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पहले ब्लैक में ड्रग खरीदना था मजबूरी: मरीज अधिक थे तो सिफारिशों से भी नहीं मिला रेमडेसिविर, पोर्टल शुरू होने के बाद ओवरस्टॉक

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बठिंडा16 घंटे पहलेलेखक: संजय मिश्रा

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  • डिर्पाटमेंट आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर दे रहा वैक्सीन

आपको पढ़ने में हैरानी हो सकती है, लेकिन यह बिल्कुल सही है। आज से करीब दो माह पहले जब शहर कोरोना पीक की तरफ बढ़ रहा था तथा अपने प्रियजनों की जान बचाने को रेमडेसिविर को दिन-रात एक कर खोजने की कोशिश के बावजूद कामयाबी नहीं मिलने तथा ब्लैक में इस इंजेक्शन के बिकने की हजारों कहानियां लोगों से सुनने के बाद जहां दहशत का माहौल था।

वहीं आज से करीब 15 दिन पहले डिर्पाटमेंट आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर द्वारा पोर्टल लिंक शुरू किया गया जहां से आपको मेडिसिन मिल सकती थी, लेकिन इस वेबसाइट के बारे में भी काफी समय तक लोगों को जानकारी ही अधिकांश अस्पतालों द्वारा दी गई, लेकिन आज आलम यह है कि जब कोरोना के केस कम हो गए हैं, वहीं ब्लैक में बिकने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर का ओवरस्टॉक सेहत विभाग के पास मौजूद है तथा लाखों में बिकने की चर्चा में आता यह इंजेक्शन आज करीब 1100 रुपये से शुरू होकर अलग-अलग रेट पर पोर्टल पर मौजूद है।

इसके अलावा करीब 15 तरह की अन्य जरूरी दवाएं भी इस पोर्टल पर हैं जहां पर अस्पताल मरीज के पेपर अपलोड कर दवा आर्डर कर सकता है। ऐसे में सरकार को इस बात यह सोचनी चाहिए कि जब कोरोना पीक पर था तो उस समय यह पोर्टल उनका मददगार साबित होता, लेकिन दवाओं के बिलों ने अधिकांश कोरोना पॉजिटिव मरीजों की आर्थिक हालातों को बुरी तरह बिगाड़ दिया है।

पीक पर कोरोना के समय इंजेक्शन लेना था बेहद चुनौतीपूर्णअप्रैल माह में कोरोना के पीक की तरफ बढ़ने के बाद से अचानक रेमडेसिविर की डिमांड आसमान को छूना शुरू हो गई। आलम यह हो गया कि धीरे-धीरे रेमडेसिविर बाजार से गायब हो गया तथा कंट्रोल रेट पर यह इंजेक्शन ही दुकानों से नहीं मिला।

बाद में राज्य सरकार ने इसे लोगों को उपलब्ध करवाने को ड्रग इंस्पेक्टरों को इसका कंट्रोल दे दिया तथा उस समय भी आमद से करीब 10 गुणा अधिक इंजेक्शन सिस्टम को जरूरी थे, लेकिन सरकारी तंत्र इसकी कमी पूरी नहीं कर सका तथा इस कमी का पूरा लाभ ब्लैक मार्केट के लोगों तथा चंद लालची अस्पताल वालों ने उठाया जहां लोगों के अनुसार एक-एक इंजेक्शन मुंह मांगे दामों पर दिया गया तथा कुछ हजार से लेकर लोग इस इंजेक्शन के लिए लाखों चुकानें की बातें सामने आती रहीं।

आलम यह था कि महाराष्ट्र व दिल्ली बैठे लोग तक बठिंडा में रेमडेसिविर की लिंक के जरिए खोज करते मिले तथा कई केसों में बठिंडा के लोग चंडीगढ़ से जाकर इस इंजेक्शन को लेकर आए ताकि उनके मरीज की जान बच सके। ऐसे में सरकार अगर पीक के समय इस सुविधा को उपलब्ध करवा देती तो लोगों की लूट इससे बच जाती। इस बाबत समाजसेवी सोनू महेश्वरी व विजय कुमार कहते हैं कि सेवा के दौरान उन्हें अकसर ही इस इंजेक्शन को लेने के लिए मुंह मांगे दाम देने वाले लोग मिलते, लेकिन उन्हें इंजेक्शन ही नहीं मिले तथा लोग तय रेट से बहुत अधिक दामों पर इस इंजेक्शन को लेने पर मजबूर हुए।

पूरा स्टॉक मौजूद है

डिर्पाटमेंट आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर द्वारा शुरू किए पोर्टल पर प्राइवेट अस्पताल व कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों के लिए कई जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर जरूरत अनुसार रेमडेसिविर व अन्य दवाएं कंट्रोल रेट पर ले सकता है। इंजेक्शन सहित हर दवा का पूरा स्टॉक है।

डा. तेजवंत सिंह ढिल्लों, सिविल सर्जन, बठिंडा

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