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डीजीपी बोले: जम्मू एयरपोर्ट हमला सीमा पार आयुध कारखाने की तरफ कर रहा है इशारा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 20 Jul 2021 04:54 PM IST

सार

डीजीपी ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हथियार ले जाने वाले ड्रोन के उपयोग के मामलों और नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाओं को हमारी सुरक्षा ग्रिड, पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों की खुफिया ग्रिड ने प्रभावी तरीके से नाकाम बनाया है।

डीजीपी दिलबाग सिंह
– फोटो : अमर उजाला

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जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू एयरपोर्ट पर हुआ ड्रोन हमला सीमा पार आयुध कारखाने की तरफ इशारा कर रहा है। सीमा पार से ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय क्षेत्र में हथियार और गोला-बारूद गिराने के लिए किया गया है। आतंकी गतिविधियों में मानव रहित हवाई उपकरणों की शुरूआत चिंता की बात है। जिससे निपटने में हम सक्षम हैं, साथ ही इस दिशा में और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है। ताकि इस नए खतरे को निष्प्रभावी किया जा सके।

एक सामाचार एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बात की। जिसमें आतंकवाद के मोर्चे पर वर्तमान स्थिति, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों द्वारा ड्रोन के उपयोग से सामने आए नए खतरे शामिल थे। 

गौरतलब है कि सतवारी के वायुसेना स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले की जांच में कुछ अहम सुराग मिले हैं। एयरफोर्स की तरफ से दर्ज कराए मुकदमे में कहा गया है कि हमला ड्रोन से ही किया गया। सूत्रों ने बताया कि इस हमले में 25 किलोमीटर तक उड़ने वाले चाइनीज ड्रोन का इस्तेमाल किया जाना प्रतीत होता है। इसका वजन भी 25 किलो के आसपास होता है। यह कम से कम 5 किलो तक विस्फोटक पेलोड कर सकता है। इन सभी पहलुओं की एनआईए जांच कर रही है।

इसी साल जनवरी महीने में सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा था कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर 300-400 आतंकवादी घुसपैठ का फिराक में हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि भारत के सक्रिय अभियानों एवं मजबूत आतंकवाद निरोधक ग्रिड ने न केवल दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाया है बल्कि घुसपैठ के प्रयासों पर भी काबू पाया है। उन्होंने कहा कि सेना ने पिछले साल आतंकवाद निरोधक अभियानों में नियंत्रण रेखा पर 200 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया और इन उपायों से जम्मू कश्मीर के लोगों को आतंकवाद से राहत मिली।

पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना जारी रखे हुए है। नियंत्रण रेखा के पार प्रशिक्षण शिविरों में करीब 300-400 आतंकवादी घुसपैठ करने की फिराक में हैं। ड्रोन के माध्यम से हथियारों की तस्करी की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपनी युद्धक क्षमता को बढ़ाने के लिए पुनर्गठन एवं आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि सेना कृत्रिम मेधा, ब्लॉक चेन (कंप्यूटर प्रणाली पर बिटक्वाइन में विनिमय), क्वांटम कंप्यूटिंग, मानवरहित प्रणाली, आदि उभरती प्रौद्योगिकियों पर आईआईटी जैसे शीर्ष शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है।

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू एयरपोर्ट पर हुआ ड्रोन हमला सीमा पार आयुध कारखाने की तरफ इशारा कर रहा है। सीमा पार से ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय क्षेत्र में हथियार और गोला-बारूद गिराने के लिए किया गया है। आतंकी गतिविधियों में मानव रहित हवाई उपकरणों की शुरूआत चिंता की बात है। जिससे निपटने में हम सक्षम हैं, साथ ही इस दिशा में और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है। ताकि इस नए खतरे को निष्प्रभावी किया जा सके।

एक सामाचार एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बात की। जिसमें आतंकवाद के मोर्चे पर वर्तमान स्थिति, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों द्वारा ड्रोन के उपयोग से सामने आए नए खतरे शामिल थे। 

गौरतलब है कि सतवारी के वायुसेना स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले की जांच में कुछ अहम सुराग मिले हैं। एयरफोर्स की तरफ से दर्ज कराए मुकदमे में कहा गया है कि हमला ड्रोन से ही किया गया। सूत्रों ने बताया कि इस हमले में 25 किलोमीटर तक उड़ने वाले चाइनीज ड्रोन का इस्तेमाल किया जाना प्रतीत होता है। इसका वजन भी 25 किलो के आसपास होता है। यह कम से कम 5 किलो तक विस्फोटक पेलोड कर सकता है। इन सभी पहलुओं की एनआईए जांच कर रही है।

इसी साल जनवरी महीने में सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा था कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर 300-400 आतंकवादी घुसपैठ का फिराक में हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि भारत के सक्रिय अभियानों एवं मजबूत आतंकवाद निरोधक ग्रिड ने न केवल दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाया है बल्कि घुसपैठ के प्रयासों पर भी काबू पाया है। उन्होंने कहा कि सेना ने पिछले साल आतंकवाद निरोधक अभियानों में नियंत्रण रेखा पर 200 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया और इन उपायों से जम्मू कश्मीर के लोगों को आतंकवाद से राहत मिली।

पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना जारी रखे हुए है। नियंत्रण रेखा के पार प्रशिक्षण शिविरों में करीब 300-400 आतंकवादी घुसपैठ करने की फिराक में हैं। ड्रोन के माध्यम से हथियारों की तस्करी की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपनी युद्धक क्षमता को बढ़ाने के लिए पुनर्गठन एवं आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि सेना कृत्रिम मेधा, ब्लॉक चेन (कंप्यूटर प्रणाली पर बिटक्वाइन में विनिमय), क्वांटम कंप्यूटिंग, मानवरहित प्रणाली, आदि उभरती प्रौद्योगिकियों पर आईआईटी जैसे शीर्ष शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है।

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