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चिट्टागांव से ग्राउंड रिपोर्ट: बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हमले, 4 की मौत; सोशल मीडिया पर अफवाह के बाद हिंदुओं के घर-दुकानों पर भी निशाना बनाया

चिट्टागांव27 मिनट पहलेलेखक: राजीव नंदी

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बांग्लादेश में कई हिंदू मंदिरों पर हमलों के बाद देश के 22 जिलों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को तैनात किया गया है। इन हमलों में 4 लोगों की मौत हुई है और दर्जनों घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर पवित्र कुरान के अपमान की अफवाह के बाद हिंदुओं के घरों और दुकानों को भी निशाना बनाया गया है। देश के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाओं के बाद मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया है।

हिंसा के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बयान जारी कर कहा है कि हिंसा में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, इससे फर्क नहीं पड़ता कि उनका धर्म क्या है। गुरुवार को बांग्लादेश में दुर्गा पूजा का पर्व मनाया गया। इस दौरान शेख हसीना ने राजधानी ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर पहुंचकर हिंदू समुदाय के लोगों से मुलाकात की।

हमले के बाद चिट्टागांव की गलियों में बिखरा सामान और सहमे हुए लोग।

हमले के बाद चिट्टागांव की गलियों में बिखरा सामान और सहमे हुए लोग।

सोशल मीडिया पर अफवाहों से हिंसा भड़की
सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलने के बाद देशभर के कई जिलों और इलाकों में हिंसा फैल गई। चांदपुर इलाके में कई लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट हैं। वहीं पुलिस ने दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया है। चिट्टागांव से बात करते हुए राजीव नंदी ने बताया, ‘बुधवार शाम को देश के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि उसे सूचना मिली है कि इस्लाम के पवित्र ग्रंथ का कोमिला में अपमान किया गया है।’

मरने वालों की संख्या ज्यादा होने की आशंका
बांग्लादेश के चिट्टागांव के कोमिला इलाके में दुर्गा पंडालों पर हुए हमलों में 4 लोगों की मौत हुई है। वहीं चिट्टागांव में मौजूद एक भरोसेमंद सूत्र के मुताबिक, मरने वालों की संख्या 10 से ज्यादा हो सकती है। चिट्टागांव से बात करते हुए एक व्यक्ति ने बताया कि हिंसा के बाद हिंदुओं के घरों और दुकानों को भी निशाना बनाया गया है। हमलों के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है।

चिट्टागांव में हिंदू मंदिरों पर हमले के बाद वहां सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है।

चिट्टागांव में हिंदू मंदिरों पर हमले के बाद वहां सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है।

पहला हमला कोमिला क्षेत्र में हुआ
हिंसा कोमिला क्षेत्र से शुरू हुई और फिर आसपास फैल गई। सोशल मीडिया पर कुरान के अपमान की अफवाह फैली थी जिसके बाद प्रतिक्रिया में हिंदू मंदिरों और दुर्गा पंडालों पर हमले किए गए। सबसे पहला हमला कोमिला क्षेत्र में ही दुर्गा पंडाल पर हुआ। इसके बाद कई इलाकों से हिंसा और तनाव की खबरें आई हैं।

हालात संभालने पहुंची पुलिस पर भी हमला
ढाका की मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक ये हिंसा बुधवार को भड़की और एक समय हालात ऐसे हो गए कि कई पूजा पंडालों और आसपास के इलाकों में हिंसा भड़क उठी। स्थिति संभालने की कोशिश कर रही पुलिस पर भी हमले हुए हैं। जब हालात नियंत्रण से बाहर हो गए तो सरकार ने रैपिड एक्शन बांग्लादेश और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को सुरक्षा में तैनात किया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हमले के समय दुर्गापूजा के लिए बड़ी संख्या में हिंदू मौजूद थे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हमले के समय दुर्गापूजा के लिए बड़ी संख्या में हिंदू मौजूद थे।

बांग्लादेश में पहले भी हुए हिंदू मंदिरों पर हमले
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले का इतिहास रहा है। भारत में बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले ही 29 अक्टूबर 1990 को बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी राजनीतिक संगठन ने बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की अफवाह फैला दी थी जिसके नतीजे में 30 अक्टूबर को हिंसा शुरू हुई थी जो 2 नवंबर 1990 तक जारी रही थी. इस हिंसा में कई हिंदू मारे गए थे।

इस घटना के बाद से हिंदुओं पर कई बार हमले हुए हैं लेकिन इनकी सही से जांच नहीं हो सकी और अपराधी आजाद घूमते रहे। मुझे लगता है कि बिना राजनीतिक हितों को इस तरह के हमले नहीं हो सकते हैं। इन हमलों ने बांग्लादेश के हिंदुओं में डर की भावना पैदा की है। इस तरह के हमलों ने बांग्लादेश के हिंदुओं में तो डर का माहौल पैदा किया है लेकिन अधिकतर मुसलमान इसे नजरअंदाज करते हैं।

यदि बड़े परिदृश्य में देखा जाए तो सांप्रदायिक हिंसा के मामले गिने चुने होते हैं और इसी वजह से अधिकतर मुसलमान इनकी गंभीरता या हिंदुओं पर होने वाले असर को नहीं समझ पाते हैं। बांग्लादेश के मुसलमान ये मानते हैं कि बांग्लादेश ने सांप्रदायिक सौहार्द को बचाए रखा है। ये माना जा सकता है कि इस तरह कि हिंसा की घटनाएं गिनी-चुनी हैं लेकिन इनके जरिए एक पक्ष ने दूसरे पर नियंत्रण स्थापित किया है और उसका उत्पीड़न किया है।

बांग्लादेश में पहले भी हिंदू धर्मस्थलों और हिंदुओं के घरों को निशाना बनाया जाता रहा है।

बांग्लादेश में पहले भी हिंदू धर्मस्थलों और हिंदुओं के घरों को निशाना बनाया जाता रहा है।

डर के चलते कई हिंदू देश छोड़ने की तैयारी में
डर के माहौल की वजह से अब बांग्लादेश के बहुत से हिंदू दश छोड़कर जाने के बारे में सोचने लगे हैं। राजीव कहते हैं, “ये एक गंभीर समस्या है क्योंकि यदि हिंदू देश छोड़कर जाएंगे तो इससे बांग्लादेश के सतत राष्ट्रीय विकास के लक्ष्य प्रभावित होंगे। सरकार को इस तरह के मामलों में तुरंत कदम उठाने चाहिए।”

बांग्लादेश की सरकार ने हिंसा की घटनाओं के बाद तुरंत कदम उठाने की कोशिश की है लेकिन राजीव इन्हें नाकाफी मानते हैं। राजीव कहते हैं कि जब तक हिंदुओं और मुसलमानों के बीच आपसी भाईचारा बढ़ाने के प्रयास नहीं होंगे तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी

बांग्लादेश में हाल के सालों में इस्लाम का राजनीति और समाज में दखल बढ़ा है। राजीव कहते हैं, राजनीतिक इस्लाम और सामाजिक इस्लाम ने यहां ऐसी स्थिति पैदा की है जिसमें रहना हिंदुओं के लिए मुश्किल होता जा रहा है। लोकतंत्र में यकीन रखने वाले बंगाली लोग भी इससे प्रभावित हैं और जब तक एक उदारवाली लोकतंत्र की स्थापना नहीं होगी बांग्लादेश में यही स्थिति बनी रहेगी।

(दैनिक भास्कर संवाददाता पूनम कौशल की चिट्टागांव यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता के असिस्टेंट प्रोफेसर राजीव नंदी से बातचीत पर आधारित)

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