Breaking News

प्रतिस्पर्धा का आयोजन: फ्लावर कॉम्पिटिशन में तरविंदर काेचर बनी ओवरऑल विजेता

शिमला3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

ग्रीन न्यू शिमला साेसाइटी ने करवाई प्रतियाेगिता

  • ग्रीन न्यू शिमला साेसाइटी ने करवाई प्रतियाेगिता

साईं भवन सेक्टर-4 न्यू शिमला में ग्रीन न्यू शिमला साेसाइटी द्वारा ऑनलाइन गार्डन फ्लावर कॉम्पिटिशन-2021 में तरविंदर कोचर को सबसे ज्यादा अंक हासिल करने पर ओवरऑल विजेता की ट्रॉफी दी गई। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए साेसाइटी के महासचिव डॉ. अमरपाल कोचर ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में न्यू शिमला के लाेगाें से सोसाइटी ने 11 विभिन्न श्रेणियाें में उनके घरों में लगाए गए पौधों के चित्र ऑनलाइन मंगवाए।

इन वर्गों में टैरेस गार्डन, सीजनल फूल, गमलों में लगाए गए फूल, स्टेयरकेस गार्डन, लार्ज गार्डन, टाइनी गार्डन इत्यादि जैसी विभिन्न श्रेणियां शामिल की गईं। ऑनलाइन प्रतियोगिता में 34 लाेगाें ने भाग लिया, जिसमें 16 सदस्य विभिन्न श्रेणी में विजेता रहे। प्रतियोगिता में प्रो. पीके आहलूवालिया, प्रो. विपन गुप्ता और डॉ. अनिल कुमार ठाकुर ने जज की भूमिका निभाई।

साेसाइटी की अध्यक्ष माला सिंह ने सभी विजेताओं को ट्रॉफी और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। इस मौके पर डिविजनल रिटेल हेड और ऑयल इंडस्ट्री कोऑर्डिनेटर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन अनिल सिंह और वन मंडल अधिकारी ग्रामीण सुशील राणा भी उपस्थित रहे।

ये रहे विजेता

विभिन्न श्रेणियों में जीतने वाले गीता कपूर, रवीन सिंह, नीनासूद, उषा मनचंदा, उषा शर्मा, एसएन कपूर, रंजना आहलूवालिया, मनीष नेगी, मीनू जीवन, संजय सूद, लव शांडिल, अंशु सूद, हरशरण कौर, राहुल महेश्वरी, विनीता स्वराज और सृष्टि चौहान शामिल हैं। इस मौके पर डॉ. जीएस वजीर और सुशील राणा को 13 जून को आयोजित वेबिनार में बतौर स्पीकर शामिल होने पर सम्मानित किया गया।

अपने सदस्यों को प्रोत्साहित करने के लिए सोसाइटी ने सभी रजिस्टर्ड सदस्यों को एक-एक फूल का गमला भेंट किया। साेसाइटी की अध्यक्ष ने आईओसी के अधिकारी और साईं भवन उपलब्ध करवाने के लिए साईं इंजीनियरिंग फाउंडेशन के सीईओ आरके वर्मा का भी आभार जताया।

खबरें और भी हैं…

हिमाचल | दैनिक भास्कर

About R. News World

Check Also

सब्जियाें पर भी महंगाई की मार: शहर में ज्यादातर सब्जियां 50 के पार, 20 रुपए वाला टमाटर भी अब 50 रुपए किलाे में बिक रहा

शिमलाएक घंटा पहले कॉपी लिंक बारिश के कारण मैदानी इलाकाें से कम आवक और महंगी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *