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जी7 देशों में ग्लोबल टैक्सेशन सिस्टम पर सहमति: भारत भी गूगल-फेसबुक जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों पर 15% टैक्स लगा सकेगा, विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी

नई दिल्लीएक घंटा पहले

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दुनिया की 7 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में ग्लोबल टैक्सेशन सिस्टम पर सहमति बन गई है। इन देशों को ग्रुप ऑफ सेवन यानी जी7 कहा जाता है। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, इटली और जापान जैसे विकसित देश शामिल हैं। हाल ही में लंदन में जी7 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर की दो दिवसीय बैठक में 15% ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स को लेकर सहमति बनी है। इसका मतलब यह है कि यह देश गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों से कम से कम 15% टैक्स ले सकेंगे।

इस समझौते से भारत को भी फायदा मिलेगा

जी7 देशों के बीच ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स को लेकर हुए समझौते से भारत को भी फायदा मिलेगा। जानकारों का कहना है कि भारत का मौजूदा टैक्स रेट ग्लोबल मिनिमम टैक्स रेट से ज्यादा है। इससे भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नांगिया एंडर्सन इंडिया के चेयरपर्सन राकेश नांगिया का कहना है कि इससे भारत अपने बड़े बाजार के लिए विदेशी निवेश आकर्षित कर सकेगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास कंपटीटिव दरों पर अच्छी लेबर, निर्यात के लिए रणनीतिक लोकेशन और एक संपन्न प्राइवेट सेक्टर है।

टेक कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है भारत

कंसल्टिंग फर्म एकेएम ग्लोबल टैक्स पार्टनर के अमित माहेश्वरी का कहना है कि जी7 देशों के बीच हुए समझौते से भारत को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि भारत टेक कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है। यह देखा जाना बाकी है कि देशों के बीच बाजार का आवंटन कैसा होगा। कम से कम 15% ग्लोबल मिनिमम टैक्स का मतलब है कि भारत की टैक्स प्रणाली अभी काम करती रहेगी और भारत निवेश को लगातार आकर्षित करता रहेगा।

भारत जैसे देशों के लिए मार्गदर्शक रहेगा ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स

ईवाई इंडिया नेशनल टैक्स लीडर के सुधीर कपाड़िया का कहना है कि ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स रेट भारत जैसे बड़े और विकासशील देशों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। इसका कारण यह है कि भारत जैसे देशों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कॉरपोरेट टैक्स दरों को कम रखना काफी कठिन होता है। यहां तक कि भारत का नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए घोषित किया गया 15% टैक्स रेट भी ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स रेट से मेल खाता है। इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी असर नहीं पड़ेगा।

ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स रेट की जरूरत क्यों पड़ी?

  • मल्टीनेशनल कंपनियां कम टैक्स रेट वाले देशों में लाभ छिपाकर टैक्स देने से बचती हैं। इसको रोकने के लिए समान टैक्स लगाया गया है।
  • इस कदम से सभी कंपनियों को कारोबार के समान अवसर मिलेंगे और टैक्स चोरी पर लगाम लगाई जा सकेगी।
  • कई कंपनियों क्रॉस-बॉर्डर टैक्सेशन की कमियों का लाभ उठाते हुए टैक्स देने से बचती हैं। नए समझौते से इस पर भी रोक लग सकेगी।

भारत ने सितंबर 2019 में घटाया था कॉरपोरेट टैक्स

भारत ने सितंबर 2019 में कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती की थी। मौजूदा कंपनियों के लिए टैक्स की दरों को घटाकर 25% किया गया था। वहीं नई घरेलू मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर टैक्स की दर को 22% से घटाकर 15% किया गया था।

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