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पेयजल संकट: चार सदस्यों वाले परिवार को औसतन ‌‌7500 रुपए प्रति माह पानी पर खर्चने पड़ रहे

अम्बाला2 घंटे पहले

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अम्बाला | कैंट के विकासपुरी में टैंकर से पानी भरते लोग।

  • रामपुर एरिया में दो ट्यूबवेल की जरूरत, नहरी पानी डेढ़ साल बाद पहुंचेगा

अर्जुन नगर की कई गलियां में पीने के पानी की सप्लाई के लिए पाइप लाइन ही नहीं डली है। यहां लोग टैंकर पर निर्भर हैं। कॉलोनी में रहने वाले औसतन 4 सदस्यों वाले परिवार को दो दिन में एक टैंकर खरीदना पड़ता है। एक महीने में 15 टैंकर की खपत हो जाती है। 500 रुपए के हिसाब से हर महीने लगभग 7,500 रुपए की कमाई पानी में चली जाती है। कुछ ऐसा ही संकट रामपुर, रामपुर मोड़ मार्केट, आजाद नगर और अर्जुन नगर ए ब्लॉक की आबादी झेल रही है।

आबादी बढ़ने से यहां पर पानी की खपत बढ़ गई है। यहां रहने वाले लोग रातों को जागकर पीने का पानी भरते हैं। कुछ एरिया तो ऐसे हैं जहां पर पीने के पाइप लाइन भी नहीं डली है। जलापूर्ति विभाग के अमरुत प्रोजेक्ट के तहत रामपुर में बूस्टर पंप दो साल पहले लग चुका है। इससे लोगों के मन में आस जगी थी उन्हें स्वच्छ पेयजल मिलेगा, लेकिन उन्हें अभी डेढ़ साल और इंतजार करना होगा, क्योंकि अभी घसीटपुर ट्रीटमेंट प्लांट में नहरी पानी को ट्रीट करने वाला मीडिया प्लांट तैयार होना है। इसके अलावा जलापूर्ति विभाग की ओर से रामपुर में पानी के दो नए ट्यूबवेल 34.45 लाख रुपए से लगने हैं जिसके टेंडर विभाग की ओर से लगा दिए हैं।

दिक्कत इसलिए… दो हलकों में फंसा एरिया
अर्जुन नगर कैंट विधानसभा हलके का गांव है और विकासपुरी नारायणगढ़ हलके में आता है। दोनों हलकाें के बीच अर्जुन नगर बसा हुआ है। दिक्कत ये है कि रामपुर गांव व आसपास की कॉलोनियों के लिए सिर्फ एक ट्यूबवेल है। वो भी टांगरी नदी में लगा हुआ है। गर्मी में पानी की खपत इतनी अधिक है कि अंतिम छोर यानि अर्जुन नगर तक पानी की सप्लाई पहुंचने में रात के 2 बज जाते हैं। कई दिनों तक पानी भी नहीं पहुंचता। इसलिए नारायणगढ़ हलके में विकासपुरी में स्थित शिरडी साईं मंदिर के पास से पानी भरकर लाते हैं।

मजबूरी… लोगों ने 200 से 250 फीट पर बोरवेल कराए
अर्जुन नगर के बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्होंने घर में 250 फीट की गहराई पर बोरवेल लगा रखा है। जिस पर 40 से 50 हजार रुपए खर्च करना पड़ते हैं। जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार अम्बाला कैंट में भूमि सतह से लेकर 700 फीट तक का पानी पीने लायक नहीं है। इससे गहराई के बाेरवेल का पानी ही पीने याेग्य हाेता है। कैंट की ऊपरी सतह में वाटर लॉगिंग की समस्या के चलते बहुत ज्यादा शोरा होता है। एक रात पानी रख दिया जाए तो पीला पड़ जाता है। यह पेट की बहुत बीमारियों को जन्म दे सकता है। इसलिए लाेग यदि बाेरवेल का पानी इस्तेमाल करते हैं ताे आरओ जरूर लगवाएं।

संभलकर पीएं टैंकर का पानी… 16 साल में टेस्ट नहीं कराया बोरवेल का पानी
दैनिक भास्कर ने अर्जुन नगर में टैंकर के जरिए पानी सप्लाई करने वाले रेशम वाटर टैंक के संचालक परमजीत सिंह से एक ग्राहक बनकर बातचीत की। पानी से जुड़े सभी सवाल किए तो संचालक परमजीत ने बताया कि उसका बोरवेल 16 साल पुराना है और 400 फीट पर पूजा विहार में लगा हुआ है। कंस्ट्रक्शन के कामों व घरों में एक ही बोरवेल से पानी सप्लाई भेजता है।

