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कोरोना ने दिया अंतहीन दर्द: पिता की मौत के बाद 4 बच्चों का स्कूल छूटा, 13-14 साल की बेटियों को करनी पड़ रही नौकरी

अम्बाला3 घंटे पहलेलेखक: रितिका एस. वोहरा

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अम्बाला सिटी | अपना गम बयां करतीं माया देवी।

  • पेंशन, फ्री शिक्षा और आर्थिक मदद के सरकारी दावों का ये कैसा सच‌?

कोरोना से परिवार के मुखिया की मौत होने पर पेंशन, बच्चों की फ्री पढ़ाई और आर्थिक मदद जैसे सरकारी वादों का जमीनी सच देखना हो तो सिटी के काजीवाड़ा मोहल्ला में कृष्णा मंदिर के पास चले आएं। यहां 5 बच्चों के साथ किराये के मकान में रह रहीं माया देवी रोटी-रोटी के लिए मोहताज हो चुकी हैं। चार बच्चों का स्कूल छूट गया है जबकि 5वें को स्कूल में दाखिल नहीं करवा पाईं। 13-14 साल की दो बड़ी बेटियों को दुकान पर काम करना पड़ रहा है। माया के पति भूरा शर्मा की 7 मई को कोरोना से मौत हो गई थी। उसी के बाद से इस परिवार की दुश्वारियां शुरू हुईं।

माया बताती हैं कि कई साल पहले से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत हर महीने 12 रुपए इंडियन बैंक में कटते थे। अब जब पति की माैत हुई तो बैंक से मुआवजा मांगा। कई चक्कर काटे आखिर में बैंक की ओर से जवाब मिला-यह बीमा सिर्फ एक्सीडेंट में मौत होने पर मिलता है, कोरोना से मरने पर नहीं। उसके बाद सरकार की ओर से कोरोना से मरने वालों के आश्रितों के लिए पेंशन, आर्थिक मदद और बच्चों की फ्री पढ़ाई के लिए आवेदन किया। सर्वेयर घर पर आकर स्थिति भी देख गए लेकिन अभी तक कोई लाभ नहीं मिला।

जब पति जिंदा थे तब बड़ी बेटी सेजल एसए जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 7वीं, शिवानी 5वीं, गाैरी चाैथी और भाई माधव दूसरी क्लास में पढ़ते थे। सेजल बताती है कि पापा हर इच्छा पूरी करते थे। उनके जाने के बाद घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। फीस देना तो दूर खाने तक के पैसे नहीं थे। इस वजह से स्कूल छूट गया। सेजल व शिवानी अब एक राखी की दुकान पर काम कर रही हैं, ताकि मां की मदद कर सकें। अब हालात ये हैं कि कभी कोई संस्था राशन दे देती है ताे कभी रिश्तेदार मदद कर देते हैं।

माया राेते हुए बताती हैं कि कभी ऐसे दिन नहीं देखे हैं। पति ने कभी काेई कमी महसूस नहीं हाेने दी थी। अब ताे ऐसे दिन भी आ रहे हैं जब शाम काे रसाेई में राशन ही खत्म हाे जाता है और बच्चाें काे भूखा सुलाना पड़ता है। 5 साल का सबसे छाेटा बेटा हिमांशु बगैर दूध पीए कभी नहीं साेता था। अब उसके लिए दूध जुटाना आसान नहीं। मकान मालिक भी घर खाली करने के लिए कहने लगा है।

उस दिन परिवार वाले बाहर जाने से रोक रहे थे लेकिन वो चला गया…
पति भूरा पटेल राेड पर गोलगप्पे की रेहड़ी लगाते थे। शादी की पार्टियाें में दिहाड़ी भी करते थे। 20 अप्रैल काे दिहाड़ी का ऑर्डर मिला था। उस दिन माया ने भूरा काे काेराेना संक्रमण की वजह से जाने से मना भी किया था। उसने रात काे दरवाजे पर ताला लगा था लेकिन वाे चुपके से सुबह परिवार के उठने से पहले ही काम पर चला गया। जब 4 दिन बाद वापस लाैटा ताे खांसी-जुकाम हाे रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर 3 मई काे कोरोना टेस्ट करवाया ताे रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 7 मई की रात काे अचानक सांस फूलने से पत्नी अाैर भूरा का दाेस्त उन्हें सिविल हॉस्पिटल लेकर जा रहे थे लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई।

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हरियाणा | दैनिक भास्कर

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