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पेगासस फोन जासूसी केस में पहली जांच: मोरक्को की खुफिया एजेंसियों पर फ्रेंच पत्रकारों की जासूसी कराने का आरोप, फ्रांस सरकार ने शुरू की इन्वेस्टिगेशन

पेरिस26 मिनट पहले

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फ्रांस सरकार प्राइवेसी के उल्लंघन, निजी इलेक्ट्रिक डिवाइस में धोखेबाजी से दािखल होने और आपराधिक साजिश के आरोपों की जांच करवा रही है। -फाइल फोटो

पेगासस फोन जासूसी मामले में पहली बड़ी जांच शुरू हो गई है। फ्रांस सरकार ने इजराइली कंपनी के स्पायवेयर पेगासस के जरिए अपने देश के पत्रकारों की जासूसी की जांच शुरू कर दी है। मोरक्को की खुफिया एजेंसियों पर आरोप है कि उसने पेगासस के जरिए फ्रेंच जर्नलिस्ट की जासूसी कराई।

फ्रांस सरकार प्राइवेसी के उल्लंघन, निजी इलेक्ट्रिक डिवाइस में धोखेबाजी से दािखल होने और आपराधिक साजिश के आरोपों की जांच करवा रही है। इस संबंध में इन्वेस्टिगेटिव वेबसाइट मीडिया पार्ट ने कानूनी शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि, मोरक्को ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है।

मीडिया पार्ट ने खुलासा किया कि उसके फाउंडर एड्वी प्लेनेल और उनके एक जर्नलिस्ट को मोरक्को की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने टारगेट बनाया। इसके अलावा ले मोंडे और AFP के जर्नलिस्ट भी टारगेट लिस्ट में शामिल थे। हालांकि, मोरक्को सरकार ने कहा कि हमने कभी भी कम्युिनकेशन डिवाइस में घुसपैठ के लिए किसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं किया।

180 से ज्यादा रिपोर्टर्स और संपादक निगरानी की लिस्ट में थे
वॉशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन, ले मोंडे और दूसरे मीडिया हाउस ने लीक हुए 50 हजार फोन नंबरों की लिस्ट के आधार पर दावा किया था कि इजरायल के NSO ग्रुप द्वारा बनाए गए पेगासस स्पायवेयर के जरिए 180 से ज्यादा रिपोर्टर्स और संपादकों की जासूसी की गई। करीब 16 मीडिया समूहों की साझा पड़ताल के बाद इस बात का दावा किया गया। इन देशों में भारत भी शामिल है, जहां सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने वाले पत्रकार निगरानी के दायरे में थे।

न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों की जासूसी की गई है उनमें 300 भारतीय लोगों के नाम शामिल हैं। जासूसी के लिए इजराइली कंपनी द्वारा बनाए गए स्पायवेयर पेगासस का इस्तेमाल किया गया है।

किस देश में कितने पत्रकारों पर नजर

  • अजरबैजान: देश में दमन और भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले कम से कम 48 पत्रकारों पर सरकार निगरानी रख रही है।
  • मोरक्को: सरकार के भ्रष्टाचार और मानव अधिकार उल्लंघन की आलोचना करने वाले कम से कम 38 पत्रकार निगरानी सूची में हैं।
  • UAE: फाइनेंशियल टाइम्स के एडिटर और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर समेत कम से कम 12 पत्रकारों की निगरानी की जा रही है।
  • भारत: देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों समेत 38 पत्रकारों की निगरानी की जा रही थी। इनके अलावा राहुल गांधी, प्रशांत किशोर और पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की स्टाफर भी इस लिस्ट में शामिल थी।
  • इनके अलावा मैक्सिको, हंगरी, बेहरीन, काजिकिस्तान और रवांडा में भी सरकारों ने पत्रकारों की जासूसी कराई।

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विदेश | दैनिक भास्कर

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