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निजी जमीन खाली कराने का मामला: एडीजे कोर्ट ने कब्जा धारियों को दी अग्रिम जमानत, पुलिस ने एफ आई आर में मरे हुए परिवार के सदस्य का भी डाला था नाम

बिलासपुरएक घंटा पहले

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रानी यादव और उसके परिवार को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत

मंगला स्थित निजी जमीन पर बेजा कब्जा हटाने गई निगम की टीम और वहा रहने वाले लोगों के बीच जम कर झूमा झटकी हुई थी। इस मामले में तब निगम की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। सिविल लाइन पुलिस ने अपने एफआईआर में 9 लोगों का नाम दर्ज किया था जिसमे से 7 लोगों को आज एडीजे कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है।

16 जुलाई को जमीन से कब्जा खाली कराने गई थी निगम और पुलिस की टीम

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एक हफ्ते पहले निजी जमीन खाली कराने पहुंच गई थी निगम और सिविल लाइन पुलिस

दरअसल मंगला स्थित 4600 वर्गफीट की जमीन पर रानी यादव का परिवार पिछले 80 साल से रह रहा है। यह जमीन 27 खोली निवासी अरुण सिंह के नाम पर दर्ज है। पिछले दिनों अरुण सिंह को नगर निगम की तरफ से लेकर नोटिस जारी किया गया। निगम ने उन्हें जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया था। वही 13 जुलाई को अरुण ने नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि मंगला की यह जमीन उनकी है। उन्होंने कई साल पहले इसे देखरेख के लिए रानी यादव के परिवार को दिया था। आगे उन्होंने कहा कि उनके जमीन पर बिना उनकी अनुमति के निर्माण किया जा रहा है इसलिए अगर नगर निगम उसे तोड़ती है तो उन्हें कोई भी आपत्ति नहीं है। अरुण सिंह के जवाब के बाद 16 जुलाई को सुबह 11:00 बजे अवैध निर्माण हटाने के लिए नगर निगम का अमला सिविल लाइन पुलिस के साथ मंगला स्थित इस जमीन पर पहुंच गया। इस दौरान रानी यादव का परिवार और पुलिस के बीच झूमा झटकी भी हुई। इसके बाद निगम की ओर से रानी यादव के परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।

पुलिस ने एफ आई आर में डाल दिया मरे हुए लोगों का भी नाम
निगम की ओर से शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने रानी यादव के परिवार के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। खास बात यह है कि पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की इतनी हड़बड़ी थी कि उन्होंने बंशीलाल यादव जो कि इस दुनिया में जिंदा ही नहीं है उनका भी नाम एफ आई आर में डाल दिया। वही यशोदा बाई का भी नाम पुलिस की ओर से दर्ज किया गया जोकि इस परिवार की सदस्य ही नहीं है।

एडीजे कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत
रानी यादव के परिवार ने अपने खिलाफ दर्ज हुए एफआईआर को बिलासपुर के जिला अदालत में चुनौती दी थी। यहां पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने परिवार की वकील प्रियंका शुक्ला ने बताया कि रानी यादव और उनका परिवार केवल उस जमीन पर नाली ढकने का काम कर रहा था। वही रोजगार के तौर पर उन्होंने एक दुकान खोलने की भी कोशिश की थी जोकि निगम के नोटिस के बाद बंद कर दिया गया था। बावजूद इसके एक निजी जमीन पर निगम की ओर से पुलिस के साथ कार्रवाई की गई जोकि नियम विरुद्ध है। कोर्ट ने वकील की ओर से पेश किए गए दलील को सुनने के बाद रानी यादव और उसके परिवार के सभी दूसरे सदस्यों को अग्रिम जमानत दे दी ।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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