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कोरोना को हराना है: होटलियर्स काे देनी हाेगी स्टाफ की लिस्ट, हाेटल-दुकानाें में काम करने वालाें का अब हर महीने हाेगा कोरोना टेस्ट

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शिमला3 घंटे पहले

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फाइल फोटो

  • जिला प्रशासन रखेगा नजर, अगर मामले बढ़े तो कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करना भी होगा आसान

इन दिनाें बाहरी राज्याें से शिमला व आसपास के क्षेत्राें में हजाराें की संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। बीते एक माह में एक लाख से ज्यादा गाड़ियां शिमला में पर्यटकाें की आई हैं। वीकेंड पर ताे सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंच रहे हैं। इसमें ज्यादातर पर्यटक ना ताे प्रशासन के काेराेना नियमाें काे मान रहे हैं और ना ही वह मास्क पहनते हैं। ऐसे में अब काेराेना संक्रमण के दाेबारा फैलने का डर भी बना हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा संक्रमण हाेटलाें में काम करने वाले कर्मचारियाें और काराेबारियाें में फैलने का डर है क्याेंकि सबसे ज्यादा पर्यटक वहीं पर आते हैं।

इसी के चलते अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने हाेटलाें और दुकानाें पर कार्य करने वाले कर्मचारियाें की हर माह काेराेना टेस्टिंग करवाने का निर्णय लिया है। हर माह सभी कर्मचारियाें का आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया जाएगा। इससे यह चल जाएगा कि हाेटलाें या दुकानाें पर काेराेना संक्रमण ताे नहीं फैल रहा है। हाेटलाें और काराेबारियाें के पास कार्य कर रहे कर्मचारियाें की लिस्ट अब जिला प्रशासन ने मांग ली है।

सभी हाेटल मालिकाें और काराेबारियाें काे यह लिस्ट डीसी काे देनी हाेगी। इससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के पास यह जानकारी हाेगी कि किस हाेटल में कितने कर्मचारी हैं। उनका फाेकस उन हाेटलाें और काराेबारियाें पर ज्यादा हाेगा जिनके पास ज्यादा टूरिस्ट आ रहे हैं और वहां पर संक्रमण का डर है। हालांकि सभी कर्मचारियाें के हर माह आरटीपीसीआर हाेंगे। इससे पहले भी यदि किसी हाेटल में काेई कर्मचारी पाॅजिटिव आता है ताे वहां पर पहले ही पूरी टेस्टिंग करवाई जाएगी।

संक्रमण राेकने में मिलेगी मददः जिला प्रशासन ने हाेटलाें और काराेबारियाें के पास तैनात कर्मचारियाें की लिस्ट इसलिए मांगी है क्याेंकि काेराेना संक्रमण राेकने में इससे सबसे ज्यादा मदद मिलेगी। यदि किसी हाेटल या काराेबारी का स्टाफ संक्रमित हाेता है ताे उसे सील किया जा सकता है और वहां पर काेराेना की सभी एहतियात बरती जा सकती है।

इससे प्रशासन काे पता नहीं हाेता था कि हाेटल या काराेबारियाें के पास कार्य कर रहे कर्मचारी संक्रमित हुए हैं, क्याेंकि कई लाेग कार्य चाहे हाेटल में करते हाेते थे, मगर टेस्टिंग के समय अपने घर का पता दे देते थे। जिससे उसे ट्रेस करना मुश्किल हाेता था, मगर अब ऐसा नहीं हाेगा। पहले ही टेस्टिंग से पता चल जाएगा कि किसी हाेटल या काराेबारियाें के पास संक्रमण के मामले ज्यादा आए हैं।

पहले भी संक्रमण राेकना हुआ था मुश्किलः काेराेना की पहली लहर में जिला प्रशासन के पास पूरी कॉन्टैक्ट हिस्ट्री हाेती थी और प्रशासन आसानी से मरीजाें के संपर्क में आए लाेगाें काे ट्रेस कर लेते थे। इससे पहली लहर में संक्रमण भी कम ही फैला था। जबकि दूसरी लहर में कॉन्टैक्ट हिस्ट्री पूरी तरह से खत्म हाे गई और कई मरीज ताे पाॅजिटिव आने के बाद भी कई लाेगाें के संपर्क में आ गए जिससे की काेराेना काफी खतरनाक हाे गया और इसकी चपेट में हजाराें लाेग आए। मगर अब इन्हीं लापरवाहियाें से सबक लेते हुए प्रशासन ने अब जहां सबसे ज्यादा टूरिस्ट संपर्क में आते हैं, वहां पर टेस्टिंग करवाने का निर्णय लिया है ताकि पता चले कि कहीं संक्रमण ताे नहीं फैल रहा है।

अब हाेटलाें और काराेबारियाें के पास कार्य करने वाले सभी कर्मचारियाें की हर माह काेराेना सैंपलिंग हाेगी। कर्मचारियाें की लिस्ट सभी हाेटलाें और काराेबारियाें से मांग ली गई है। इससे अब यह पता चल सकेगा कि कहीं संक्रमण हाेटलाें से ताे नहीं फैल रहा है। इसके लिए काराेबारियाें के साथ बैठक भी की गई है।
-आदित्य नेगी, डीसी शिमला

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