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टीकाकरण: टीका- झारखंड 19वें नंबर पर, खतरा- 328 सैंपलों में 62% डेल्टा वैरिएंट; पिछले 272 सैंपल में भी 63 प्रतिशत डेल्टा वैरिएंट मिले थे

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  • Vaccine Jharkhand At Number 19, Danger 62% Delta Variant In 328 Samples; In The Last 272 Samples Also, 63 Percent Delta Variants Were Found.

रांची4 घंटे पहले

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फाइल फोटो

  • एम्स निदेशक की चेतावनी के बीच झारखंड में टीकाकरण धीमा, 5 माह में 14 % लाेगाें काे ही लगे टीके

देश में सोमवार को जहां टीकाकरण का विश्व रिकॉर्ड बना, वहीं झारखंड में वैक्सिनेशन अपेक्षाकृत काफी कम रहा। झारखंड कुल 95258 टीके लगाकर 19वें पायदान पर रहा। सबसे अधिक धनबाद में 9506 टीके तो सबसे कम जामताड़ा में मात्र 1048 टीके ही दिए जा सके। हालांकि, वैक्सीन लगवाने में युवा सबसे आगे रहे। राज्य की आबादी 4 करोड़ 9 लाख के अनुसार, अब तक 58.81 लाख लाेगाें का ही टीकाकरण हुआ है। राज्य में 16 जनवरी से शुरू टीकाकरण के 5 माह में सिर्फ 14% लाेगों को ही वैक्सीन दी गई है। इनमें लगभग 6% महिलाएं हैं।

इधर, दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने 6-8 हफ्तों में तीसरी लहर की आशंका जताई है। धीमा टीकाकरण और दूसरी लहर में सर्वाधिक प्रभावित रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग और पलामू से भेजे गए 328 सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग में 62% डेल्टा वैरिएंट मिले हैं। ये सभी सैंपल भुवनेश्वर की आईएलएस लैब भेजे गए थे। रिम्स कोविड टास्क फोर्स के संयोजक प्रभात कुमार ने कहा है कि राज्य में कोरोना के डेल्टा समेत कई वैरिएंट मिलना खतरनाक संकेत दे रहा है।

सोमवार को राज्यभर में 95,258 टीके लगे

सर्वाधिक धनबाद में 9506 लोगों को, सबसे कम जामताड़ा में 1048 लोगों को टीके

सबसे अधिक 65,021 टीके 18 से 44 तक की उम्र वालों ने लगवाए, 45 प्लस को 22,329, और 60 प्लस को 7908 लगे

  • 1.02 लाख लाेगाें को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड है 11 जून को
  • 58,81,817 लाेगाें काे टीके लगे हैं अब तक राज्य में
  • 4739360 लाख वैक्सीन का स्टॉक अभी राज्य के पास
  • 763130 डोज मिलेंगी 29 जून तक, 33 लाख जुलाई में

90 हजार से अधिक वैक्सीन रोज दिए जा रहे

सैंपलों में कप्पा, अल्फा जैसे वैरिएंट भी मिले

आईएलएस रिपोर्ट के अनुसार, 328 सैंपलों में से 204 में डेल्टा, 63 में कप्पा, 29 में अल्फा और 32 में अन्य वैरिएंट मिले। ये स्वरूप काफी खतरनाक हैं और काफी तेजी से फैलते हैं। विशेषज्ञों बोले- दूसरी लहर में केस बढ़ने के पीछे ये वैरिएंट कारण हो सकते हैं।

वैरिएंट कितने खतरनाक

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डेल्टा अन्य वैरिएंट की तुलना में 50% अधिक तेजी से फैलता है। यह वायरस लंबे समय तक जीवित रहता है। कप्पा और अल्फा डेल्टा के मुकाबले ज्यादा प्रभावी नहीं होते।

जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन नहीं, रिजल्ट मिलने में देरी

राज्य में जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन नहीं है। मजबूरीवश यहां से सैंपल आईएलएस भुवनेश्वर भेजे जा रहे हैं। वहां से रिपोर्ट 30 दिन बाद आ रही है।

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झारखंड | दैनिक भास्कर

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