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नगर निगम के चुनावी किस्से साल 1973: सरकारी क्लर्क रहते पहले वार्ड कमिश्नर, फिर वाइस चेयरमैन और चेयरमैन बने थे धनंजय सिंह

धनबाद5 घंटे पहलेलेखक: केके सुनील

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  • एसबीआई में किरानी धनंजय को जोनल मुख्यालय से मिली थी चुनाव लड़ने की अनुमति

क्या आप जातने हैं कि स्वतंत्र भारत में काेई व्यक्ति सरकारी नौकरी करते हुए धनबाद नगरपालिका के वार्ड कमिश्नर, फिर वाइस चेयरमैन और उसके बाद चेयरमैन तक बने। जी हां, वह शख्स थे…धनंजय सिंह। धनबाद नगरपालिका के इतिहास में पहले व्यक्ति, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क रहते हुए 1973 में धनबाद नगरपालिका का चुनाव लड़े।

मनईटांड़ निवासी धनंजय वार्ड नंबर 4 से चुनाव लड़कर वार्ड कमिश्नर बने थे। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने एसबीआई के जोनल ऑफिस से अनुमति मांगी थी। एसबीआई रांची जाेन के तत्कालीन एजेंट जेबी चटर्जी ने लड़ने की इजाजत दी थी। इसके बाद वे 1978, 1983 और 1988 में भी वार्ड कमिश्नर का चुनाव लड़े और जीते। 1988 में निर्विराेध चुने गए । 1983-88 और 1988-1994 तक लगातार दाे टर्म वाइस चेयरमैन भी रहे। तत्कालीन चेयरमैन हरिहर साव के निधन के बाद वे 17 दिनों तक चेयरमैन भी रहे। 2003 में उनकी मृत्यु हाे गई।

नगरपालिका में तीन टर्म वार्ड आयुक्त और दो बार वाइस चेयरमैन निर्वाचित, 17 दिन चेयरमैन रहे

कोर्ट के आदेश पर हुए चुनाव में नहीं लड़े धनंजय
1987 में तत्कालीन चेयरमैन हरिहर साव की मृत्यु हाे गई। इसके बाद 8 सितंबर 1987 से 25 सितंबर 1987 तक कार्यकारी चेयरमैन भी रहे। काेर्ट के आदेश से चेयरमैन का चुनाव हुआ, पर धनंजय नहीं लड़े। अधिवक्ता बीके प्रसाद चेयरमैन निर्वाचित हुए थे।

शंकर दयाल के समर्थन से चुनावी मैदान में उतरे थे धनंजय
धनंजय सिंह के पिता इंद्रदेव सिंह काेलियरी मालिक बलिराम तनेजा के यहां नाैकरी करते थे। उनके छाेेटे भाई दिनेश सिंह, जाे एसबीआई स्टाफ एसाेसिएशन के नेता भी रह चुके हैं, बताते हैं कि पिता का कांग्रेस नेता शंकरदयाल सिंह से अच्छा संपर्क हो गया था। शंकर दयाल सिंह के समर्थन मिला तो बड़े भाई धनंजय सिंह 1983 में पहली बार वायस चेयरमैन का चुनाव लड़े और जीत हासिल की।

वाइस चेयरमैन के चुनाव में पीएन सिंह को 4 वोटों से हराया
1983 में चेयरमैन पद के प्रत्याशी हरिहर साव के गुट में धनंजय सिंह वाइस चेयरमैन के प्रत्याशी थे, जबकि दूसरे गुट से एडवोकेट बीके प्रसाद चेयरमैन व पीएन सिंह वाइस चेयरमैन के उम्मीदवार थे। हरिहर-धनंजय गुट को शंकर दयाल सिंह, बिनाेद बिहारी महताे और एके राय का समर्थन था, जबकि बीके प्रसाद-पीएन सिंह गुट काे सूर्यदेव सिंह का। हरिहर 5 और धनंजय 4 वाेट से जीते थे। हरिहर काे 17 और धनंजय काे 16 वाेट, जबकि बीके प्रसाद काे 11 और पीएन सिंह काे 12 वाेट मिले थे।

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