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जिम्मेदार कौन?: एक रात में नहीं बनीं इमारतें, किसी ने तो डयूटी में कोताही की है!

बठिंडा4 घंटे पहले

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  • बठिंडा में कमर्शियल निर्माण में बिल्डिंग बॉयलाज की उल्लंघना होने पर लोकल निकाय विभाग सख्त

बठिंडा में कमर्शियल इमारतों के निर्माण में बिल्डिंग बॉयलाज की हो रही उल्लंघना की अखिरकार असलियत उजागर हो गई है। भास्कर द्वारा शहर में नियम अनदेखा कर निगम से चंद कदम की दूरी पर पोस्ट आफिस, धोबी बाजार व मिड्डू मल स्ट्रीट में अवैध निर्माण का मामला उठाने के बाद अखिरकार सीनियर अधिकारियों के निर्देश के बाद निगम टीम ने तुरंत कार्रवाई कर शनिवार को नौ कमर्शियल निर्माण सील कर इस बात को सही साबित कर दिया कि शहर में वाकई की बॉयलाज की अनुपालना नहीं हो रही थी।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि अखिरकार बिल्डिंग बॉयलाज को लागू करवाने के लिए नगर निगम के पास अधिकारियों व कर्मचारियों की फौज तैनात है जो इन निर्माण को चैक करती है, लेकिन बावजूद इन निर्माण में फ्रंट सेट बैक व पार्किंग आदि नहीं छोड़ी गई जोकि छोड़ना अनिवार्य है। इतने निर्माण एक ही रात में नहीं बने, ऐसे में यह आभास हो रहा है कि सरकारी डयूटी पूरी करने में लापरवाही बरती गई है।
यह निचले स्तर पर हुआ या फिर निचले स्तर पर रिपोर्ट को ऊपर दबाया गया, यह बात जांच के बाद सामने आएगी। वहीं कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल ने कहा कि वह इस मामले में मंगलवार को जांच को लेकर कार्रवाई करेंगे।
नए निर्माण के दौरान बॉयलाज का पालन जरूरी, लेकिन नहीं किया गया
स्थानीय निकाय विभाग, पंजाब सरकार द्वारा तैयार बिल्डिंग बॉयलाज को लागू करवाना पालिकाओं व निगमों की डयूटी है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण फ्रंट सेट बैक, जिसमें पार्किंग शामिल है, होना अनिवार्य है, लेकिन बठिंडा में हुए कमर्शियल निर्माण में अधिकांश जगहों पर पार्किंग को जगह ही नहीं छोड़ी गई तथा उक्त जगह को भी कवर कर दुकान में मिला लिया गया।

वहीं फ्लोर एरिया रेशो निर्माण में कितना होगा, इसे बिल्डिंग इंस्पेक्टर ग्राउंड पर रूटीन से चैक करते हैं, लेकिन सील किए गए निर्माण में यह बात साबित होती है कि जिम्मेदारी सरकारी कर्मचारियों ने अपनी सरकारी डयूटी का निर्वहण नहीं किया। इसके चलते इन बिल्डिंग में ना पार्किंग की जगह रखी गई तथा निर्माण में तय से अधिक किया गया। निगम कमिश्नर का भास्कर के पास यह स्वीकार करना है कि कई जगह गलत निर्माण रोके जा चुके हैं, के बावजूद वहां निर्माण का काम होना सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर देता है।

इंस्पेक्टर की रिपोर्ट पर एटीपी या एमटीपी करते एक्शन, जो नहीं हुआ
बठिंडा नगर निगम कुल 8 जोन में बांटा हुआ है। इसमें हर जोन का एक इंस्पेक्टर तैनात है। बिल्डिंग इंस्पेक्टर फील्ड में जाने के बाद निर्माण चैक करते हैं तथा कुछ गलत मिलने पर वहां काम को रुकवाने के साथ एटीपी को रिपोर्ट करते हैं तथा उल्लंघना करने पर मालिक को नोटिस इश्यू किया जाता है जिसमें तोड़ने तक की भी कार्रवाई शामिल है, को एटीपी या एमटीपी पूरा करते हैं।

पंजाब म्यूनिसिपल कार्पोरेशन एक्ट, 1976 के तहत सारी पॉवर कमिश्नर निगम के पास होती हैं जिसे टीम को एक्शन के लिए सौंपा जाता है, लेकिन बठिंडा में इस प्रक्रिया को अंजाम नहीं दिया गया तथा धड़ल्ले से निर्माण होते गए। यह प्रक्रिया अधूरी क्यों रहीं, यह चैक करना कमिश्नर निगम की जिम्मेदारी है।

कोताही पर चार्जशीट, टर्मिनेशन भी संभव
पंजाब सिविल सर्विस रूल्स 1970 (पुनीशमेंट एंड अपील रूल्स) के तहत डयूटी को अनदेखा करने पर कोई भी सीनियर अधिकारी अपने जूनियर को नोटिस दे सकता है। किसी तरह की छोटी गलती पर रूल 10 के तहत नोटिस दिया जा सकता है, लेकिन अगर कोताही बड़ी व गंभीर है, जिसमें अपनी डयूटी का निर्वहण सही ढंग से नहीं किया गया, को जांच के बाद रूल 8 के तहत मेजर पनीशमेंट दी जा सकती है जिसमें चार्जशीट व टर्मिनेशन भी संभव है।
कमिश्नर तय करेंगे, यह उनकी जिम्मेदारी

इसमें कमिश्नर को देखना है कि वह क्या कदम उठाते हैं तथा यह उनकी जिम्मेदारी है। वह जांच कर क्या रिपोर्ट देते हैं। सरकार को जो ड्यूटी करनी है, वह रिपोर्ट के बाद करेगी।
अजोय कुमार सिन्हा, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, लोकल बॉडी, चंडीगढ़

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पंजाब | दैनिक भास्कर

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