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प्रयागराज से मां और बेटी की खूबसूरत कहानी: चलती ट्रेन से दो साल की बच्ची नीचे गिरी, बचाने के लिए तीन किलोमीटर तक पटरी पर नंगे पैर दौड़ गई मां

प्रयागराज28 मिनट पहले

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ट्रेन से गिरने वाली मीनाक्षी और उसकी मां।

वो कहते हैं न कि जाखो राखे साइयां, मार सके न कोई। सोमवार को प्रयागराज में कुछ ऐसा ही हुआ। यहां चलती ट्रेन से दो साल की एक बच्ची नीचे गिर गई। चेन पुलिंग करके ट्रेन रूकवाकर उसे बचाने के लिए उसकी मां तीन किलोमीटर तक पटरियों पर दौड़ लगाती रही। जब बच्ची सही सलामत मिली तो मां की जान में जान आ गई। गनीमत थी की ट्रेन की स्पीड स्लो थी और बच्ची को ज्यादा चोट नहीं आई। हालांकि, जिसने भी यह देखा वह दंग रह गया।

मां का पल्लू पकड़कर खड़ी थी, झटका लगा और गिर गई
मानिकपुर के इंदिरा नगर की रहने वाली माया देवी को उसके पति ने मार-पीटकर घर से निकाल दिया। वह ट्रेनों में झाड़ू लगाकर लोगों से पैसे मांगती है और अपना गुजारा करती है। दो साल की बेटी मीनाक्षी को भी साथ रखती है। सोमवार को माया अपनी बेटी सोनाक्षी को लेकर मानिकपुर स्टेशन से गोदान एक्सप्रेस में झाड़ू पोछा करने के लिए ही चढ़ी थी। उस वक्त ट्रेन की स्पीड लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे की थी। मीनाक्षी अपनी मां का पल्लू पकड़कर ट्रेन के दरवाजे के पास ही खड़ी थी। ट्रेन जसरा से जैसे ही आगे बढ़ी मनकवार गांव के सामने ट्रेन में झटका लगा और मीनाक्षी नीचे गिर गई।

नंगे पांव की बेटी के लिए पटरियों पर दौड़ लगा दी
बेटी के लिए बदहवास होकर माया बोगी में चीखने लगी। अरे मेरी बेटी नीचे गिर गई। ट्रेन रोको…ट्रेन रोको। इससे बोगी में हड़कंप मच गया। ट्रेन जिस स्पीड में थी किसी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था। तभी किसी ने कहा चेन पुलिंग करो। भागकर माया चेन पुलिंग करने की कोशिश करने लगी। कुछ वेंडरों ने उसकी मदद की। रुकते-रुकते ट्रेन हादसे वाली जगह से करीब तीन किलोमीटर दूर इरादतगंज रेलवे स्टेशन तक पहुंच गई। लेकिन जैसे ही ट्रेन रूकी, बदहवास माया ने नंगे पांव ट्रेन की पटरियों पर दौड़ लगा दी।

घायल बच्ची मीनाक्षी को अब होश आ गया है। मां से मिलने के बाद बच्ची गले से लिपट गई।

घायल बच्ची मीनाक्षी को अब होश आ गया है। मां से मिलने के बाद बच्ची गले से लिपट गई।

जब तक मां पहुंची, तब तक दूसरी मां ने बचा ली थी जान
जिस जगह बच्ची ट्रेन से नीचे गिरी वहीं पास में मनकवार गांव की आरती पटेल भी थीं। बच्ची को पटरी पर गिरते देख वह तुरंत उसके पास पहुंच गईं। उन्होंने बच्ची को उठाया और इलाज के लिए घर लेते गईं। बच्ची के सिर से खून निकल रहा था और वो बेहोश हो गई थी। आरती ने एक मां की तरह ही मीनाक्षी की चिंता की। उन्होंने पूर्व प्रधान की मदद से डॉक्टर को बुलवाया और बच्ची का मरहम-पट्‌टी करवाया। इंजेक्शन देने के बाद बच्ची को होश आया।

दौड़ने में मां की सांसें उखड़ रही थीं लेकिन पैर नहीं थमे
बेटी को बचाने के लिए ट्रैक पर दौड़ रही मां की सांसें जरूर उखड़ रही थीं पर उसके पैर नहीं थमे। नजरें तो बस बेटी को ढूंढ रही थीं। दौड़ के बीच उसे पैर में लग रही ठोकरों का भी होश नहीं रहा। उसे नहीं पता था कि कितनी दूर उसकी बेटी गिरी है। बस अंदाजे से बेटी को ढूंढती और भागती जा रही थी। पटरी पर पत्थर से ठोकर खाकर दो बार गिरी भी। पैर से खून बहने लगा था पर वो रुकी नहीं। बदहवास भागती रही। काफी दूर निकलने के बाद उसे रेलवे ट्रैक पर भीड़ दिखाई दी।

वहां पहुंचते पहुंचते वह बेदम सी हो गई। उसे हैरान-परेशान देख लोगों ने पूछा क्या हुआ ? तुम भाग क्यों रही हो? हांफते हुए उखड़ती सांसों के साथ…साहब कुछ देर पहले ही मेरी बेटी यहीं ट्रेन से नीचे गिर गई थी। अच्छा वो तुम्हारी बेटी है? जी, मेरी है? क्या हुआ उसे?…मेरी बच्ची ठीक तो है न??आप लोग कुछ बोलते क्यों नहीं??…कहां है वो?। एक बुजुर्ग ने बोला घबराओ मत तुम्हारी बच्ची जिंदा है। घायल हो गई है। उसे डॉक्टर के पास लेकर गए हैं। इलाज हो रहा है।

रेलवे किनारे उगी घास की वजह से बची जान
जिस स्पीड में ट्रेन थी बच्ची का बचना मुश्किल ही नहीं नामुमिकन था। आरती ने बताया कि बारिश के कारण रेलवे किनारे बड़ी-बड़ी घास उग आई है। बच्ची छिटककर उसी घास पर आकर गिरी, जिससे उसे बहुत ज्यादा चोट नहीं आई। बच्ची के सिर में हल्की चोट आई थी। बस, वह सहम गई थी। गांव वालों ने मां-बेटी को भोजन करवाया और उसकी कुछ आर्थिक मदद भी की।

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