एक टैंकर की कीमत 500 रुपए है और अन्य वाटर टैंक सप्लाई करने वाले लोगों से भी उसका संपर्क रहता है। परमजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी अपने स्तर पर पानी की टेस्टिंग नहीं कराई। बराड़ा में कई साल पहले एक राजनीतिक दल की रैली के दौरान उसके पानी की चेकिंग हुई थी। चेकिंग में पानी सही बताया गया था। बाकी वे क्लोरिन वगैरह पानी में नहीं डालते।

जानना जरूरी… टैंकर या कैंपर से मंगवा कर पानी पी रहे हैं तो
जलापूर्ति विभाग के जेई जगदीप विर्क से टैंकर व कैंपर के बारे में पूछा गया ताे उन्होंने बताया कि पानी का टीडीएस यदि 50 से 150 तक है तो ठीक है। यदि किसी ने घर में बोरवेल करवाया हुआ है तो बोरवेल 700 फीट से अधिक गहराई का होना चाहिए। यदि कम है तो उसमें शोरा हो सकता है। खासतौर पर यह ध्यान रखना चाहिए कि मकान के आसपास कोई ऐसी जगह न हो, जहां पर नाले-नालियों का पानी जमा होने के बाद सड़ रहा हाे। यदि ऐसी जगह है तो वह पानी बिल्कुल पीने लायक नहीं है।

समाधान… रामपुर गांव व आसपास के आबादी में पानी की दिक्कत नवंबर तक दूर होगी
जलापूर्ति विभाग के जेई जगदीप विर्क व एसडीओ रणधीर सिंह ने बताया कि इस एरिया के लोग हमारे पास लिखित में एक मांग पत्र देंगे ताे पाइप लाइन डाल दी जाएगी। अंतिम छोर तक पानी प्रैशर कम हाेने की वजह से नहीं पहुंच पा रहा है। जेई ने बताया कि बुधवार को रामपुर के ट्यूबवेल में नई मोटर व नया स्टार्ट डाल दिया है। अब पानी का प्रैशर बढ़ेगा। विभाग यहां पर पानी के दो नए ट्यूबवेल लगाने जा रहा है।

विभाग की मैकेनिकल विंग ने इसके टेंडर लगा दिए हैं और अलॉट हो जाएंगे। नवंबर-दिसंबर तक ट्यूबवेल चलने के बाद पानी नहीं पहुंचने की दिक्कत दूर हो जाएगी। नहरी पानी अमरुत प्रोजेक्ट के अधीन है और नगर परिषद इसका काम कर रही है। अभी घसीटपुर में वाटर ट्रीट करने के लिए 30 एमएलडी का मीडिया प्लांट तैयार हो रहा है, जिसके तैयार होने के बाद ही नहरी पानी लोगों को मिलेगा।

अनदेखी… नारायणगढ़ की कॉलोनी ने रोक रखी कैंट की पानी निकासी
इंडस्ट्रियल एरिया के पीछे सात एकड़ का जोहड़ है, जो नगर परिषद के कब्जे में है। इसमें अर्जुन नगर ए, अर्जुन नगर बी, कमल विहार और गांव रामपुर का पानी आ रहा है। जोहड़ से आगे पानी की निकासी नहीं है, क्योंकि विकासपुरी में मकान व कॉमर्शियल बिल्डिंग बन चुकी हैं। यह हलका नारायणगढ़ का है। जोहड़ में पानी सड़ रहा है और बारिशों में पानी घरों के आगे जमा हो जाता है।

कुछ एरिया में पानी की पाइप लाइन न होने से लोगों ने कम गहराई पर बोरवेल या हैंडपंप लगा रखे हैं, ऐसे में ऊपरी सतह का पानी जोहड़ की वजह शोरायुक्त हो जाता है। यह समस्या डीसी के सामने कॉलोनी के लोगों ने रखी थी। डीसी ने एडीसी और फिर एडीसी ने जिला नगर आयुक्त (डीएससी) के पास भी शिकायत भेजी थी। लेकिन नगर परिषद अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाया है जिससे भूमिगत पानी शोरायुक्त हो रहा है।

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हरियाणा | दैनिक भास्कर

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