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कोरोना की दूसरी लहर से बीमा कंपनियों का फायदा: हेल्थ इंश्योरेंस दाेगुना, मार्च में 25 तो मई में 50 हजार पॉलिसी हुई; सालभर की वैलिडिटी वाला टर्म इंश्योरेंस काफी बढ़ा

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रायपुर2 घंटे पहलेलेखक: असगर खान

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कोरोना की पहली लहर के दौरान सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 25 फीसदी ज्यादा लोगों ने बीमा पाॅलिसी ली, लेकिन नवंबर-दिसंबर से इंश्योरेंस सेक्टर ठंडा पड़ गया था। मार्च-अप्रैल में दूसरी लहर के खतरे ने इंश्योरेंस पर लोगों का ध्यान इस तरह आकर्षित किया है कि पिछले तीन माह से सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने लोग बीमा करवा रहे हैं। रायपुर में जनवरी से मार्च तक प्रदेश में निजी और सरकारी बीमा कंपनियों को मिलाकर हर महीने 25 से 30 हजार पालिसियां ली जा रही थीं। लेकिन मार्च से अब तक हर महीने 45 से 50 हजार पाॅलिसी हो रही हैं। बड़ा अंतर हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस के मामले में आया है। इनमें रिटर्न नहीं है, लेकिन इलाज के खर्च की बड़ी राशि क्लेम की जा सकती है, इसलिए ज्यादातर लोगों का फोकस इसी पर है।

राजधानी सहित राज्य के दूसरे शहरों में ज्यादातर लोग हेल्थ इंश्योरेंस करा रहे हैं। लोगों के अलावा के अलावा सरकारी विभाग और कार्पोरेट सेक्टर भी अपने कर्मचारियों का हेल्थ इंश्योरेंस करवा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा पापुलर टर्म इंश्योरेंस हैं। टर्म इंश्योरेंस में एक न्यूनतम सालाना प्रीमियम होता है। यह वापसी योग्य नहीं होता, लेकिन इसमें प्रीमियम के अनुसार पांच, 15, 25 और 50 लाख तक क्लेम का प्रावधान रहता है। सरकारी इंश्योरेंस सेक्टर के अफसरों के मुताबिक कोरोना से पहले पूरे प्रदेश में हर माह औसतन 8 से 10 हजार पाॅलिसी हो रही थीं।

पिछले साल मार्च से जून तक लॉकडाउन के कारण पालिसियां नहीं बढ़ी, लेकिन उसके बाद जुलाई से इस साल मार्च-2021 तक हर माह 18 से 20 पालिसियां हुई हैं। इस दौरान एलआईसी ने ही हेल्थ व टर्म सहित अन्य मिलाकर 1.47 लाख के आसपास पालिसियां की गईं। पिछले साल 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 के वित्तीय वर्ष में ही 1.24 लाख के आसपास पालिसियां हुईं थीं। प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों के अनुसार कोरोना की वजह से प्रदेश में हर माह उन्हीं की औसतन 25 से 30 हजार हेल्थ पालिसी हो रही हैं, जो पूर्व से डेढ़ से दोगुना है।

कोराेना से पहले कम पॉलिसी

  • 8-10 हजार
  • हर माह औसतन हो रही थी पॉलिसी।
  • 18-20 हजार जुलाई 2020 से मार्च 2021 तक हुईं।

23 लाख रुपए से ज्यादा पॉलिसियां

  • 1.24 लाख
  • 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक।
  • 1.47 लाख जुलाई से मार्च 2021 तक हुईं।

काेरोना के कारण खुद पूछ रहे लोग
कोरोना की वजह से बड़ा बदलाव ये है कि ज्यादातर लोग खुद ही बीमा एजेंटों से संपर्क कर प्लान पूछ रहे हैं। निजी बीमा कंपनियां इसी वजह से आनॅलाइन प्लेटफार्म तैयार कर रही हैं। एक निजी इंश्योरेंस कंपनी सीनियर सेल्स मैनेजर हिमांशु गोहिल ने बताया कि पिछले साल फरवरी तक कोरोना की दहशत यहां नहीं थी। सितंबर-अक्टूबर यानी पहली लहर के खत्म होते-होते बीमा करवाने की संख्या बढ़ने लगी।
कम रहा कारोबार: मार्च, अप्रैल, मई और जून लॉकडाउन में गुजरे, इसलिए तब तक बीमा का कारोबार सामान्य कम ही रहा।

हेल्थ-टर्म प्लान पर रुचि, इलाज खर्च भी
एलआईसी एजेंट अमित साहू के अनुसार एलआईसी की 33 पालिसियां हैं। हेल्थ इंश्योरेंस में ट्रीटमेंट का पूरा खर्च बीमा कंपनी उठाती है। ज्यादातर लोग पांच से 10 लाख तक का रिस्क कवर वाला प्लान ले रहे हैं। इसमें 38 से 40 साल के उम्र में टर्म प्लान लेने वाले का सालाना औसत प्रीमियम 10 से 12 हजार रुपए आता है। निजी कंपनियां न्यूनतम 10 साल से लेकर 75, 85 और अधिकतम आजीवन तक का प्लान दे रही हैं।
सेटलमेंट रेशियो: देश की टॉप प्राइवेट कंपनियों का क्लेम सेटलमेंट रेशियो 99.2 से 99.9 प्रतिशत तक है।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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