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भास्कर की खबर का असर: ​​​​​​​दिव्यांग ‘राजेश्वरी’ के घर पहुंचे अफसर, CM के निर्देश पर मिली नई व्हील चेयर; बोली- इंजीनियर बनना चाहती हूं

कोंडागांव7 घंटे पहले

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मुख्यमंत्री ने स्वत: संज्ञान लिया और कलेक्टर को राजेश्वरी की हर संभव मदद करने और नई व्हील चेयर देने के निर्देश दिए। जिसके बाद अफसर उसके घर पहुंच गए। 

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव की 13 साल की राजेश्वरी दिव्यांग नहीं है, बल्कि दिव्य हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले के प्रशासनिक अफसर उसके घर पहुंचे। उन्होंने राजेश्वरी को नई व्हील चेयर दी। समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति देने की घोषणा भी की है। इस दौरान राजेश्वरी ने कहा कि वह इंजीनियर बनना चाहती है। उसका परिवार भी सहयोग करता है। दैनिक भास्कर ने एक दिन पहले राजेश्वरी के सशक्त हौसले की तस्वीर उकेरी थी।

दरअसल, 13 अक्टूबर को दैनिक भास्कर एप ने ‘कोंडागांव की दिव्यांग ‘राजेश्वरी’ का सामर्थ्य:13 साल की बच्ची के हाथ-पैर बेकार, फिर भी लिखती है, खेलती और पेंटिंग करती है; रंगोली में बनी चैंपियन’ खबर प्रकाशित की थी। इस खबर के प्रकाशन के बाद मुख्यमंत्री ने स्वत: संज्ञान लिया और कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा को राजेश्वरी की हर संभव मदद करने और नई व्हील चेयर देने के निर्देश दिए। जिसके बाद अफसर उसके घर पहुंच गए।

नई व्हील चेयर मिली तो राजेश्वरी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

नई व्हील चेयर मिली तो राजेश्वरी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

SDM ने परिजनों से कहा- कोई समस्या हो, मदद करेंगे
मसोरा पंचायत के गुडरापारा में प्रशासनिक टीम में SDM गौतमचंद पाटिल, समाज कल्याण विभाग की उप संचालक ललिता लकड़ा सहित अन्य अफसर पहुंचे थे। उन्होंने बच्ची और उसके परिजनों से बात की। इसके बाद उसकी पुरानी व्हील चेयर की जगह नई दी गई। एसडीएम ने परिजनों से कहा कि किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता होने पर प्रशासन हर संभव मदद करेगा। इस पर परिजनों ने भी अफसरों को धन्यवाद दिया।

बच्ची को रायपुर लाकर बनवाएंगे स्पेशल व्हील चेयर
उप संचालक समाज कल्याण ललिता लकड़ा ने बताया कि राजेश्वरी के लिए कलेक्टर के निर्देश पर विभाग की ओर से नई व्हील चेयर का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए बच्ची को रायपुर ले जा कर डॉक्टरों की टीम से स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। इसके बाद नाप लेते हुए नई सीपी व्हील चेयर का निर्माण कराया जाएगा। इसमें पढ़ने और अन्य गतिविधियों के संचालन के लिए अलग से टेबल लगेगा। इसके बाद वह रोजाना के काम भी आसानी से कर सकेगी।

विश्व बालिका दिवस पर हुई रंगोली प्रतियोगिता में राजेश्वरी ने पहला स्थान हासिल किया था।

विश्व बालिका दिवस पर हुई रंगोली प्रतियोगिता में राजेश्वरी ने पहला स्थान हासिल किया था।

फिर भी हौसलों की उड़ान बाकी है…
मसोरा पंचायत के गुडरापारा में संचालित स्कूल में राजेश्वरी 7वीं क्लास में पढ़ती है। उसके दोनों हाथ-पैर जन्म से बेकार हैं। इसके बावजूद वह पढ़ती-लिखती है। गाना गाती है, खेलती है, पेंटिंग भी करती है। जिन पैरों से राजेश्वरी कलम पकड़ कर लिखती है। उन्हीं पैरों से कूची पकड़ कर पेंटिंग करती है और चॉक से रंगोली बनाकर उनमें रंग भरती है। विश्व बालिका दिवस पर हुई रंगोली प्रतियोगिता में राजेश्वरी ने पहला स्थान हासिल किया था।

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छत्तीसगढ़ | दैनिक भास्कर

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