीति में बदलाव कर दिया। संसद में ‘पेगासस’ का शोर मच गया। लोकसभा और राज्य सभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। जानकार बताते हैं कि दिल्ली पुलिस ने 21 जुलाई की शाम को यह बताया है कि किसान जंतर-मंतर पर बैठ सकते हैं। ये टाइम रहेगा। ऐसे में ये सवाल तो उठेगा ही कि ‘पेगासस’ से ध्यान हटाने के लिए ‘किसानों’ को दिल्ली के जंतर मंतर पर ‘किसान संसद’ आयोजित करने की मंजूरी दी गई है।

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